Bhabanipur Seat: 24.5% मुस्लिम तो 26.2% कायस्थ… भवानीपुर में BJP ने रचा चक्रव्यूह, तोड़ पाएंगी ममता दीदी?

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Bhabanipur Seat Chunav: पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर है. इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट ही सबसे हॉट सीट बन गई है. भाजपा ने ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि इस सीट पर खुद ममता बनर्जी बुरी तरह घिरती दिख रही हैं. हालांकि यह उनकी पारंपरिक सीट है और वह यहां से कई बार विधायक बनी हैं. लेकिन, इस बार के चुनाव में परिस्थितियां अलग है.

दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी मैदान में है. टीएमसी अपने संगठनात्मक ताकत और भावनात्मक जुड़ाव के सहारे इस गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है. भाजपा का फोकस सोशल गणित और प्रतीकात्मक मुद्दे हैं. यह मुकाबला 2021 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाता है, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी और अब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके गृह क्षेत्र नंदीग्राम में चुनाव लड़ा था. उस समय ममता हार गई थीं, हालांकि भाजपा को पूरे राज्य में शिकस्त का सामना करना पड़ा था. बाद में ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं. अब मैदान बदला है, नतीजा भी बदलेगा या नहीं, यह देखना बाकी है.

TMC की रणनीति- ‘घर की बेटी’ का भावनात्मक नारा

टीएमसी भवानीपुर में ‘घर की बेटी’ (घोरेर मेये) का भावनात्मक पिच चला रही है. पार्टी राज्य अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की अध्यक्षता में हुई रणनीति बैठक में काउंसलरों को निर्देश दिया गया कि वे स्लोगन को घर-घर पहुंचाएं. संदेश साफ है- भवानीपुर सिर्फ मुख्यमंत्री चुन नहीं रहा, बल्कि अपनी बेटी के साथ खड़ा हो रहा है. पार्टी ने आक्रामकता के बजाय भावनात्मक, जुड़ाव और विकास कार्यों पर फोकस करने का फैसला किया है. काउंसलरों को घर-घर जाकर पर्चे बांटने और ममता बनर्जी के विकास कार्यों को हाइलाइट करने को कहा गया है. पूरे क्षेत्र में फोटो कॉर्नर सेट किए गए हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के लाइफ-साइज कटआउट के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं.

वॉर्ड 73 के मुक्तदल मोड़ पर पहला ऐसा बूथ लगा है, जहां ममता रहती हैं. यहां का अपील है- ममता बनर्जी के साथ खड़े होइए, फोटो खींचिए, बंगाल के लिए बोलिए. एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि हम इस चुनाव को आक्रामकता से नहीं, बल्कि भावनात्मक, कनेक्ट और ममता जी के भवानीपुर में किए गए काम से लड़ रहे हैं.

बीजेपी की रणनीति- जातीय गणित और राम नवमी का प्रतीकवाद

भाजपा का मानना है कि जमीन बदली है. भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां बंगाली भद्रलोक, मारवाड़ी-गुजराती व्यापारी, सिख-जैन परिवार और अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है. लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं.

भाजपा ने महीनों से बूथ-बूथ और समुदाय-समुदाय स्तर पर मैपिंग की है. पार्टी के अनुसार यहां कायस्थ 26.2 प्रतिशत, मुस्लिम 24.5 प्रतिशत, पूर्वी भारतीय प्रवासी समुदाय 14.9 प्रतिशत, मारवाड़ी 10.4 प्रतिशत और ब्राह्मण 7.6 प्रतिशत हैं. भवानीपुर की लड़ाई एक नारे से नहीं लड़ी जा सकती. इसे बूथ दर बूथ और समुदाय दर समुदाय लड़ना होगा.

इसी रणनीति के तहत सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में भवानीपुर से गुजरने वाली राम नवमी शोभायात्रा में हिस्सा लिया, जो हाजरा क्रॉसिंग पर समाप्त हुई. यानी ठीक ममता बनर्जी के घर के पास. अधिकारी ने कहा कि राज्य अब राम राज्य चाहता है. लोग तुष्टिकरण की राजनीति से थक चुके हैं. वे अच्छे शासन चाहते हैं.

राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि भाजपा हिंदू वोटों को बंगाली और गैर-बंगाली समुदायों में काटते हुए एकजुट करने की कोशिश कर रही है और साथ ही ममता को अल्पसंख्यक राजनीति पर घेर रही है. राम नवमी और राम राज्य का मुद्दा बहुसंख्यक हिंदू आबादी वाले क्षेत्र में भावनात्मक और वैचारिक ध्रुवीकरण पैदा कर रहा है.

वोटर लिस्ट संशोधन का विवाद

चुनावी रोल की विशेष गहन समीक्षा ने मुकाबले में नया आयाम जोड़ दिया है. भवानीपुर से लगभग 47,000 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो 2021 के उपचुनाव में ममता की 58,832 वोटों की बढ़त से करीब 11,000 कम है. अन्य 14,000 नाम अभी जांच के अधीन हैं. जांच के अधीन नामों में 56 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं, जबकि समुदाय कुल मतदाताओं का सिर्फ 24 प्रतिशत है. भाजपा का मानना है कि अगर अल्पसंख्यक वोट थोड़ा भी कम हुआ और हिंदू वोट उसकी तरफ एकजुट हुए तो भवानीपुर कड़ी टक्कर दे सकता है.

टीएमसी इसे अल्पसंख्यक और पारंपरिक समर्थकों पर असर मान रही है. इसलिए फिरहाद हाकिम, सुब्रत बक्शी जैसे नेता व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं. अभिषेक बनर्जी ने ममता के लिए कम से कम 60,000 वोटों की बढ़त का लक्ष्य रखा है.

पिछले ट्रेंड और चुनौती

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने भवानीपुर में अपनी उपस्थिति दिखाई थी. 2014 में तो उसने ममता के अपने वॉर्ड 73 में भी जीत हासिल की थी. 2024 लोकसभा चुनाव में भवानीपुर सेगमेंट में टीएमसी की बढ़त महज 8,297 वोट रह गई, जबकि 2021 उपचुनाव में यह 58,832 थी. आठ वॉर्डों में से पांच में भाजपा आगे रही, टीएमसी सिर्फ तीन में. ये आंकड़े बताते हैं कि भवानीपुर अब अजेय नहीं रहा. टीएमसी के लिए यह याद दिलाता है कि ममता बनर्जी की सबसे सुरक्षित सीट को अब सबसे मजबूत बचाव की जरूरत है. 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर में 29 अप्रैल को मतदान होगा. यह मुकाबला न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का है, बल्कि टीएमसी की भावनात्मक राजनीति और बीजेपी की जातीय-सामाजिक इंजीनियरिंग के बीच विचारधारा की लड़ाई भी है.



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