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Chanakya Niti: मार्च आती ही अप्रेजल का दौर शुरू हो जाता है, ज्यादातर कंपनियों में अप्रेजल फॉर्म भरे जा चुके हैं तो कुछ कंपनियों में अभी कार्यवाही शुरू हुई है. अप्रेजल के दौरान ऑफिस पॉलिटिक्स जोरों पर रहती है, ऐसे में आप इन सभी चीजों के दूर कैसे रहें, इस बात का खास ध्यान रखें. चाणक्य ने ऑफिस पॉलिटिक्स को लेकर एक नीति बनाई है, आइए जानते हैं इस बारे में…
Chanakya Niti For Office Politics: अप्रेजल सीजन चल रहा है और हर एम्प्लॉई की इच्छा होती है कि जो सालभर कड़ी मेहनत की है, उसका अच्छा फल मिले. लेकिन मैनेजर और साथ काम करने वालों के व्यवहार और पॉलिटिक्स की वजह से काम करने वालों को मनपसंद अप्रेजल नहीं मिल पाता. ऑफिस में सभी काम करने आते हैं लेकिन यहां काम करना ही काफी नहीं है बल्कि ऑफिस पॉलिटिक्स भी मायने रखती है. ये ऑफिस की नाकामी नहीं, बल्कि इंसानी फितरत का हिस्सा है. जहां भी महत्वाकांक्षा, असुरक्षा और कॉम्पिटिशन साथ होते हैं, वहां पावर गेम्स शुरू हो जाते हैं. सदियों पहले आचार्य चाणक्य ने भी राजदरबारों में यही पैटर्न देखे थे. माहौल अलग था, लेकिन साइकोलॉजी स्थिति वही है. चाणक्य ये नहीं सिखाते कि अप्रेजल के समय में ऐसे माहौल से कैसे भागें, बल्कि ये बताते हैं कि कैसे साफ दिमाग से इनसे गुजरें, जागरूक रहें लेकिन कड़वाहट ना पालें, रणनीतिक रहें लेकिन चालाकी से बचें. आइए जानते आचार्य चाणक्य ने अप्रेजल सीजन में ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहने की क्या सलाह दी है…

आचार्य चाणक्य कभी भी किसी व्यक्ति को अलग से नहीं देखते थे. ऑफिस में अप्रेजल सीजन में पॉलिटिक्स ज्यादातर पर्सनल नापसंदगी की वजह से नहीं होती. ये इंसेंटिव, विजिबिलिटी और कंट्रोल की लड़ाई है. जब आप चीजों को पर्सनली लेना छोड़कर स्ट्रक्चर को देखना शुरू करते हैं जैसे रिपोर्टिंग लाइन, इनफॉर्मल हायरार्की, डिसीजन मेकर्स तो चीजें साफ दिखने लगती हैं. चाणक्य की सलाह होगी कि इमोशनल रिएक्शन देने से पहले पावर का लेआउट समझें.

चाणक्य का एक बड़ा सिद्धांत था, बोलने में संयम. एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं आते और अप्रेजल के दौरान पॉलिटिकल माहौल में इनका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है. ऑफिस पॉलिटिक्स ओवरशेयरिंग पर चलती है, कभी-कभी की शिकायतें, इमोशनल वेंटिंग, फालतू की राय. चाणक्य मानते थे कि समझदारी से अपनाई गई चुप्पी, आपकी इज्जत और पोजिशन दोनों बचाती है. इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को अलग कर लें, अप्रेजल सीजन में ऐसा करने गलत होगा. इसका मतलब है ध्यान से सुनना, सोच-समझकर बोलना और दूसरों को खुद को बार-बार दोहराने देना.
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चाणक्य काबिलियत की बहुत इज्जत करते थे. उनके हिसाब से लगातार काम आना ही असली सुरक्षा है. पॉलिटिक्स शॉर्ट टर्म में रिजल्ट बदल सकती है, लेकिन लगातार वैल्यू देना लॉन्ग टर्म में स्थिरता लाता है. ऑफिस में लोग अक्सर ग्रुप्स में शामिल हो जाते हैं ताकि सुरक्षित महसूस कर सकें. ऐसा आप चाहें तो कर सकते हैं लेकिन यह सही नहीं है. अच्छा अप्रेजल तभी होगा, जब आपका काम बोलेगा. अपने काम पर पूरी तरह फोकस रखें और अधिकारियों को अपने काम के बारे में भी बताएं.

चाणक्य कहते हैं कि अप्रेजल के दौरान किसी भी तरह पॉलिटिक्स से दूर रहें और किसी का भी पक्ष लेने से बचें. अप्रेजल सीजन के दौरान अपने काम पर पूरी तरह फोकस रखें और न्यूट्रल रहें लेकिन पूरी तरह भोले भाले भी ना बने रहें. अपने आसपास की चीजों को जरूर देखें और किसी पर भी ज्यादा भरोसा ना करें. ज्यादा भोला बने रहने से चीजें आपके खिलाफ जा सकती हैं इसलिए अप्रेजल सीजन में अपने आसपास की चीजों को जरूर देखें.

चाणक्य के लिए इमेज कोई दिखावा नहीं थी, बल्कि असली करेंसी थी. एक बार खराब हुई तो दोबारा बनाना बेहद मुश्किल काम है. ऑफिस पॉलिटिक्स में अक्सर परफॉर्मेंस से पहले आपकी इमेज पर वार होता है. हल्की-फुल्की बातें, कानाफूसी और चुनिंदा कहानियां अच्छे काम करने वालों को भी कमजोर बना सकती हैं और अप्रेजल सीजन में ये सभी बातें सामने आती हैं. चाणक्य की सलाह है कंसिस्टेंट रहें, सब कुछ डॉक्युमेंट करें और प्रफेशनल रहें. ऐसे इमोशनल रिएक्शन से बचें, जिन्हें कोई गलत समझ सकता है. आपका व्यवहार इतना साफ हो कि किसी के पास कुछ कहने का मौका ही ना मिले.




