Agriculture Tips: नीम की निंबोली से बनाएं देसी कीटनाशक! बिना केमिकल के फसलों को बचाने का रामबाण तरीका, जानें

Date:


होमफोटोकृषि

नीम की पत्तियों और निंबोली से तैयार ये देसी दवा किसानों के लिए वरदान

Last Updated:

Agriculture Tips: नीम की निंबोली और पत्तियों से तैयार देसी कीटनाशक दवा किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है. यह प्राकृतिक उपाय न केवल फसलों को कीटों से बचाता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखता है. इस देसी कीटनाशक को बनाने के लिए नीम की पत्तियों और निंबोली को पानी में भिगोकर या उबालकर घोल तैयार किया जाता है, जिसे छिड़काव के रूप में उपयोग किया जाता है. यह कीटों को दूर रखने के साथ-साथ फसलों की वृद्धि में भी मदद करता है.

भरतपुर जिले में एक किसान ने परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नीम के पेड़ और पत्तियों सहित निमोलियों से देसी कीटनाशक दवाई तैयार कर रहा है. जो फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है. खास बात यह है.कि यह कीटनाशक पूरी तरह से नीम की निंबोली और पत्तियों से बनाई जा रही है. जिससे किसानों को रासायनिक दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा.

news 18

गांव के इस जागरूक किसान ने बताया कि बाजार में मिलने वाली रासायनिक कीटनाशक दवाइयां जहां एक ओर महंगी होती हैं. वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाती हैं. इसके विपरीत नीम से तैयार यह देसी दवाई सस्ती होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. इस कीटनाशक को बनाने के लिए किसान नीम की निंबोली और पत्तियों को इकट्ठा कर उन्हें अच्छी तरह कूटता है.

news 18

सबसे बड़ी बात यह है कि इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है.और उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता स्थानीय किसानों में भी इस प्रयोग को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. कई किसान अब इस देसी तकनीक को अपनाने लगे हैं. जिससे उनकी लागत कम हो रही है और मुनाफा बढ़ रहा है. नीम आधारित कीटनाशक दवाइयां लंबे समय में खेती के लिए फायदेमंद होती हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

news 18

इसके बाद इन्हें पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सड़ने के लिए रखा जाता है. जिससे इसमें प्राकृतिक रूप से कीटों को नष्ट करने वाले तत्व विकसित हो जाते हैं. तैयार घोल को छानकर फसलों पर छिड़काव किया जाता है. किसान का कहना है कि इस दवाई के इस्तेमाल से फसलों में लगने वाले कीट जैसे तेला, माहू और सफेद मक्खी पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है. साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है.

news 18

यह न केवल फसलों की सुरक्षा करती हैं. बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इस तरह भरतपुर का यह किसान न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन रहा है. जो प्राकृतिक खेती की दिशा में एक सकारात्मक कदम है. जो अब इस किसान के लिए रामबाण उपाय सवित हो रही है.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

सावधान! 2060 तक 12 अरब होगी आबादी, धरती ने टेके घुटने, अब और इंसानी बोझ सहना मुमकिन नहीं

होमताजा खबरनॉलेजफॉसिल फ्यूल का नशा उतरेगा तो दाने-दाने...