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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुआ आतंकी हमला एक ऐसी सोच-समझी साजिश थी, जिसे कई परतों में तैयार किया गया था. इस आतंकी हमले की साजिश किसने और किसके इशारे पर रची. किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और हमारी तरह से क्या कार्रवाई हुई. इन तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़े पहलगाम हमले पर खास रिपोर्ट
पहलगाम आतंकी हमले से पहले की साजिश और बाद की जांच.
Pahalgam Attack: इस कहानी की शुरूआत होती पहलगाम की उन वादियों से, जहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी सुकून की आस में पहुंचते हैं. पहलगाम से करीब छह किलोमीटर दूर बैसरन घाटी उस दिन भी पर्यटकों से भरी हुई थी. कहीं पर बच्चे खेल रहे थे, तो कुछ लोग हसीन वादियों के बीच अपनी फोटो खिंचवाने में मगन थे. कुछ पर्यटक घुड़सवारी कर रहे थे तो कुछ जिप लाइन में अपने बच्चों के साथ मौजूद थे. कुल मिलाकर सबकुछ रोज की तरह बिल्कुल सामान्य था. लेकिन दोपहर के एक बजते ही सब कुछ बदल गया.
22 अप्रैल 2025 की उस दोपहर करीब तीन हथियारबंद आतंकी अचानक वहां पहुंचे और उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दीं. आतंकियों की तरफ से यह तो सिर्फ शुरूआत थी, उनका असल मकसद तो अभी पूरा होना बाकी थी. कुछ देर गोलियां बरसाने के बाद आतंकियों ने एक-एक कर सामने आने वाले पर्यटकों को पकड़ना शुरू किया. उनसे उनका नाम पूछा, फिर धर्म पूछा. जिसने कहा कि वह हिंदू है, उसे बिना देरी गोलियों से छलनी कर दिया गया. वहीं जिसने खुद को मुसलमान बताया, उससे कलमा पढ़ने को कहा गया.
देखते ही देखते आतंकियों ने बैसरन घाटी में मौजूद 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक को अपनी गोलियों का शिकार बना डाला. इस हमले में कई पर्यटक ऐसे भी थे, जो आतंकियों की गोलियों की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले की खबर जैसे ही फैली, पूरा देश गुस्से के सैलाब में डूब गया. उस वक्त आम जनता से लेकर सरकार तक सभी के दिमाग में लगातार एक ही सवाल कौंध रहा था. सवाल था- आखिर इतनी बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम तक कैसे पहुंचाया गया.
एनआईए को कहां से मिला पहलगाम में आतंकी हमला करने वाले आतंकियों का सुराग?
पहलगाम आतंकी हमले की साजिश से जुड़े हर परत को खंगालने के लिए एनआईए ने उस इलाके को पूरी तरह से खंगाल डाला, जहां पर आतंकी हमला हुआ था. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि इस मामले में कुल 1100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई और कुल 1113 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इनमें 31 शॉल विक्रेता, 543 ढोक (झोपड़ियों) में रहने वाले लोग, 117 घोड़े वाले, 69 चरवाहे, 42 फोटोग्राफर, 54 ढाबा, भेलपूरी और चाय बेचने वाले, 36 टिकट काउंटर और जिपलाइन ऑपरेटर, 25 टैक्सी चालक, 19 दुकानदार थामिल थे. इसके अलावा, अन्य जिलों के 23 संदिग्ध और 54 अन्य लोग से भी पूछताछ की गई.
कौन था पहलमाग आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और किसकी मदद से आतंकियों ने साजिश को दिया अंजाम?
एनआईए की जांच में जो सबसे अहम बात सामने आई, वह यह थी कि यह हमला स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि सीमा पार से रची गई साजिश का हिस्सा था. इस साजिश के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए थे. एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा और द रसिस्टेंस फ्रंट ने मिलकर अंजाम दिया था. इस पूरे आतंकी हमले का मास्टरमाइंड सज्जाद सैफुल्लाह जट्ट था, जो पाकिस्तान में बैठकर आतंकियों को निर्देश दे रहा था. एनआईए के अनुसार, आतंकियों के बीच ‘अली भाई’ और ‘लंगड़ा’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला सज्जाद ने ही हमले की जगह तय की थी.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
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