IIT की परीक्षा में फेल, 1 करोड़ का कर्ज और 90 दिनों की डेडलाइन, फिर अभिजय अरोड़ा को कैसे मिली गूगल में नौकरी?

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नई दिल्ली (Abhijay Arora Success Story). कहा जाता है कि असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है. लेकिन जब साल 2012 के जेईई रिजल्ट में नाम के आगे ‘Fail’ लिखा आया तो अभिजय अरोड़ा को वह सीढ़ी नहीं, बल्कि गहरा गड्ढा महसूस हुआ, मानो उनकी दुनिया ही खत्म हो गई हो. जिस मां ने सुबह 4 बजे उठकर चाय बनाई, जिसके त्याग ने उन्हें यहां तक पहुंचाया, उसे ‘फेल’ शब्द दिखाना किसी सदमे से कम नहीं था. लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई. यह तो बस उस शुरुआत का आगाज था, जहां एक लड़का 1 करोड़ का कर्ज लेकर हार्वर्ड जाता है और फिर पूरी दुनिया के सामने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाता है.

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे (Humans of Bombay) के साथ शेयर की गई इस इमोशनल पोस्ट में अभिजय अरोड़ा ने अपनी सक्सेस स्टोरी बताई है. उन्होंने वह सफर बयां किया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. आज वे यूट्यूब (YouTube) में प्रोडक्ट मैनेजर जैसे सीनियर पद पर हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने न केवल रिजेक्शन्स का पहाड़ झेला, बल्कि उस ‘आईआईटी टैग’ की मानसिकता को भी तोड़ा जिसे सफलता के लिए अनिवार्य माना जाता है. उनकी कहानी उन दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने उन्हें तब भी नहीं छोड़ा जब पूरी दुनिया उन पर हंस रही थी.

जेईई में फेल होने का काला दिन

अभिजय अरोड़ा बताते हैं कि साल 2012 में जब उन्होंने अपने नाम के आगे ‘Failed’ लिखा देखा तो उन्हें लगा कि उन्होंने अपनी मां के हर बलिदान को धोखा दे दिया है. उनकी मां ने 1997 से अकेले ही अपने दोनों बच्चों को पाला था. सरकारी नौकरी के कारण हर दो साल में शहर बदलना पड़ता था, लेकिन मां ने अभिजय अरोड़ा की पढ़ाई के लिए सुबह 4 बजे उठकर चाय बनाने से लेकर हर छोटे-बड़े टेस्ट में उनका साथ देने तक कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

आईआईटी नहीं मिला तो बदला रास्ता

हार मान लेना अभिजय अरोड़ा के स्वभाव में नहीं था. उन्होंने खुद को संभाला और IIIT बैंगलोर का रुख किया. वहां उन्होंने एक हैकाथॉन (Hackathon) जीता और उसके दम पर मलेशिया में बेहतरीन नौकरी हासिल की. लेकिन उनके दिल में एक कसक अब भी बाकी थी- गूगल में काम करने का सपना. लोग कहते थे कि बिना ‘IIT टैग’ के हार्वर्ड (Harvard) या गूगल जाना नामुमकिन है, लेकिन अभिजय अरोड़ा ने 1 करोड़ का लोन लेकर हार्वर्ड के लिए उड़ान भरी.

जब पत्नी बनीं दूसरा सबसे बड़ा सहारा

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद अभिजय अरोड़ा के जीवन की असल चुनौती शुरू हुई. मार्केट काफी खराब था और उनके पास सिर्फ 90 दिन थे- या तो नौकरी ढूंढो या देश छोड़ो. हफ्ते में 100-100 नौकरियों के लिए अप्लाई करने के बाद भी सिर्फ रिजेक्शन ही हाथ लग रहे थे. इस मुश्किल दौर में उनकी पत्नी ने घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली. अभिजय कहते हैं- उन्होंने मुझसे तब शादी की जब मैं बेरोजगार था और मेरे ऊपर कर्जों का पहाड़ था.

AI टूल ने बदली किस्मत और मिली गूगल में नौकरी

पारंपरिक तरीकों से नतीजे न मिलते देख अभिजय अरोड़ा ने अपने हुनर का इस्तेमाल किया. उन्होंने खुद का एक एआई-बेस्ड टूल बनाया. इससे उन्होंने अपने रिज्यूमे में जरूरी सुधार किए. इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस एआई टूल से जुड़ा कॉन्टेंट बनाना शुरू किया. उनके वीडियो और स्किल्स ने गूगल की टीम का ध्यान खींचा और आखिरकार उन्हें यूट्यूब में प्रोडक्ट मैनेजर की नौकरी मिल गई. यह उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था और सालों की मेहनत का सुखद फल.

मां के आंसू और अधूरी ख्वाहिशें

हाल ही में जब अभिजय अरोड़ा अपनी मां को गूगल के ऑफिस ले गए और उन्हें अपनी डेस्क दिखाई तो मां की आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने धीमी आवाज में कहा- Proud of you, beta. अभिजय अरोड़ा के लिए वो पल उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थे. आज वे न केवल यूट्यूब में एक बड़े पद पर हैं, बल्कि 6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ इंफ्लुएंसर और पॉडकास्टर भी बन चुके हैं.



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