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6 फुट 7 इंच लंबे बॉलर ने डेब्यू टेस्ट में लुटाए 108 रन, फिर कोई टीम पार नहीं कर पाई 100 का आंकड़ा, खेल गया वो 98 टेस्ट

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नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में कई ऐसे गेंदबाज आए जिन्होंने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा किया, लेकिन जब बात 6 फीट 7 इंच ऊंचे कद, डरावनी खामोशी और अविश्वसनीय सटीकता की आती है, तो जेहन में सिर्फ एक नाम उभरता है सर कर्टली एंब्रोस.

वेस्टइंडीज क्रिकेट के सुनहरे दौर के अंतिम स्तंभों में से एक,कर्टली एंब्रोस का करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके डेब्यू से जुड़ा एक ऐसा आंकड़ा वायरल हुआ है, जो उनकी महानता की एक नई कहानी बयां करता है.एक खराब शुरुआत और फिर कभी पीछे मुड़कर न देखना आमतौर पर माना जाता है कि ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन’, लेकिन कर्टली एंब्रोस ने इस कहावत को पूरी तरह गलत साबित कर दिया.

पहले टेस्ट में लुटा दिए थे 100 रन

साल 1988 में पाकिस्तान के खिलाफ जॉर्जटाउन में अपने डेब्यू टेस्ट में एंब्रोस थोड़े संघर्ष करते दिखे थे. उस मैच की एक पारी में उन्होंने 100 से ज्यादा रन लुटा दिए थे.  किसी भी नए गेंदबाज के लिए यह एक हतोत्साहित करने वाली शुरुआत हो सकती थी, लेकिन एंब्रोस अलग मिट्टी के बने थे. हैरानी की बात यह है कि वह उनके 98 मैचों के लंबे टेस्ट करियर की पहली और आखिरी पारी थी, जिसमें उन्होंने 100 रनों का आंकड़ा पार किया. इसके बाद उन्होंने अगले 97 टेस्ट मैच खेले, लेकिन दुनिया का कोई भी बल्लेबाज दोबारा उन्हें इस कदर नहीं कूट सका.

एंबरोस की ताकत 

सटीकता और अनुशासन का दूसरा नाम एंब्रोस की सबसे बड़ी ताकत उनकी लंबाई और उससे मिलने वाला ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ था लेकिन उससे भी ज्यादा घातक थी उनकी लाइन-लेंथ. वह घंटों तक एक ही जगह पर गेंद टप्पा खिलाने की काबिलियत रखते थे. उनका आदर्श वाक्य था “कर्टली किसी से बात नहीं करता” वह अपनी गेंदों को बोलने देते थे. उनकी गेंदबाजी कितनी किफायती थी, इसका अंदाजा उनके करियर इकोनॉमी रेट (2.30) से लगाया जा सकता है. आधुनिक युग में जहां बल्लेबाज गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, वहां एंब्रोस ने 97 मैचों तक खुद को 100 रन से कम पर रोके रखा, जो उनके अनुशासन का जीता-जागता सबूत है.

यादगार स्पेल जो आज भी याद किए जाते हैं एंब्रोस

कर्टली के करियर की बात हो और 7 रन देकर 7 विकेट (7/1) वाले स्पेल का जिक्र न हो, यह नामुमकिन है. 1993 में पर्थ की तेज पिच पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने महज 32 गेंदों के अंदर कंगारुओं की कमर तोड़ दी थी. इसके अलावा इंग्लैंड के खिलाफ 24 रन देकर 6 विकेट लेकर उन्हें सिर्फ 46 रनों पर समेट देना, आज भी टेस्ट इतिहास के सबसे घातक स्पेल में गिना जाता है.

एक बेमिसाल विरासत

कर्टली एंब्रोस ने अपने करियर का अंत 405 टेस्ट विकेटों के साथ किया. वह आज भी उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हैं जिनका औसत 21 से भी कम रहा है. उनके करियर का यह आंकड़ा कि ‘डेब्यू के बाद कभी 100 रन नहीं दिए’, यह दर्शाता है कि महान खिलाड़ी अपनी गलतियों से कितनी जल्दी सीखते हैं.  एंब्रोस ने न केवल वेस्टइंडीज को कई मैच जिताए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए तेज गेंदबाजी का एक ऐसा पैमाना सेट किया, जिसे छूना आज भी नामुमकिन सा लगता है.



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