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India Germany Submarine Deal: भारत और जर्मनी के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता होने जा रहा है. अगले 6 से 8 हफ्तों के अंदर भारतीय नौसेना के लिए 6 आधुनिक पनडुब्बियों की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट साइन हो सकता है. जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने इस बात के संकेत दिए हैं. यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ के तहत मुंबई के मझगांव डॉक में पूरा होगा. इससे भारत की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
प्रोजेक्ट 75I: भारत और जर्मनी के बीच 6-8 हफ्तों में हो सकती है डील (AI Photo)
नई दिल्ली: भारत और जर्मनी के बीच 6 एडवांस पनडुब्बियों की सप्लाई को लेकर एक मेगा डिफेंस डील फाइनल होने के बेहद करीब है. भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि अगले 6 से 8 हफ्तों के भीतर इस बड़े समझौते पर साइन हो सकते हैं. यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की अंडरवाटर कैपेबिलिटी यानी पानी के नीचे लड़ने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. यह पूरी डील जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के बीच होने वाली है.
प्रोजेक्ट 75I के तहत भारत को क्या मिलने वाला है?
मुंबई में तैयार होंगी ये खतरनाक पनडुब्बियां
- राजदूत एकरमैन ने बताया कि इन पनडुब्बियों का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा. यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के अनुरूप है.
- मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में इन पनडुब्बियों की असेंबली और निर्माण का काम होगा. इससे न केवल भारत की जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम होगी.
- जर्मनी की कंपनी TKMS भारत में अपना खुद का सेटअप लगाने की भी कोशिश कर रही है. इसका मतलब है कि भविष्य में भारत पनडुब्बी निर्माण का एक बड़ा केंद्र बन सकता है.
अब भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साथी मान रहा जर्मनी
पिछले कुछ सालों में भारत और जर्मनी के रक्षा संबंधों में बहुत बदलाव आया है. राजदूत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि भारत अब यूरोप के लिए एक बेहद भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर बन चुका है. जर्मनी ने अपनी एक्सपोर्ट पॉलिसी में भी बदलाव किए हैं ताकि भारत को हथियार और तकनीक आसानी से मिल सकें.
दोनों देश अब सिर्फ खरीदने और बेचने वाले रिश्ते से आगे बढ़ चुके हैं. अब साथ मिलकर डिफेंस सिस्टम डेवलप करने पर जोर दिया जा रहा है. यह दोस्ती आने वाले समय में चीन जैसी चुनौतियों से निपटने में भारत के काम आएगी.
क्या भविष्य के लड़ाकू विमानों में भी दिखेगी भारत-जर्मनी की जोड़ी?
इंटरव्यू के दौरान फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) का भी जिक्र हुआ. यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने का एक बड़ा यूरोपीय प्रोजेक्ट है. इसमें फ्रांस, जर्मनी और स्पेन शामिल हैं. हालांकि इस पर भारत की भागीदारी को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है.
एकरमैन ने बताया कि पहले जर्मनी और फ्रांस को अपने कुछ तकनीकी मतभेदों को सुलझाना होगा. उसके बाद ही किसी नए पार्टनर को इसमें शामिल करने पर विचार किया जा सकता है. लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि भारत जिस तरह से तरक्की कर रहा है, उसे भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर नहीं रखा जा सकता.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें





