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गले में तुलसी की माला, सिर पर लंबी चोटी, आईपीएल खेलने पहुंचा इंजीनियर, 15 साल का ‘वनवास’ खत्म

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गले में तुलसी की माला, सिर पर लंबी चोटी, IPL खेलने पहुंचा इंजीनियर

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Raghu Sharma came from doctor-engineer family: मुंबई इंडियंस के लेग स्पिनर गेंदबाज रघु शर्मा के लिए आईपीएल का पहला विकेट महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 15 साल के ‘वनवास’ का भावुक अंत है. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हाथ में होने के बावजूद, रघु ने क्रिकेट के जुनून को चुना. 102 किलो वजन और उम्र की चुनौतियों को पीछे छोड़, उन्होंने धोनी के 2011 विश्व कप वाले छक्के से प्रेरणा ली. आज, जब उन्होंने विकेट लिया और अपना मैसेज हवा में लहराया, तो साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे डिग्री और उम्र कोई मायने नहीं रखते.

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रघु शर्मा के परिवार में डॉक्टर और इंजीनियर की भरमार है.

नई दिल्ली. खेल के मैदान पर अक्सर हम विकेट गिरते देखते हैं और जश्न मनाते हैं, लेकिन कभी-कभी एक विकेट के पीछे की कहानी इतनी गहरी होती है कि वह केवल खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने का जज्बा बन जाती है. कुछ ऐसा ही नजारा मुंबई इंडियंस के गेंदबाज रघु शर्मा के साथ देखने को मिला.जब रघु ने लखनऊ सुपर जायंट्स के बल्लेबाज अक्षत रघुवंशी को आउट कर अपने आईपीएल करियर का पहला विकेट चटकाया, तो यह सिर्फ एक आउट करने की घटना नहीं थी, बल्कि यह 15 साल के एक लंबे, कठिन और भावनात्मक संघर्ष की जीत थी. विकेट लेते ही रघु शर्मा ने अपनी जेब से एक कागज का टुकड़ा निकाला और उसे लहराया. उस पर लिखा था: “राधे-राधे. 15 साल बहुत कष्टकारी थे, जो आज गुरुदेव की कृपा से समाप्त हो गए. धन्यवाद, मुंबई इंडियंस, मुझे यह अवसर देने के लिए. सदैव आभारी. जय श्री राम.’

रघु शर्मा (Raghu Sharma) ने मैच के बाद आईपीएलटी20 डॉट कॉम से बात करते हुए कहा, ‘यह मेरे लिए एक सपना सच होने जैसा है. सबसे पहले, मैं अपने गुरुदेव श्री श्याम दास जी और अपने माता-पिता को धन्यवाद देना चाहता हूं. रघु की आंखों में वह सुकून साफ झलक रहा था जो दशकों के कठिन परिश्रम के बाद आता है. रघु शर्मा का सफर सामान्य क्रिकेटरों जैसा नहीं रहा.वह एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां इंजीनियरिंग और डॉक्टर बनना सफलता की परिभाषा थी. खुद रघु एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, लेकिन उनका दिल क्रिकेट में धड़कता था. दिलचस्प बात यह है कि जब वे क्रिकेट में आने के बारे में सोच रहे थे, तब उनका वजन 102 किलो था.

रघु शर्मा के परिवार में डॉक्टर और इंजीनियर की भरमार है.

उनके पिता ने स्पष्ट रूप से कहा था, ‘क्रिकेट तुम्हारे लिए नहीं है, तुम दौड़ नहीं सकते.’ लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. 2011 विश्व कप फाइनल में एमएस धोनी द्वारा लगाए गए उस ऐतिहासिक छक्के ने रघु के भीतर एक आग जला दी. उस पल ने उन्हें दृढ़ संकल्प दिया कि अगर धोनी यह कर सकते हैं, तो वह भी कोशिश कर सकते हैं. हालांकि, उम्र उनके खिलाफ थी. जब उन्होंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया, तब वे 21 साल के थे. वह उम्र जब ज्यादातर क्रिकेटर अपने करियर की शुरुआत कर चुके होते हैं और आयु-वर्ग क्रिकेट का दौर खत्म हो चुका होता है.

रघु शर्मा के परिवार में डॉक्टर और इंजीनियर की भरमार है.

‘उम्र सिर्फ एक संख्या है’
21 साल की उम्र में शुरुआत करना और फिर एक सफल क्रिकेटर बनना यह आसान नहीं था. रघु ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, श्रीलंका में क्रिकेट खेला, इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेला और हर जगह से अनुभव बटोरा. रघु ने एक बहुत बड़ी सीख साझा की, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है ‘उम्र सिर्फ एक संख्या है. अगर आप खुद को तैयार कर रहे हैं, तो आपको मानसिक रूप से बहुत मजबूत और स्थिर होना होगा. कौशल जरूरी हैं, लेकिन परिपक्वता वह चीज है जो आपको इस प्लेटफॉर्म पर एक अच्छा गेंदबाज बनाती है.’

आस्था और मुंबई इंडियंस का विश्वास
रघु की यात्रा में आस्था का बड़ा हाथ रहा है. उन्होंने पुरी जाकर समुद्र तट पर ट्रेनिंग की और महाप्रसाद ग्रहण किया. वहां उन्हें एहसास हुआ कि भगवान की कृपा से सब कुछ संभव है. मुंबई इंडियंस ने पिछले साल उन्हें विघ्नेश पुथुर के चोटिल होने पर विकल्प के रूप में शामिल किया और इस साल उन्हें रिटेन किया. रघु इस फ्रेंचाइजी के प्रति बेहद कृतज्ञ हैं. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझ पर भरोसा किया, मुझे समर्थन दिया. अब मैं उन्हें विश्वास दिला रहा हूं कि मैं उनके लिए यह कर सकता हूं.’

वैष्णव परंपरा मानते हैं रघु शर्मा
रघु शर्मा का व्यक्तित्व केवल एक क्रिकेटर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा का भी प्रतिबिंब है.2014 में वृंदावन की यात्रा के बाद वैष्णव परंपरा को अपनाते हुए उन्होंने प्याज और लहसुन तक का त्याग कर दिया. यह अध्यात्म ही था जिसने उन्हें वह मानसिक मजबूती दी, जो उनके करियर के सबसे काले दौर में काम आई. पुडुचेरी से लौटने के बाद पंजाब में ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’की उलझन हो या रणजी ट्रॉफी के लिए यो-यो और 2 किलोमीटर रन टेस्ट में मिली असफलता, रघु ने हर बाधा का सामना धैर्य से किया. गले में तुलसी की माला और सिर पर लंबी चोटी रखने वाले रघु का जीवन यह साबित करता है कि उनका ‘करंट’ सिर्फ उनकी गेंदबाजी में नहीं, बल्कि उनकी अटूट आस्था और अनुशासन में भी बसा है.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें



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