CJI Surya Kant News | Air India Plan crash | Supreme Court – Air India क्रैश रिपोर्ट पर याचिका खारिज की, सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका

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नई द‍िल्‍ली. एयर इंडिया विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में और अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (पीएलआई) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने न सिर्फ याचिका को खारिज कर दिया, बल्कि याचिकाकर्ता के ‘असली मकसद’ पर भी गंभीर सवाल उठाए.

मामले की सुनवाई एक बेंच कर रही थी, जिसमें सीजेआई जस्‍ट‍िस सूर्यकांत, जस्‍ट‍िस जॉयमाल बागची और जस्‍ट‍िस व‍िपुल एम पंचोली शामिल थे. सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा क‍ि आपका असली मकसद क्या है? जैसे कि हम आपका मकसद समझते ही न हों. यह टिप्पणी उस समय आई, जब याचिकाकर्ता ने पिछले साल अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ‘घटनाओं के पूरे क्रम’ की विस्तृत जानकारी शामिल करने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का तर्क था कि रिपोर्ट में तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट रूप से सामने नहीं लाया गया है और आम जनता के हित में इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

उच‍ित रास्‍ता RTI है न कि PIL
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और साफ कहा कि इस तरह की जानकारी प्राप्त करने के लिए उचित कानूनी रास्ता सूचना का अधिकार (RTI) है न कि PIL. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक हस्तक्षेप का यह मामला नहीं बनता.

हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार
दरअसल, याचिकाकर्ता ने पहले द‍िल्‍ली हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां 25 फरवरी को इस पीआईएल को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिका ‘पूरी तरह से गलत सोच पर आधारित’ है और इस तरह की जानकारी के लिए आरटीआई का सहारा लिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी रुख को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि जब कानून में पहले से एक स्पष्ट प्रक्रिया मौजूद है तो उसे दरकिनार कर PIL के जरिए राहत मांगना उचित नहीं है.

पीड़ित परिवारों ने भी ऐसी मांग नहीं की
सुनवाई के दौरान बेंच ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों ने इस हादसे में अपने परिजनों को खोया. उन्होंने भी इस तरह की मांग लेकर अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया. इसके उलट एक तीसरे पक्ष द्वारा इस तरह की याचिका दायर करना अदालत को संदिग्ध लगा. बेंच ने कहा क‍ि जिन लोगों की जान गई उनके परिवार वाले तो याचिकाएं दायर नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप कर रहे हैं. इस टिप्पणी से अदालत की नाराजगी साफ झलक रही थी.

पीआईएल को क‍िया खार‍िज
याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान यह भी अनुरोध किया कि यदि अदालत उसकी पीआईएल को स्वीकार नहीं करती तो इसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक र‍िपरजेनटेशन के रूप में माना जाए लेकिन कोर्ट ने इस मांग को भी खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि वह इस तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकती और याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्पों का ही सहारा लेना चाहिए.

क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 12 जून 2025 को हुए एक भीषण विमान हादसे से जुड़ा है. एयरइंड‍िया की फ्लाइट AI-171 जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. यह विमान बोइंग 787-8 था और हादसा सरदार वल्‍लभ पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ के तुरंत बाद हुआ.विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में जा गिरा जिसके बाद उसमें आग लग गई. इस भयावह हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई. यह हाल के वर्षों की सबसे घातक विमान दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही है.

याचिकाकर्ता की मांग क्या थी?
याचिकाकर्ता ने अपनी पीआईएल में विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो द्वारा तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट को ‘रीड डाउन’ करने और उसमें कुछ खास तकनीकी विवरण शामिल करने की मांग की थी.इनमें शामिल थे: इंजन के ‘फ्लेम आउट’ (अचानक बंद होने) का समय, ईंधन स्विच में बदलाव का क्रम यह बदलाव यांत्रिक था या मैनुअल. इसके अलावा, याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इन जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए ताकि आम लोग भी दुर्घटना के कारणों को समझ सकें.



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