INS Aridhaman S4 Submarine: भारत ने समंदर में ऐसी छलांग लगाई जिससे इस्लामाबाद में खलबली मचा गई है. भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन (S4) को नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया है. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक महत्त्व को देखते हुए, इसकी कमीशनिंग को गोपनीय रखा गया. पाकिस्तानी एयरफोर्स चीन के भरोसे बैठी हुई है. जी हां, जब पाकिस्तान इस साल के मध्य तक J-35 फाइटर जेट्स का इंतजार कर रहा था, तब भारत ने स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी बना लिया. इसी के साथ भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन 5 देशों के क्लब में शामिल हो गया जिनके पास पूर्ण न्यूक्लियर ट्रायड की ताकत है. अब भारत न केवल जमीन और हवा, बल्कि समंदर के अंदर से परमाणु हमला कर सकता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस गुप्त कमीशनिंग कार्यक्रम के दौरान दुनिया को कड़ा संदेश देते हुए कहा, ‘शब्द नहीं, शक्ति बोलती है: अरिदमन.’ यह भारत की तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जो दुश्मन की नजरों से बचकर हफ्तों तक पानी के नीचे रह सकती है.
भारत को न केवल जमीन और हवा, बल्कि समंदर की गहराइयों में भी दुश्मन को खाक करने की ताकत मिल गई है.
दुनिया के ‘पावरफुल 5’ के बराबर पहुंचा भारत
आईएनएस अरिदमन के आने से भारत अब उन चुनिंदा महाशक्तियों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास परमाणु पनडुब्बियों का बेड़ा है. दुनिया में इस ताकत का गणित कुछ ऐसा है:
- अमेरिका: 66 परमाणु पनडुब्बियों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा बेड़ा. इनके पास वर्जीनिया और ओहायो जैसी घातक श्रेणियां हैं.
- रूस: 31 परमाणु पनडुब्बियों के साथ दूसरे स्थान पर, जिनमें पांच डेल्टा IV और पांच बोरेई क्लास शामिल हैं.
- चीन: कुल 12 परमाणु पनडुब्बियां, जिनमें शेंग-क्लास (SSNs) सबसे प्रमुख हैं.
- ब्रिटेन: 10 परमाणु मिसाइल पनडुब्बियों का बेड़ा, जिनमें वेंगार्ड और एस्ट्यूट क्लास शामिल हैं.
- फ्रांस: कुल 9 परमाणु पनडुब्बियां, जिनमें रुबिस और सफ़्रेन क्लास दुनिया भर में मशहूर हैं.
ये तो अभी ट्रेलर है, पूरी पिक्चर बाकी है
भारतीय नौसेना के पास कुल 3 परमाणु पनडुब्बियां (Nuclear Submarines) हैं. ये सभी स्वदेशी रूप से निर्मित अरिहंत श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियाँ (SSBN) हैं.
अभी जो पनडुब्बियां सेवा में हैं-
INS अरिहंत (S2): यह भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है, जिसे 2016 में कमीशन किया गया था.
INS अरिघात (S3): इसे अगस्त 2024 में नौसेना में शामिल किया गया. यह अरिहंत का ही उन्नत संस्करण है.
INS अरिदमन (S4): हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इसे 3 अप्रैल 2026 (आज) या इसी महीने कमीशन किया जाना तय है. यह पिछले दोनों जहाजों से बड़ी है और इसमें दोगुनी मिसाइल क्षमता है.
निर्माणाधीन और भविष्य की योजनाएं
- S4 (INS अरिसुदन): अरिहंत श्रेणी की चौथी और अंतिम पनडुब्बी, जिसके 2027 तक कमीशन होने की उम्मीद है.
- S5 श्रेणी: भारत अब और अधिक शक्तिशाली और बड़ी ‘S5 श्रेणी’ की पनडुब्बियों पर काम कर रहा है.
- INS चक्र III: भारत ने रूस से एक अकुला-श्रेणी (Akula-class) की अटैक पनडुब्बी (SSN) लीज़ पर लेने का समझौता किया है, जिसकी डिलीवरी 2028 तक होने की संभावना है.
- स्वदेशी SSN प्रोजेक्ट: भारत सरकार ने 6 स्वदेशी परमाणु हमलावर पनडुब्बियों (Nuclear Attack Submarines) के निर्माण को भी मंजूरी दी है.
न्यूक्लियर ट्रायड: अब बच नहीं पाएगा दुश्मन
भारत की असली ताकत उसका ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ है. INS अरिदमन के बेड़े में शामिल होने का मतलब है कि अब भारत जमीन, हवा और समुद्र तीनों जगहों से परमाणु हथियार दागने में सक्षम है. अगर दुश्मन भारत के एयरबेस या मिसाइल साइट्स को निशाना भी बना ले, तो समंदर की गहराइयों में छिपी यह पनडुब्बी जवाबी हमले में पूरे देश को तबाह करने का ताकत रखती है.



