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CJI Surya Kant News: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कवायद में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को ‘‘बंधक’’ बनाए जाने की घटना का बृहस्पतिवार को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया और ‘‘निष्क्रियता’’ को लेकर राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों से जवाब देने को कहा.
CJI सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर बंगाल सरकार को फटकार लगाई, घटना को सोचा-समझा कदम बताया
CJI Surya Kant News: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत के लिए बुधवार की रात भारी रात थी. उनकी रात नहीं कट रही थी. उन्हें दिल्ली से 1400 किलोमीटर दूर हुए एक बवाल की चिंता सताए जा रही थी. वह रात 2 बजे तक जगे रहे. पल-पल का अपडेट लेते रहे. कारण कि पश्चिम बंगाल के मालदा में एसआईआर प्रक्रिया की कवायद में लगे सात न्यायिक अधिकारियो्ं को बंधक बनाया गया था. जी हां, खुद CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में इस बात का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि मैं मालदा बवाल को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता…लेकिन हमें रात 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी. शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था.
रात 2 बजे तक नहीं सो पाए सीजेआई सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई ने मालदा घटना पर दुख जताते हुए बताया कि वह कैसे रात दो बजे तक अपडेट लेते रहे. उन्हें दिल्ली से करीब 1400 किलोमीटर दूर मालदा में बंधक बनाए गए सात न्यायिक अधिकारियों की चिंता सता रही थी. CJI सूर्यकांत ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता… लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी. शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था. बता दें कि इस पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. वहीं, वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अधिकांश अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है.
सीजेआई ने ममता सरकार को फटकारा
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और जारी चुनावी प्रक्रिया को रोकने के लिए एक सोची-समझी एवं निहित स्वार्थों से प्रेरित कदम प्रतीत होती है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था तंत्र ‘ध्वस्त’ हो गया है. उन्होंने इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मालदा जिले में तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने बंधक बना लिया था. उन्होंने कहा कि बुधवार देर रात तक उन्हें खुद स्थिति पर नजर रखनी पड़ी.
मालदा बवाल पर सीजेआई की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना के संबंध में मीडिया की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की खुलेआम की गई कोशिश है बल्कि इस न्यायालय के प्राधिकार को भी चुनौती देती है. पीठ ने कहा कि वह किसी को भी न्यायिक अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक हमला करने के लिए कानून अपने हाथ में लेने और हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगी. उसने निर्वाचन आयोग से कहा कि एसआईआर कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों, उनके परिवारों और अन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग की जाए.
क्या है मामला
न्यायालय ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा कर्तव्य का पालन नहीं किए जाने का भी मामला है और उन्हें अपनी निष्क्रियता का कारण बताना होगा. अधिकारियों ने बताया था कि एसआईआर प्रक्रिया में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों का मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के विरोध में मालदा जिले में कई घंटों तक घेराव किया गया. अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पहले न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की मांग की लेकिन अंदर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने पर उन्होंने बुधवार को अपराह्न चार बजे के आसपास प्रदर्शन शुरू किया और परिसर का घेराव किया. अधिकारियों ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान दो महिला न्यायिक अधिकारी भी कार्यालय के अंदर फंसी हुई थीं.
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