Dharohar: क्या आपने देखा है 30 किलो चांदी का रेलवे स्टेशन? निजाम युग से जुड़ा है इतिहास, यहां रखा है मॉडल

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क्या आपने देखा है 30 किलो चांदी का रेलवे स्टेशन? निजाम युग से जुड़ा है इतिहास

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Nizam Museum Silver Unique Railway Model: हैदराबाद का निजाम म्यूजियम एक बार फिर चर्चा में है, जहां रखे 30 किलो चांदी के अनोखे रेलवे मॉडल में शहर के शाही रेलवे की इतिहास की झलक दिखती है. इस मॉडल से पता चलता है कि काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन कभी निज़ाम परिवार की निजी संपत्ति था. 1916 में बना यह स्टेशन शाही परिवार के लिए आरक्षित था और यहां जरूरत पड़ने पर पूरी ट्रेन चलाई जाती थी. यह जानकारी हैदराबाद के गौरवशाली परिवहन इतिहास को दर्शाती है.

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Nizam Museum Silver Unique Railway Model: हैदराबाद अपने नवाबी ठाठ-बाठ और ऐतिहासिक विरासतों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने शहर के रेलवे इतिहास के उन पन्नों को फिर से खोल दिया है, जिनसे आज की पीढ़ी शायद अनजान है. हैदराबाद के प्रसिद्ध निज़ाम म्यूजियम में रखे चांदी के एक अनूठे रेलवे मॉडल के जरिए यह दिलचस्प जानकारी सामने आई है कि कभी यहां का काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन निज़ाम परिवार की निजी संपत्ति हुआ करता था.

संग्रहालय के गाइडों के अनुसार पुराने हैदराबाद में मुख्य रूप से तीन बड़े रेलवे स्टेशन थे नामपल्ली, सिकंदराबाद और काचीगुड़ा. जहां नामपल्ली और सिकंदराबाद स्टेशनों का निर्माण आम जनता की आवाजाही के लिए किया गया था, वहीं काचीगुड़ा स्टेशन की कहानी पूरी तरह अलग थी. 1916 में बनकर तैयार हुआ यह स्टेशन निज़ाम के शाही परिवार के लिए आरक्षित था.

निज़ाम सागर का फैमिली स्टेशन था कीचीगुड़ा

काचीगुड़ा स्टेशन को निज़ाम सागर का फैमिली स्टेशन कहा जाता था. इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यहां निज़ाम परिवार की सुविधा सर्वोपरि थी. बताया जाता है कि यदि शाही परिवार का कोई एक सदस्य भी यात्रा करना चाहता था तो उसके लिए पूरी ट्रेन का परिचालन किया जाता था. यह स्टेशन आधुनिक काल के प्राइवेट जेट की तरह उस दौर का प्राइवेट रेलवे स्टेशन था. इसकी वास्तुकला भी बेहद खूबसूरत है जिसमें गोथिक और इंडो-सारासेनिक शैली का मिश्रण देखने को मिलता है.

नामपल्ली स्टेशन की प्रतिकृति है 30 किलो चांदी का रेलवे मॉडल 

निज़ाम म्यूजियम में रखा 30 किलो चांदी का रेलवे मॉडल नामपल्ली स्टेशन की प्रतिकृति है, जो उस दौर की इंजीनियरिंग और कलात्मकता को दर्शाता है. इस मॉडल में रेलवे ट्रैक से लेकर बारीक नक्काशी तक सब कुछ चांदी से निर्मित है. यह इस बात का प्रमाण है कि निज़ाम प्रशासन रेलवे को कितनी अहमियत देता था.

आज काचीगुड़ा स्टेशन भारतीय रेलवे के व्यस्ततम और सबसे स्वच्छ स्टेशनों में से एक है, लेकिन इसकी दीवारों में आज भी वह शाही इतिहास कैद है जब यहां की पटरियों पर सिर्फ निज़ाम की मर्जी चलती थी. यह जानकारी न केवल पर्यटकों को आकर्षित करती है, बल्कि हैदराबाद के गौरवशाली परिवहन इतिहास को भी जीवंत करती है.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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