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Agriculture Tips: नीम की निंबोली और पत्तियों से तैयार देसी कीटनाशक दवा किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है. यह प्राकृतिक उपाय न केवल फसलों को कीटों से बचाता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखता है. इस देसी कीटनाशक को बनाने के लिए नीम की पत्तियों और निंबोली को पानी में भिगोकर या उबालकर घोल तैयार किया जाता है, जिसे छिड़काव के रूप में उपयोग किया जाता है. यह कीटों को दूर रखने के साथ-साथ फसलों की वृद्धि में भी मदद करता है.
भरतपुर जिले में एक किसान ने परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नीम के पेड़ और पत्तियों सहित निमोलियों से देसी कीटनाशक दवाई तैयार कर रहा है. जो फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है. खास बात यह है.कि यह कीटनाशक पूरी तरह से नीम की निंबोली और पत्तियों से बनाई जा रही है. जिससे किसानों को रासायनिक दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा.

गांव के इस जागरूक किसान ने बताया कि बाजार में मिलने वाली रासायनिक कीटनाशक दवाइयां जहां एक ओर महंगी होती हैं. वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाती हैं. इसके विपरीत नीम से तैयार यह देसी दवाई सस्ती होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. इस कीटनाशक को बनाने के लिए किसान नीम की निंबोली और पत्तियों को इकट्ठा कर उन्हें अच्छी तरह कूटता है.

सबसे बड़ी बात यह है कि इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है.और उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता स्थानीय किसानों में भी इस प्रयोग को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. कई किसान अब इस देसी तकनीक को अपनाने लगे हैं. जिससे उनकी लागत कम हो रही है और मुनाफा बढ़ रहा है. नीम आधारित कीटनाशक दवाइयां लंबे समय में खेती के लिए फायदेमंद होती हैं.
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इसके बाद इन्हें पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सड़ने के लिए रखा जाता है. जिससे इसमें प्राकृतिक रूप से कीटों को नष्ट करने वाले तत्व विकसित हो जाते हैं. तैयार घोल को छानकर फसलों पर छिड़काव किया जाता है. किसान का कहना है कि इस दवाई के इस्तेमाल से फसलों में लगने वाले कीट जैसे तेला, माहू और सफेद मक्खी पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है. साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है.

यह न केवल फसलों की सुरक्षा करती हैं. बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इस तरह भरतपुर का यह किसान न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन रहा है. जो प्राकृतिक खेती की दिशा में एक सकारात्मक कदम है. जो अब इस किसान के लिए रामबाण उपाय सवित हो रही है.





