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Hormuz Blockade Update | Explainer: पहले से ही बंद है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, फिर उसकी नाकेबंदी पर क्यों तुले हैं डोनाल्ड ट्रंप, भारत पर क्या होगा असर?

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Hormuz News: ईरान-अमेरिका के बीच हाल ही में पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही है और इसके बाद एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हो रही है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. हालात ऐसे बन गए हैं कि यह समुद्री रास्ता पूरी तरह से खुला भी नहीं है और पूरी तरह बंद भी नहीं कहा जा सकता. ईरान ने अपनी रणनीति के तहत इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त नियंत्रण बना रखा है, जबकि अमेरिका अब खुले तौर पर नाकेबंदी की बात कर रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह रास्ता पहले से ही सीमित रूप से काम कर रहा है, तो फिर इसे पूरी तरह ब्लॉक करने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है. और इसे पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया तो भारत पर इसका क्या असर होगा.

दरअसल इस पूरे मामले में राजनीति, रणनीति और अर्थव्यवस्था तीनों एक साथ जुड़ी हुई हैं. एक तरफ ईरान अपने आर्थिक हितों को बचाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है तो दूसरी तरफ अमेरिका उस पर दबाव बनाने के लिए इसी रास्ते को हथियार बनाना चाहता है. यह स्थिति एक तरह से ‘तेल की जंग’ जैसी बनती जा रही है, जहां हर फैसला सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह संकट और भी गंभीर हो सकता है. ऐसे में समझना जरूरी है कि आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर यह टकराव क्यों बढ़ रहा है और इसके पीछे की असली रणनीति क्या है. बता दें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख नाहयान के साथ एक अहम मुलाकात की. भारत अब क्रूड ऑयल के मामले में अलग रणनीति अपना रहा है. भारत ने क्रूड ऑयल बास्केट के फॉर्मूले में बदलाव किया है. भारत अब ओमान और दुबई ग्रेड की जगह अन्य देशों से खरीदने के फॉर्मूले को अपनाने वाला है.

ट्रंप की नई धमकी

बहरहाल इसी रणनीतिक टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान हालात को और ज्यादा गंभीर बनाता दिख रहा है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिकी नौसेना तुरंत प्रभाव से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आने-जाने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी की प्रक्रिया शुरू करेगी. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिका इस मार्ग को पूरी तरह नियंत्रित करेगा और स्थिति ऐसी बनाई जाएगी जहां सभी जहाजों को आने-जाने की अनुमति हो, लेकिन उनका आरोप है कि ईरान ऐसा नहीं होने दे रहा. ट्रंप का यह रुख साफ संकेत देता है कि अमेरिका अब इस समुद्री मार्ग को सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के मूड में है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है. (फाइल फोटो Reuters)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से दुनिया के कुल तेल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. अगर इस रास्ते में कोई भी गड़बड़ी होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है. यही वजह है कि यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन जाता है.

क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद है?

तकनीकी रूप से देखा जाए तो यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन ईरान ने इसे अपने नियंत्रण में ले रखा है. वह चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और इसके बदले भारी शुल्क वसूल रहा है, जो प्रति जहाज लाखों डॉलर तक हो सकता है. खास बात यह है कि ईरान अपने तेल टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था चलती रहे. यानी यह एक तरह की ‘आंशिक नाकेबंदी’ है, जिसमें नियंत्रण ईरान के हाथ में है.

डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी क्यों करना चाहते हैं?

डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति का मकसद ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करना है. अगर अमेरिका इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक करता है, तो ईरान का तेल निर्यात रुक जाएगा, जिससे उसकी आय पर बड़ा असर पड़ेगा. इससे ईरान की सरकार और उसकी सैन्य गतिविधियों को फंडिंग मिलना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि, यह कदम जोखिम भरा है क्योंकि इससे वैश्विक तेल सप्लाई भी प्रभावित होगी और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं.

अगर नाकेबंदी होती है तो दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. तेल की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं, इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाएंगे. इसका असर ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा. कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक अस्थिरता का खतरा पैदा हो सकता है.

भारत पर इसका क्या असर होगा?

भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. अगर होर्मुज मार्ग प्रभावित होता है, तो भारत के लिए तेल आयात महंगा हो जाएगा. इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं और महंगाई पर दबाव आएगा. साथ ही, रुपए पर भी असर पड़ सकता है और व्यापार घाटा बढ़ सकता है. यानी यह संकट सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है. हालांकि भारत अब कच्चे तेल की खरीद में नई रणनीति अपना रहा है. देश ने अपने क्रूड ऑयल बास्केट के फॉर्मूले में बदलाव किया है. अब ओमान और दुबई ग्रेड पर निर्भर रहने के बजाय, भारत अन्य देशों से तेल खरीदने के विकल्प को बढ़ाने की तैयारी में है.

ईरान इस स्थिति में क्या चाहता है?

ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए और उसके आर्थिक अधिकारों को मान्यता दे. वह इस मार्ग का इस्तेमाल एक ‘प्रेशर टूल’ के रूप में कर रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासकर अमेरिका पर दबाव बनाया जा सके. ईरान का मानना है कि अगर उसके हितों को नजरअंदाज किया गया तो वह इस मार्ग को पूरी तरह बंद भी कर सकता है.

क्या युद्ध की संभावना बढ़ रही है?

तनाव जिस तरह बढ़ रहा है, उससे यह आशंका जरूर है कि हालात और बिगड़ सकते हैं. अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं और नाकेबंदी जैसी कार्रवाई होती है तो टकराव बढ़ सकता है और फिर से मिडिल ईस्ट में जंग भड़क सकती है.

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं. अगर बातचीत का रास्ता निकलता है, तो हालात सामान्य हो सकते हैं. लेकिन अगर तनाव बढ़ता है और नाकेबंदी लागू होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और हर देश इस पर नजर बनाए हुए है.



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