मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज दिल्ली का बजट करने वाली हैं. सीएम रेखा गुप्ता का यह दूसरा बजट होगा, जिस पर सभी राजधानीवासियों की नजरें टिकी हैं. यह बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा, जिसमें सरकार की तरफ से महिलाओं, छात्रों और व्यापारियों के लिए कई बड़े ऐलान किए जाने की उम्मीद है. बजट से ठीक पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने दिल्ली की अर्थव्यवस्था की मजबूत तस्वीर सामने रखी है, जिससे सरकार को नए कल्याणकारी कदमों के लिए आधार मिला है.
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 13.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 9.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. यह आंकड़ा राजधानी की तेज आर्थिक रफ्तार का संकेत है. वहीं प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर लगभग 5.31 लाख रुपये रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब ढाई गुना अधिक है. हालांकि हाल के वर्षों में इसकी वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर रही है, लेकिन कुल मिलाकर दिल्ली की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है.
महिलाओं और बेटियों के लिए खास योजनाएं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस बार के बजट में महिलाओं और बेटियों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी. मुख्यमंत्री यह साफ कह चुकी हैं कि ‘लखपति बिटिया’ और ‘सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड’ जैसी योजनाओं के जरिये महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा. खासकर मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं.
दिल्ली में सर्विस सेक्टर का दबदबा
इस आर्थिक सर्वेक्षण से एक बात जो साफ निकलकर आई, वह है दिल्ली की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का दबदबा. सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में सर्विस सेक्टर का योगदान 86.32 प्रतिशत है. इसके मुकाबले उद्योग क्षेत्र का योगदान 12.88 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र का हिस्सा महज 0.80 प्रतिशत है. यही वजह है कि राजधानी की आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर निर्भर है.
वहीं दिल्ली विधानसभा में आर्थिक सर्वे पेश करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को एक विश्वस्तरीय, समावेशी और रहने योग्य शहर बनाना है. इसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. पिछले बजट में कुल 1 लाख करोड़ रुपये के आवंटन में से 59,300 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च किए गए थे. इसमें परिवहन क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई, जिसे करीब 20 प्रतिशत हिस्सा मिला. इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर भी बड़ा खर्च किया गया.
महंगाई और रोजगार पर भी नजर
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, महंगाई का असर भी दिल्ली में देखा गया है. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2024 के 132.5 से बढ़कर 2025 में 139.4 हो गया, जो 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. ऐसे में बजट में महंगाई से राहत और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उपायों की भी उम्मीद की जा रही है.
आर्थिक सर्वे में सामने आए मजबूत आंकड़ों के बाद अब सभी की नजर आज पेश होने वाले बजट पर है. उम्मीद की जा रही है कि यह बजट न सिर्फ विकास को गति देगा, बल्कि आम जनता और खासकर महिलाओं, छात्रों और व्यापारियों को राहत और नई सुविधाएं भी प्रदान करेगा.




