‘जिंदगी में पहली बार हुआ ऐसा’, कोर्ट रूम में फोन लेकर पहुंचे CJI सूर्यकांत, मुस्‍कुराते हुए बताने लगे मजबूरी

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नई दिल्ली: अदालतों में जहां मोबाइल फोन का दिखना भी मनाही और अनुशासन का उल्लंघन माना जाता है, वहां देश की सबसे बड़ी अदालत के सबसे बड़े न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत के हाथ में फोन देखकर हर कोई ठिठक गया. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 1 में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने न्याय के गंभीर गलियारों में मुस्कुराहटें बिखेर दीं. इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि खुद मुख्य न्यायाधीश को अपनी जेब से मोबाइल निकालकर डायस पर रखना पड़ा. यह कोई लापरवाही नहीं बल्कि न्याय की राह में आई एक तकनीकी मजबूरी थी जिसे खुद CJI ने एक बेहद निजी और रोचक स्वीकारोक्ति के साथ साझा किया. यह वाकया उस समय हुआ जब पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास से जुड़े एक बेहद जरूरी मामले की सुनवाई चल रही थी.

क्‍यों कोर्ट में फोन लेकर पहुंचे सीजेआई सूर्यकांत?
दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए कुछ महत्वपूर्ण पत्राचार CJI के मोबाइल नंबर पर आए थे. इन संचारों को रिकॉर्ड पर लाने और पढ़ने के लिए CJI को फोन का सहारा लेना पड़ा. मुस्कुराते हुए उन्होंने कोर्ट में मौजूद वकीलों से कहा, “सच तो यह है कि मुझे अभी याद आया कि यह मेरे जीवन में पहला मौका है जब मैं कोर्ट रूम के भीतर मोबाइल फोन लेकर आया हूं. मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं किया.” मुख्य न्यायाधीश की इस स्वीकारोक्ति पर कोर्ट में मौजूद वकील और कर्मचारी भी अपनी मुस्कान नहीं रोक सके और खुशनुमा माहौल के बीच सुनवाई जारी रही.

कांग्रेस उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट में बहाल
इस हल्के-फुल्के पल के पीछे एक गंभीर कानूनी लड़ाई थी. सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद पश्चिम बंगाल के अपीलीय न्यायाधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार मोताब शेख का नाम मतदाता सूची से हटाने के फैसले को रद्द कर दिया है.

मामले के मुख्य प्‍वाइंट

1. ECI के पास नहीं था कारण: पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने पाया कि चुनाव आयोग (ECI) इस बात का कोई ठोस कारण पेश नहीं कर सका कि आखिर मोताब शेख का नाम सूची से क्यों हटाया गया था.

2. नाम की स्पेलिंग का विवाद: विवाद मुख्य रूप से नाम की स्पेलिंग में विसंगति को लेकर था. न्यायाधिकरण ने मोताब शेख के आधार कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की, जिनमें उनका नाम पूरी तरह सही पाया गया.

3. आधार बना पहचान का आधार: न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए माना कि भले ही आधार नागरिकता का प्रमाण न हो, लेकिन पहचान स्थापित करने के लिए यह एक वैध दस्तावेज है.

4. चुनाव लड़ने का रास्ता साफ: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई इस राहत के बाद अब मोताब शेख फक्का निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकेंगे. न्यायाधिकरण ने चुनाव आयोग को तुरंत सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर उनका नाम बहाल करने का आदेश दिया है.

घटनाक्रम से जुड़े मुख्य सवाल-जवाब
कोर्ट रूम में CJI सूर्यकांत को मोबाइल फोन क्यों ले जाना पड़ा?

पश्चिम बंगाल के SIR अभ्यास से संबंधित कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए जरूरी पत्राचारों को पढ़ने के लिए CJI को मोबाइल का उपयोग करना पड़ा.

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्या फैसला सुनाया?

न्यायाधिकरण ने चुनाव आयोग द्वारा उम्मीदवार मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने को गलत माना और पहचान पत्र के आधार पर उनका नाम तुरंत बहाल करने का आदेश दिया.



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