आयुर्वेद के मतानुसार Amla थोड़े खट्टे, कसैले, मीठे, ठंडे, हल्के, त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) का नाश करने वाले,
रक्तशुद्धि करने वाले, रुचिकर, मूत्रल, पौष्टिक वीर्यवर्धक, केशवर्धक, टूटी अस्थि जोड़ने में सहायक, कांतिवर्धक, नेत्रज्योतिवर्धक, गर्मीनाशक एवं दांतो को मजबूती प्रदान करने वाले होते हैं।
Amla के सेवन से आयु, स्मृति, कांति एवं बल बढ़ता है, हृदय एवं मस्तिष्क को शक्ति मिलती है,
आंखों का तेज बढ़ता है और बालों की जड़ें मजबूत होकर बाल काले होते हैं।
औषधि प्रयोग :
१. श्वेत प्रदर : 3 से 5 ग्राम चूर्ण को मिश्री के साथ प्रतिदिन दो बार लेने से अथवा इस चूर्ण को शहद के साथ चाटने से श्वेत प्रदर ठीक होता है।
२. रक्त प्रदर : Amla तथा मिश्री का संभाग चूर्ण 4 भाग लेकर उसमें दो भाग हल्दी का चूर्ण मिलाकर 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से रक्त प्रदर में अति शीघ्र आराम मिलता है।
३. सिरदर्द : Amla के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को घी एवं मिश्री के साथ लेने से पेट तथा वायु दोष से उत्पन्न सिर दर्द में राहत मिलती है।
४. शुक्रमेह, धातु क्षय : Amla के रस में ताजी हल्दी का रस अथवा हल्दी का पाउडर व शहद मिलाकर सुबह-शाम किए
अथवा आंवले एवं हल्दी का संभाग चूरु रोज सुबह-शाम शहद अथवा पानी के साथ ले। इससे प्रमेह मिटता है। पेशाब के साथ धातु जाना बंद होता है।
५. वीर्यवृद्धि : आंवले के रस में घी तथा मिश्री डालकर रोज पीने से वीर्यवृद्धि होती है।
६. कब्जियत : गर्मी के कारण हुई कब्जियत में आंवले का चूर्ण घी एवं मिश्री के साथ चाटे अथवा त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला संभाग) चूर्ण आधा से एक चम्मच रोज रात्रि को पानी के साथ ले।
इससे कब्जियत दूर होती है।
७. अत्यधिक पसीना आना: हाथ पैरों में अत्यधिक पसीना आता हो तो प्रतिदिन आंवले के 20 से 30 मि.ली. रस में मिश्री डालकर पिए।
८. दांतों की मजबूती: Amla के चूर्ण को पानी में उबालकर उस पानी के कुल्ला करने से दांत मजबूत एवं स्वच्छ होते हैं।
आगरा एक उत्तम औषधि है। जब ताजे आंवले मिलते हैं, तब इनका सेवन सबके लिए लाभप्रद है।
ताजे आंवले का सेवन हमें कई रोगों से बचाता है।
Amla का चूर्ण, मुरब्बा तथा चवनप्राश वर्ष भर उपयोग किया जा सकता है।
जो मनुष्य प्रतिदिन आंवले से स्नान करता है उसके बाल जल्दी सफेद नहीं होते।
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