el nino after hormuz strait: होर्मुज संकट टला मगर भारत पर मंडरा रही नई मुसीबत, 40 करोड़ लोगों पर खतरा

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El Nino effect on Monsoon 2026: दुनिया से होर्मुज का संकट अब टल गया है. ईरान-अमेरिका सीजफायर के ऐलान से पूरे विश्व को तेल-गैस में राहत मिलने की उम्मीद है. इस घटना से भारत की एक मुसीबत भले ही खत्म होने वाली हो लेकिन एक और नई आफत ने जन्म ले लिया है जो और भी ज्यादा भयावह हो सकती है. इससे भारत के करीब 40 करोड़ लोगों पर खतरा मंडरा रहा है जो खेती करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक इस बार देश में मॉनसून के मौसम में बारिश में कमी आ सकती है और कई इलाकों में सूखा पड़ने के आसार हैं.

मॉनसून आने से पहले ही इस बार बरसात भिगा रही है. मार्च से लेकर अप्रैल तक मौसम में ठंडक बरकरार है, लेकिन जब मॉनसून का असली समय आएगा तब बारिश की कमी से खेल बिगड़ सकता है. एक निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है. स्काईमेट वेदर ने मंगलवार को मॉनसून 2026 के लिए चेतावनी भरा पूर्वानुमान जारी किया है.

इस साल देश में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का महज 94 फीसदी रहने की संभावना है, जिसमें 5 फीसदी कम या ज्यादा हो सकती है. यानी जून से सितंबर तक 868.6 मिलीमीटर के औसत के मुकाबले करीब 816 मिलीमीटर बारिश हो सकती है. इससे देश के कई इलाकों में सूखे का खतरा मंडराने लगा है और देश की कृषि-अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ने वाला है.

स्काईमेट ने 40 फीसदी संभावना जताई है कि बारिश 90-95 फीसदी LPA के बीच रहेगी. वहीं इससे भी खतरनाक ये है कि 30 प्रतिशत संभावना इस बात की भी हो सकती है कि बारिश 90% से भी कम हो जाए और सूखे जैसी स्थिति बन जाए. इस अनुमान में सामान्य बारिश की संभावना सिर्फ 20 प्रतिशत है, जबकि ऊपर-औसत या अतिवृष्टि की संभावना लगभग शून्य है.

अल-नीनो बन सकता है सबसे बड़ा खतरा
इस पूर्वानुमान का सबसे बड़ा कारण अल-नीनो की वापसी है. डेढ़ साल तक अल नीना के प्रभाव के बाद प्रशांत महासागर अब ENSO-न्यूट्रल स्थिति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जल्द ही एल नीनो सक्रिय होने वाला है. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर में स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह ने कहा, ‘इक्वेटोरियल प्रशांत महासागर में ओशन-एटमॉस्फियर कुपलिंग पहले से मजबूत हो चुका है. अल-नीनो मॉनसून के शुरुआती चरण में आएगा और फॉल तक और ताकतवर होता जाएगा. इससे मॉनसून कमजोर पड़ सकता है. खासकर सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश अनियमित और अनिश्चित रहेगी.’

क्या कह रहा भारतीय मौसम विभाग
भारतीय मौसम विभाग (IMD) की भी यही राय है. अप्रैल की शुरुआत में IMD ने बताया था कि अभी ENSO-न्यूट्रल हालात हैं, लेकिन जून के बाद अल नीनो की संभावना बढ़ रही है. IMD का पहला आधिकारिक पूर्वानुमान 15 अप्रैल से पहले आ सकता है.

स्काईमेट के मुताबिक, भारतीय महासागरीय द्विध्रुव (IOD) इस बार न्यूट्रल या थोड़ा पॉजिटिव रह सकता है, जो शुरुआती बारिश को कुछ हद तक सहारा देगा. जून में बारिश 101 परसेंट LPA रहने की उम्मीद है. लेकिन जुलाई (95%), अगस्त (92%) और सितंबर (89%) में यह लगातार कम होती जाएगी. जून के बाद एल नीनो तेजी से मजबूत होगा.

किन राज्यों में बेहतर होगी बारिश
इस बार बारिश का वितरण भी असमान रहने वाला है. पूर्वी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ज्यादा बारिश हो सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में घाटा रहेगा. इससे धान समेत अन्य मॉनसून फसलों पर असर पड़ेगा.

इस बार मॉनसून की ये हो सकती हैं खास बातें

  1. . इस बार बारिश का कुल अनुमान काफी कम है. संभावना जताई जा रही है कि देश में 90 फीसदी से कम बारिश हो सकती है. ऐसे में सूखे की संभावना 30 फीसदी तक मजबूत हो सकती है.
  2. .अल-नीनो के असर के चलते जून और जुलाई में बारिश ठीक होगी और 95 फीसदी से ऊपर रह सकती है लेकिन अगस्त और सितंबर में बारिश कम होने की संभावना है. महीना वार देखें तो जून 101%, जुलाई 95%, अगस्त 92%, सितंबर 89% बारिश का अनुमान रह सकता है.
  3. . इस बार पूर्वी राज्य (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा) में बेहतर रहने की संभावना है जबकि उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत में बारिश कम रह सकती है. इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है क्योंकि 51 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है.
  4. मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. कृषि मंत्रालय के अनुसार देश के 51% खेती-क्षेत्र और 40% उत्पादन बारिश पर निर्भर है. 47% आबादी की आजीविका कृषि से जुड़ी है. कम बारिश से ग्रामीण मांग घटेगी, खाद्य-पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी. इस साल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है.

स्काईमेट ने जनवरी 2026 में ही इस खतरे का संकेत दे दिया था. 2023 में उसका 94% का पूर्वानुमान बिल्कुल सही साबित हुआ था, लेकिन 2024-25 में उसने थोड़ा कम आंकलन किया था.

कुल मिलाकर, इस बार मॉनसून की शुरुआत ठीक रह सकती है, लेकिन आखिरी दो महीनों में एल नीनो का प्रकोप बढ़ने की आशंका है. किसानों, नीति-निर्माताओं और आम लोगों के लिए यह चेतावनी का समय है.



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