श्रिंय़ॉगी मिश्रा

जीवन-Jeevan

प्यारे जीवन वह ओह, प्रिय जीवन ओह,  मन को कुछ आश्वासन दो, प्राणों को कुछ अवलंबन दो,  प्रेम एक आंधी है, जो थपेड़े खिलाती है, यह झझोरती...

कविता-Kavita

मैं, जानती हूं मैं आक्रोश हूं, मानवीय भाव का अवतार हूं प्रेम हूं,मैं गाना हूं मैं, मानव में संवेदना ओं का संचार हूं मैं, भूत हूं...

हमारा स्कूल-Hamara School

शिक्षा जगत का वरदान, शिक्षा जगत का वरदान, हमें इस पर है अभिमान, बढ़ानी है हमें इसकी शान, बीता इसमें मेरा बचपन,सीखा इसमें मैंने अनुशासन, अपने स्कूल...

ज्ञान-Gyan

सीमा उसकी अनंत है, मूर्खता उसकी अनंत है, जो प्राप्त करता है उसको, वह धन्य समझा है खुद को,  यह जिसको ना मिल पाए, वह...

ना जाने क्यों-Na jane Kyun

न जाने क्यों मैं पैदा हुई, सब कुछ दे वे हंसते थे, मैं रोती थी ना जाने क्यों,कुछ पढ़ी हुई तो मैंने और संभाला, तू...

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