हैदराबाद. दक्षिण भारतीय व्यंजनों में चटनी का एक खास स्थान है और अंबाडा चटनी, जिसे गोंगूरा पचड़ी के नाम से भी जाना जाता है, इसका बेहतरीन उदाहरण है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के घरों में यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि खानपान की परंपरा का अहम हिस्सा है. अपनी खास खट्टी और तीखी स्वाद के कारण यह चटनी अब उत्तर भारत में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है और लोगों की थाली में जगह बना रही है.
अंबाडा, जिसे हिंदी में पटुआ या गोंगूरा कहा जाता है, की पत्तियां प्राकृतिक रूप से खट्टी होती हैं. यह चटनी न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. इसमें आयरन, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि हैदराबादी खानपान में इसे विशेष महत्व दिया जाता है और शादियों व खास मौकों के मेन्यू में भी यह अक्सर शामिल रहती है.
अंबाडा बनाने के लिए इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूरत
इस चटनी को बनाने के लिए अंबाडा के पत्ते 250 ग्राम, सूखी लाल मिर्च 10-12, लहसुन की कलियां 8-10, जीरा 1 चम्मच, साबुत धनिया 1 चम्मच, मेथी दाना आधा चम्मच, नमक स्वादानुसार, तेल 2-3 बड़े चम्मच, तड़के के लिए राई, करी पत्ता और हींग की जरूरत पड़ेगी. सबसे पहले अंबाडा के पत्तों को अच्छी तरह धोकर सुखाया जाता है, ताकि उनमें नमी न रहे. इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर सूखी लाल मिर्च, साबुत धनिया, जीरा और मेथी दाना धीमी आंच पर भुने जाते हैं. अंत में लहसुन डालकर हल्की खुशबू आने तक पकाया जाता है और फिर इन्हें ठंडा होने के लिए अलग रख दिया जाता है.
घर पर ऐसे तैयार करें अंबाडा की चटनी
इसके बाद उसी कड़ाही में अंबाडा के पत्तों को डालकर धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है, जब तक वे नरम होकर पूरी तरह गल न जाएं. फिर भुने हुए मसालों को मिक्सी में दरदरा पीसा जाता है और उसमें पके हुए पत्ते व नमक मिलाकर दोबारा पीसा जाता है. पारंपरिक स्वाद बनाए रखने के लिए इसे पूरी तरह बारीक नहीं, बल्कि हल्का दरदरा ही रखा जाता है.
अंत में राई, सूखी लाल मिर्च, हींग और करी पत्ते का तड़का लगाकर चटनी में मिलाया जाता है. इसे गरमा-गरम चावल और घी के साथ खाना सबसे पसंदीदा तरीका माना जाता है. इसके अलावा इसे पराठे, डोसा या इडली के साथ भी परोसा जा सकता है. खास बात यह है कि इस चटनी को एक बार बनाकर फ्रिज में एक सप्ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे यह रोजमर्रा के खाने को भी खास बना देती है.





