एडजुडिकेशन मामलों की सुनवाई शुरू होने के बाद अब तक चुनाव आयोग ने कोई आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं. जिसका नतीजा ये है कि कितने लोगों के नाम कटे हैं, इसका कोई कॉन्सीलेटेड आंकड़ा आधिकारिक तौर पर नहीं है, लेकिन अनाधिकारिक तौर पर एक आंकड़ा जरूर सामने आया है. चुनाव आयोग एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बिहार और बाकी राज्यों का रोजाना अपील की आंकड़े जारी करता था. लेकिन बंगाल में इन मामलों की समीक्षा के दौरान रोज कितने मामलों का निपटारा हुआ और कितने कटे इसके आंकड़े अब तक जारी नहीं हुए.
हालांकि चुनाव आयोग यूं भी मतदाता सूची जब जारी करता है तो उसमें हिंदू या मुस्लिम या किसी धर्म के मतदाता के आधार पर आंकड़े जारी नहीं करता. लेकिन विचाराधीन वोटरों के मामले जिस तरह और जहां से सामने आए हैं, उससे एक बात साफ नजर आ रहा है कि समीक्षा के बाद कटनेवाले मतदाताओं की बड़ी संख्या मुस्लिमों की होगी, ये लगभग तय है. SIR के बाद पश्चिम बंगाल की 2026 की मतदाता सूची स्कैन की गई इमेज पीडीएफ के रूप में प्रकाशित की गई है, जिन पर कैप्चा सुरक्षा और वॉटरमार्क लगे हुए हैं. इसके कारण मतदाताओं का विश्लेषण करना भी काफी कठिन है.
चुनाव आयोग ने अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के काफिले में बवाल को लेकर ऐक्शन लिया है. (फाइल फोटो)
भवानीपुर में क्या ममता के साथ हो गया खेला?
न्यूज-18 हिंदी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में एक स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संस्था Alt News ने कोलकाता की दो विधानसभा सीटों भवानीपुर और बालीगंज के 3,52,287 मतदाता रिकॉर्ड का विश्लेषण किया. इस विश्लेषण के अनुसार इन दोनों सीटों के संयुक्त मतदाता आधार में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 39.5 प्रतिशत है, जबकि एडजुडिकेशन के दायरे में आए मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग 66.5 प्रतिशत पाई गई.
टीईटी के इंटरव्यू के रुकने से ममता बनर्जी को झटका लगा है. (फाइल फोटो)
हिंदू मतदाताओं के तुलना में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे!
दूसरी ओर बालीगंज विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग 54.3 प्रतिशत हैं. इसके बावजूद एडजुडिकेशन मामलों में उनकी हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत पाई गई, यानी चार में से तीन मामले मुस्लिम मतदाताओं से जुड़े हैं. यहां मुस्लिम मतदाताओं की एडजुडिकेशन दर हिंदू मतदाताओं की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताई गई है. बंगाल में SIR के मसले पर राजनीति इन्हीं मसलों पर हो रही है.
चुनाव आयोग की सूत्रों की मानें तो अब तक बंगाल में लगभग 60 लाख एडजुडिकेशन मामलों की समीक्षा की जा चुकी है, जिनमें से 27 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है. हालांकि ये आंकड़े आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग की तरफ से जारी नहीं हैं. लेकिन इन आंकड़ों के सूत्रों से साफ है कि ये सही हैं.
बंगाल के किन-किन जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे?
पश्चिम बंगाल के पांच जिलों को ‘हाई-एडजुडिकेशन बेल्ट’ के अंतर्गत माना जा सकता है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 60,06,675 मतदाता एडजुडिकेशन के तहत बताए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.5 प्रतिशत है. डेटा के मुताबिक राज्य के पांच जिलों को ‘हाई-एडजुडिकेशन बेल्ट’ माना जा रहा है, जहां सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इन पांच जिलों में ही कुल फ्लैग किए गए मतदाताओं का लगभग 58.65 प्रतिशत हिस्सा है. सबसे अधिक मामले मुर्शिदाबाद जिले में सामने आए, जहां करीब 11,01,145 मतदाता एडजुडिकेशन के दायरे में थे, इसके बाद मालदा में 8,28,127, नॉर्थ 24 परगना में 5,91,252, साउथ 24 परगना में 5,22,042 और उत्तर दिनाजपुर में 4,80,341 मतदाताओं के नाम Adjudication में रखे गए. इनमें से 3 जिलों में ही कुल Adjudication के कुल मामलों का 40 प्रतिशत से अधिक सामने आया. Adjudication में कटे 27 लाख नामों में से मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तरी दिनाजपुर, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना और नादिया जिले में ही 60 फीसदी से अधिक नाम कटे हैं.
बंगाल में चुनाव से पहले आयोग ने 13 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं. वहां कितनी है मुस्लिम आबादी. (सांकेतिक तस्वीर)
गौर करनेवाली बात है कि इन जिलों में मुस्लिमों की बड़ी आबादी तो है ही, मतुआ समुदाय की आबादी का बड़ा हिस्सा भी उतरी और दक्षिणी 24 परगना के दो जिलों में निवास करता है और इनके नाम भी बड़ी संख्या में कटने की आशंका है. 60 लाख में से 32 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची में जुड़े भी हैं. जांच के दौरान जिन मतदाताओं के नाम एडजुडिकेशन में रखा गया, उनके नाम मतदाता सूची में बने रहते हैं, लेकिन औपचारिक क्लियरेंस मिलने तक वे मतदान के लिए पात्र नहीं माने जाते.
ऐसे में अब 27 लाख मतदाताओं को न्यायिक समीक्षा में अयोग्य माना गया है. हालांकि इनके पास ट्रिब्यूनल के पास जाने का विकल्प है लेकिन जब तक कोई फैसला इनके पक्ष में नहीं होता तब तक इनका वोट कटा माना जाएगा. बंगाल की SIR के बाद आखिरी मतदाता सूची प्रकाशित हुई थी, तब कुल 63 लाख मतदाताओं के नाम मूल मतदाता सूची से हटे थे और अब 27 लाख. अब तक बंगाल में 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हट चुके है. बंगाल की मूल मतदाता सूची में 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 मतदाताओं के नाम थे.





