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Ambedkar Jayanti 2026: मंगलवार को क्यों बंद रहेगा पूरा देश? 14 अप्रैल की छुट्टी का पूरा सच और अंबेडकर से जुड़ा वो अनसुना इतिहास

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मंगलवार को क्यों बंद पूरा देश? पूरा सच और अंबेडकर से जुड़ा वो अनसुना इतिहास

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Ambedkar Jayanti 2026: 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में छुट्टी रहेगी क्योंकि इस दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई जा रही है. केंद्र सरकार ने इसे गजेटेड हॉलिडे घोषित किया है. इसके चलते बैंक, स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे. यह दिन केवल अवकाश नहीं, बल्कि संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक अंबेडकर के संघर्ष, विचारों और योगदान को याद करने का अवसर है, जो आज भी समाज को दिशा देते हैं.

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जानिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर जयंती का इतिहास.

Ambedkar Jayanti 2026: 14 अप्रैल सिर्फ एक तारीख नहीं है यह भारत के इतिहास और सामाजिक चेतना का बेहद अहम दिन है. यह वो दिन है जब देशभर में स्कूल, कॉलेज, बैंक और सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं. लेकिन इसका कारण सिर्फ छुट्टी नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत की जयंती है जिसने भारत की आत्मा को नई दिशा दी. डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का नाम आते ही संविधान, समानता और न्याय की तस्वीर सामने आ जाती है. उन्होंने न सिर्फ एक दस्तावेज लिखा, बल्कि एक ऐसे भारत की नींव रखी जहां हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार मिले. आज जब समाज में बराबरी, आरक्षण और अधिकारों पर बहस जारी है, तब यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि क्या हम सच में उनके बताए रास्ते पर चल रहे हैं या सिर्फ छुट्टी तक सीमित रह गए हैं. यही वजह है कि 14 अप्रैल हमें आत्ममंथन का मौका भी देता है जहां हम अपने समाज की दिशा और सोच पर विचार कर सकते हैं.

2026 में 14 अप्रैल को मंगलवार के दिन पड़ रही यह छुट्टी इसलिए भी खास है क्योंकि इसे केंद्र सरकार ने गजेटेड हॉलिडे घोषित किया है. इसका मतलब है कि पूरे देश में अधिकतर सरकारी और कई निजी संस्थान बंद रहेंगे. लेकिन इस दिन की असली अहमियत छुट्टी से कहीं ज्यादा है. यह दिन हमें उस संघर्ष, शिक्षा और क्रांति की याद दिलाता है जिसने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल दी. अंबेडकर ने सिर्फ किताबें नहीं लिखीं, बल्कि एक ऐसा सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जिसने दबे-कुचले वर्गों को आवाज दी. यही वजह है कि इस दिन को समझना जरूरी है, न कि सिर्फ कैलेंडर में छुट्टी देखकर खुश हो जाना. यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा, अधिकार और सम्मान की लड़ाई अभी भी जारी है.

डॉ अंबेडकर से जुड़ा पूरा इतिहास

  • 14 अप्रैल 2026 को देशभर में छुट्टी इसलिए घोषित की गई है क्योंकि यह डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती है. केंद्र सरकार के DoPT (Department of Personnel and Training) के आदेश के अनुसार सभी केंद्रीय कार्यालय, सार्वजनिक उपक्रम और बैंक इस दिन बंद रहेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलिडे कैलेंडर में भी यह दिन शामिल है. इससे देशभर के अधिकांश बैंक बंद रहते हैं. यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय सम्मान है, जो उस व्यक्ति को दिया गया जिसने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत आधार दिया.
  • सिर्फ केंद्र ही नहीं बल्कि देश के ज्यादातर राज्य भी इस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करते हैं. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु और दिल्ली समेत लगभग सभी बड़े राज्यों में इस दिन कार्यक्रम, रैलियां और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं. खासकर महाराष्ट्र में यह दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, क्योंकि अंबेडकर का जीवन और कार्य इस राज्य से गहराई से जुड़ा रहा है. इस दिन लोग उनकी प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं, उनके विचारों पर चर्चा करते हैं और सामाजिक समानता का संदेश फैलाते हैं. यह दिन सिर्फ सरकारी छुट्टी नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और सम्मान का प्रतीक बन चुका है.

डॉ. अंबेडकर: संघर्ष से संविधान तक का सफर

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था. वे बचपन से ही सामाजिक भेदभाव का शिकार रहे. स्कूल में उन्हें अलग बैठना पड़ता था और पानी पीने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता था. लेकिन उन्होंने इन कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने यह साबित किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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