DMA president Dr Neelam Lekhi: कौन हैं डॉ.नीलम लेखी? 63 साल बाद कोई महिला दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की संभालेंगी कमान

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First DMA president Dr. Neelam Lekhi: दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की जिम्मेदारी पहली बार एक महिला के कंधों पर होगी. दिल्ली की रहने वाली डॉक्टर नीलम लेखी 63 साल बाद इस संस्था की पहली महिला अध्यक्ष बनी हैं. सबसे खास बात है कि 112 साल से भी ज्यादा पुराने इतिहास वाली यह डीएमए सबसे पुराने मेडिकल एसोसिएशनों में से एक है लेकिन 63 सालों में कोई भी महिला इसके अध्यक्ष पद तक नहीं पहुंच पाई थीं. जबकि अन्य पदों पर खुद नीलम लेखी भी काम कर चुकी हैं.

पेशे से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नीलम ने 31 मार्च 2026 को दरियागंज स्थित DMA हाउस में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक के दौरान यह पदभार संभाला है. इससे पहले एसोसिएशन में राज्य स्तर पर उपाध्यक्ष के रूप में और IMA की पूर्वी दिल्ली शाखा की पहली महिला अध्यक्ष के रूप में भी सेवा दे चुकी हैं.

इनकी टीम में डॉ. विपेंद्र सभरवाल, डॉ. रामिंदर पोपली वित्त सचिव, डॉ. एसके पोद्दार प्रेसिडेंट-इलेक्ट, और डॉ. जेआर चुघ व डॉ. पूनम गोयल उपाध्यक्ष के रूप में काम करेंगी.

इस उपलब्धि पर News18hindi से बातचीत करते हुए डॉ. नीलम ने कहा कि डीएमए की अध्यक्ष बनना खुशी की बात है लेकिन उससे भी ज्यादा जिम्मेदारी का अहसास हो रहा है. इस पद पर रहते हुए वे दिल्ली के डॉक्टरों के अलावा आम लोगों के लिए सस्ते और तत्काल उपलब्ध इलाज को और बेहतर करने के लिए दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी.

उन्होंने बताया,’ कुछ प्रमुख मुद्दे जो लंबे समय से बिना सुलझे पड़े हैं, उनका निपटारा जल्द से जल्द करने के लिए काम किया जाएगा. इनमें प्रमुख रूप से डॉक्टरों पर होने वाले पेशेंट या उनके परिजनों के जानलेवा हमले से सुरक्षा के लिए पहले से मौजूद कानून को सख्ती से लागू करना, छोटे-छोटे इलाकों में खुले हुए छोटे क्लिनिकों और नर्सिंग होमों का नियमानुसार पंजीकरण कराना, फायर NOC, पीसी-PNDT अधिनियम से संबंधित समस्याएं, रेजिडेंट और सर्विस डॉक्टरों की समस्याएं शामिल होंगी.’

सबसे पहले क्या करेंगी?
दिल्ली में आबादी बहुत ज्यादा है. उन्हें सस्ता इलाज मिलना चाहिए. इसके लिए गली-मोहल्लों में खुले क्लिनिकों का पंजीकरण कराया जाएगा, क्योंकि अगर कोई समस्या होती है तो सबसे पहले व्यक्ति मेडिकल हेल्प के लिए इन्हीं नजदीकी केंद्रों में जाता है, कॉरपोरेट अस्पतालों के एवज में ये काफी सस्ते भी होते हैं लेकिन कई बार पंजीकरण न होने की वजह से फेल हो जाते हैं. इसके साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी.

डॉक्टरों की कौन सी समस्या का करेंगी निपटारा?
दिल्ली में डॉक्टरों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है. आए दिन डॉक्टरों पर होते जानलेवा हमलों को रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन करवाने पर जोर होगा, क्योंकि दिल्ली में कानून है लेकिन वह पूरी तरह फंक्शनल नहीं है.

क्या बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर भी काम होगा?
हां’एनीमिया मुक्त भारत’, स्तन और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता और रोकथाम, स्वास्थ्य पेशेवरों और आम लोगों के लिए CPR प्रशिक्षण, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे मोटापा, मधुमेह, गठिया आदि) के प्रति जागरूकता फैलाना भी अहम कामों में शामिल है.



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