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Lemon Fruit Growth Tips: भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पौधों पर भी तेजी से पड़ता है. खासकर मई की तेज धूप और गर्म हवाएं नींबू के पौधों को कमजोर कर देती हैं, जिससे फल झड़ने लगते हैं और पौधे सूखने तक लगते हैं. लेकिन अगर सही समय पर सही देखभाल की जाए, तो गर्मियों में भी नींबू के पौधों को हरा-भरा और फलों से लदा रखा जा सकता है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने ऐसे आसान और असरदार तरीके बताए हैं, जिनकी मदद से नींबू के पौधे न सिर्फ लू से बचेंगे, बल्कि बड़े और रसदार फल भी देंगे.
तेज धूप से मिट्टी के वाष्पीकरण को रोकने के लिए नींबू में मल्चिंग सबसे प्रभावी तरीका है. इसके लिए तने के चारों ओर सूखी घास, पत्तियां या पराली की 3-4 इंच मोटी परत बिछाएं. यह तकनीक मिट्टी के तापमान को नियंत्रित रखती है और जड़ों को सीधा लू के प्रभाव से बचाती है. इससे पानी की खपत कम होती है और सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं.

नींबू के आकार को बढ़ाने और उनमें रस भरने के लिए पोटेशियम जरूरी तत्व है. मई के महीने में पौधों को पोटेशियम युक्त जैविक खाद जैसे कि केले के छिलकों की खाद या ‘म्यूरेट ऑफ पोटाश’ की हल्की मात्रा दें. पोटेशियम फल के छिलके को लचीला बनाता है और कोशिका विभाजन में मदद करता है, जिससे फल बड़े और आकर्षक बनते हैं.

गर्मी में सिट्रस कैंकर और लीफ माइनर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इन पर नियंत्रण के लिए नीम के तेल का नियमित अंतराल पर छिड़काव करें. स्वस्थ पौधा ही रसीले फल देने में सक्षम होता है. ध्यान रहे कि छिड़काव हमेशा सूर्यास्त के बाद करें, ताकि तेज धूप और कीटनाशक के रसायनों के मिलन से पत्तियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
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सिर्फ मुख्य खाद ही काफी नहीं, नींबू को जिंक, मैग्नीशियम और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है. महीने में एक बार सीवीड एक्सट्रैक्ट यानि समुद्री शैवाल का अर्क या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालें. यह न केवल मिट्टी की संरचना सुधारती है बल्कि पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उन्हें गर्मी से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है.

भीषण गर्मी के दौरान पौधों की भारी प्रूनिंग यानी कटाई-छंटाई करने से बचें. पत्तियां पौधों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं और तने को सीधी धूप से बचाती हैं. अगर आप इस समय छंटाई करते हैं, तो कटे हुए हिस्सों से नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे पौधा सूख सकता है. केवल सूखी या रोगग्रस्त टहनियों को ही सावधानी से हटाएं.

फलों की गुणवत्ता और रसदार के लिए फास्फोरस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. रॉक फास्फेट या बोनमील का प्रयोग मिट्टी में करने से जड़ें मजबूत होती हैं और फलों के भीतर रस की थैलियों का विकास बेहतर होता है. जैविक खाद के साथ इसका मिश्रण देने से पौधा पोषक तत्वों को आसानी से ग्रहण कर पाता है और फल रसीले होते हैं.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि मई की तपती दोपहर पौधों की नमी सोख लेती है. इस समय नींबू के पौधों को ‘डीप वाटरिंग’ यानी गहरी सिंचाई की जरूरत होती है. सतही सिंचाई के बजाय पानी को जड़ों की गहराई तक जाने दें. ध्यान रखें कि मिट्टी पूरी तरह सूखने न पाए, मिट्टी में हल्की नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए ताकि पौधा तनाव में न आए और फल झड़ना बंद हो जाए.

नींबू के नाजुक फलों और नई कोपलों को सनबर्न से बचाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में छाया का प्रबंध करें. अगर संभव हो, तो छोटे पौधों के ऊपर एग्रो-नेट या ग्रीन नेट लगाएं. दोपहर की गर्म हवाओं के असर को कम करने के लिए शाम के समय पौधों की पत्तियों पर सादे पानी का छिड़काव करना काफी फायदेमंद साबित होता है.


