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Daily Crude Expenses : भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है. यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमतें बढ़ने के बाद आयात बिल में बड़ा इजाफा हो जाता है. इस समय एक बैरल क्रूड की कीमत 10,888 रुपये पहुंच गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत रोजाना कितना क्रूड खपत करता है और इस पर प्रतिदिन कितने रुपये का खर्चा आता है.
भारत का सालाना आयात बिल अरबों डॉलर का आता है. (Image:AI)
नई दिल्ली. देश की करीब डेढ़ अरब जनता को भले ही पेट्रोल और डीजल 4 साल पुराने रेट पर मिल रहा हो, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है. 7 अप्रैल मंगलवार को भी कच्चे तेल की वायदा कीमत में 300 रुपये का बड़ा उछाल दिखा और अब इसकी कीमत 10,888 रुपये प्रति बैरल पहुंच गई है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमत को देखते हुए ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल उठता है कि देश में रोजाना कितने लीटर कच्चे तेल की खपत होती है और उस पर हर दिन कितना पैसा खर्च होता है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल का वायदा भाव मंगलवार को 300 रुपये की बढ़त के साथ 10,888 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. आपूर्ति को लेकर लगातार चिंताओं एवं पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमतों में यह तेजी आई है. एमसीएक्स पर अप्रैल में आपूर्ति वाले कच्चे तेल के अनुबंध का भाव 300 रुपये या 2.83 फीसदी चढ़कर अपने अब तक के सबसे उच्च स्तर 10,888 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसी तरह, मई में आपूर्ति वाले अनुबंध की कीमत एमसीएक्स पर 170 रुपये या 1.82 फीसदी की बढ़त के साथ 9,485 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
क्यों आ रहा तेज उछाल
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति के जटिल हालात और ऊर्जा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद यह तेजी आई, क्योंकि व्यापारियों को आपूर्ति में संभावित बाधा और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर चिंता बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मई में आपूर्ति वाले वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल का वायदा भाव 4.14 डॉलर या 3.7 फीसदी की बढ़त के साथ 116.55 डॉलर प्रति बैरल हो गया. वहीं, ब्रेंट क्रूड के जून में आपूर्ति वाले अनुबंध की कीमत 1.5 फीसदी चढ़कर 111.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई.
रोजाना कितने तेल की खपत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. जाहिर है कि यहां तेल की खपत भी काफी ज्यादा होती है. वित्तवर्ष 2025-26 में रोजाना करीब 58 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती थी, जिसे लीटर में देखा जाए तो करीब 90 करोड़ लीटर के आसपास होगा. 1 बैरल में करीब 159 लीटर तेल होता है. चूंकि, भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है तो इस पर खर्चा भी ज्यादा रहता है.
प्रतिदिन कितने रुपये का खर्चा
भारत के कुल आयात खर्च में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी तेल की ही रहती है. हालिया तनावों से भले ही क्रूड की कीमत अभी 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर दिख रही हो, लेकिन सामान्य तौर पर इसकी कीमत 65 से 70 डॉलर के बीच ही रही है. अगर इसी कीमत को औसत आधार मान लिया जाए तो रोज का खर्चा करीब 4 हजार करोड़ रुपये आता है. अगर क्रूड का भाव 110 के ऊपर जाता है तो यही खर्चा रोज का 6 हजार करोड़ रुपये से भी ऊपर हो जाता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





