नई दिल्ली: जब देश की सीमाओं के भीतर विदेशी नागरिकों की गतिविधियां संदिग्ध नजर आने लगें, तो मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का बन जाता है. हाल ही में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने यही संकेत दिया है कि भारत अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान भी इस बात को और साफ करता है कि देश को ट्रांजिट रूट समझने वालों के लिए अब जगह नहीं है. अमित ने जो संदेश दिया है, वह केवल इस मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक चेतावनी है. भारत अब किसी भी संदिग्ध गतिविधि को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. अगर इरादा गलत है, तो अंजाम भी तय है कानूनी कार्रवाई और जेल.
जांच के अनुसार यह ग्रुप मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचने की योजना बना रहा था. (फोटो ANI/FB)
- जांच एजेंसियों का आरोप है कि ये सभी विदेशी नागरिक वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बाद में उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन किया. उन पर म्यांमार के विद्रोही गुटों से संपर्क करने, प्रशिक्षण लेने और देने, हथियार और ड्रोन सप्लाई से जुड़े होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इनके खिलाफ यूएपीए की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
- दरअसल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि ये लोग म्यांमार जाने के लिए भारत का इस्तेमाल ट्रांजिट पॉइंट के रूप में कर रहे थे. गृह मंत्री ने साफ किया कि इनसे भारत को कोई सीधा खतरा नहीं था, लेकिन उनकी गतिविधियां बेहद गंभीर थीं.
म्यांमार कनेक्शन, ट्रांजिट प्लान और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
जांच के अनुसार यह समूह मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचने की योजना बना रहा था, जहां विद्रोही गुटों के ठिकानों पर यूक्रेनी नागरिकों को आतंकी प्रशिक्षण दिया जाना था. हालांकि इन लोगों ने मिजोरम में प्रवेश के लिए जरूरी ‘एडवांस परमिट’ नहीं लिया था, इससे उनकी पहचान हो गई और सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पकड़ लिया.
इन विदेशी नागरिकों को कैसे पकड़ा गया?
इन लोगों को मिजोरम में प्रवेश के दौरान पकड़ा गया, जहां विदेशी नागरिकों के लिए एडवांस परमिट जरूरी होता है. परमिट न लेने की वजह से वे सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आए. इसके बाद NIA ने कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से इन्हें गिरफ्तार किया. जांच में उनके म्यांमार कनेक्शन का खुलासा हुआ.
क्या इनसे भारत को कोई खतरा था?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार इनसे भारत को तत्काल कोई खतरा नहीं था, क्योंकि उनका मुख्य लक्ष्य म्यांमार था. लेकिन भारत की जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए करना अपने आप में गंभीर खतरा माना जाता है, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी.
इन पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
इन पर आतंकी साजिश, अवैध रूप से संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश, विद्रोही गुटों से संपर्क, हथियार और ड्रोन सप्लाई जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. इसके अलावा, एके-47 जैसे हथियारों से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की भी बात सामने आई है.




