संजीव शुक्ला

“पुरस्कारों का दुत्कारीकरण”

इधर हम भारतीयों में एक सकारात्मक बदलाव आया है, वह है पुरस्कारों का दिल खोलकर देना। अब वो दिन लद गए जब पुरस्कार...

“”पुलिया महात्म्य””

पुलिया, पुल का छोटा रूप है। यह पुल की विराटता-भयावहता के विपरीत सूक्ष्मता और कोमलता का प्रतीक है। जहाँ पुल सिर्फ बड़ी-बड़ी नदियों...

आखिर हम कितने लोकतांत्रिक हैं

हमारे देश में लोकतंत्र का इतिहास बहुत पुराना रहा है। लोकतांत्रिक इतिहास की यह अवधि लगभग 600 ईसा पूर्व तक जाती है। हमारे...

आजाद और क्रांति

असहयोग आंदोलन के दौरान जब सत्याग्रही के रूप में बालक आजाद पर मुकदमा चला तो उस मुकदमे में अदालत के द्वारा पूछे गये...

एक व्यंग्य “नासमझ मजदूर”

संजीव कुमार शुक्ला सरकार हमें घर की याद आ रही, अब हम घर जाना चाहते हैं। अब यहाँ रहा नहीं जाता !!  क्यों भाई ऐसा...

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