CJI Justice Surya Kant News: देश की अदालतों में लंबित मामलों को जजों के खाली पदों की समस्या किसी से छिपी नहीं है. आलम ये है कि लोगों की सुनवाई का बारी आते-आते और न्याय मिलते-मिलते देर हो चुकी होती है. साथ ही न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी की भी चर्चा का विषय रही है. लेकिन, सीजेआई सूर्यकांत ने इस दिशा में एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है.
सीजेआई ने देश के सभी 25 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को एक विस्तृत पत्र लिखा है. इस पत्र के माध्यम से उन्होंने हाईकोर्ट्स में जजों की जल्द नियुक्ति करने और बेंच में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने का सख्त निर्देश दिया है.
इंतजार न करे कॉलेजियम
सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह भेजे गए इस पत्र में सीजेआई ने लिखा है कि न्यायपालिका में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना समय की मांग है. उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से कहा है कि वे कॉलेजियम की सिफारिशें भेजने में बिल्कुल भी देरी न करें. साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी जज के रिटायर होने से पद खाली होने का इंतजार करने के बजाय, पद रिक्त होने से पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जानी चाहिए ताकि न्याय के काम में कोई रुकावट न आए.
महिला जजों की नियुक्ति अपवाद नहीं, नियम बने
सीजेआई सूर्यकांत पहले भी महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर चिंता जता चुके हैं. हाल ही में 8 मार्च को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने न्यायपालिका में बड़े संस्थागत सुधारों की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट कॉलेजियम को बार (Bar) की योग्य और मेधावी महिला सदस्यों को जज बनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. इसे एक अपवाद के तौर पर नहीं, बल्कि एक नियम के तौर पर देखा जाना चाहिए. सीजेआई ने हाईकोर्ट कॉलेजियम से उन महिला वकीलों के नामों पर भी विचार करने का अपील की, जो संबंधित राज्यों से हैं लेकिन वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं.
दिख रहा है बड़ा बदलाव
सीजेआई ने सकारात्मक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में कई महिलाएं विभिन्न हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वर्तमान में 18 महिला जज कार्यरत हैं. मद्रास और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी लगभग एक दर्जन महिला जज अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं.
इसके अलावा, जिला स्तर पर न्यायिक अधिकारियों के कुल कार्यरत पदों में से लगभग 36.3 प्रतिशत महिलाएं हैं. CJI ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, ‘यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह एक पीढ़ीगत बदलाव को दर्शाता है. जब निचले स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं आ रही हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब उच्च न्यायपालिका में भी उनकी शानदार उपस्थिति देखने को मिलेगी.’
क्या कहते हैं वर्तमान आंकड़े?
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा फरवरी में लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, स्थिति इस प्रकार है:
2014 के बाद से नियुक्तियां: हाईकोर्ट में 170 महिला जजों की नियुक्ति हुई है, जिनमें से 96 नियुक्तियां पिछले पांच वर्षों में की गई हैं. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में 6 महिला जज नियुक्त हुईं.
- वर्तमान स्थिति (6 फरवरी तक): देश के सभी हाईकोर्ट में कुल 116 महिला जज कार्यरत थीं.
- खाली पद: हाईकोर्ट में जजों के कुल स्वीकृत 1122 पदों में से 308 पद खाली पड़े थे. कार्यरत जजों की संख्या 814 थी.
- सुप्रीम कोर्ट: सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान में 33 जज हैं, जिनमें फिलहाल एक महिला जज शामिल हैं.




