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INS Taragiri: ईरान जंग के बीच समंदर में भारत की ताकत बढ़ने जा रही है. भारत का नया सिकंदर अब कमाल करने को तैयार है. जी हां, भारतीय नौसेना को एक और नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ मिलने जा रहा है. तारागिरी युद्धपोत को आज यानी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में कमीशन किया जाएगा. खुद राजनाथ सिंह इस नई ताकत से पूरी दुनिया का परिचय करवाएंगे.
स्वदेशी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को आज नौसेना में शामिल करेंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
INS Stealth Frigate Taragiri: ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत के लिए आज बड़ा दिन है. भारत आज यानी शुक्रवार को पूरी दुनिया को समंदर के नए सिकंदर से परिचय कराएगा. जी हां, भारत के इस नए सिकंदर का नाम है. ‘तारागिरी’. यह भारतीय नौसेना को मिलने जा रहा है. ‘तारागिरी’ एक लेटेस्ट स्टील्थ युद्धपोत है. इस खतरनाक युद्धपोत को आज यानी शुक्रवार 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम के समंदर में कमीशन किया जाएगा. भारत का यह लेटेस्ट वॉरशिप समंदर में दुश्मनों का काल है. यह ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. वही ब्रह्मोस मिसाइल, जिससे पाकिस्तान आज तक खौफजदा है.
दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में युद्धपोत, ‘तारागिरी’ को नौसेना में शामिल करेंगे. यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है. यानी इसमें ब्रह्मोस की ताकत दिखेगी. ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं. इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है.
‘तारागिरी’ मतलब दुश्मन का काल
अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के चलते युद्धपोत का चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है. इन युद्धक क्षमताओं के साथ साथ तारागिरी मानवीय संकटों के समय आपदा राहत में भी बड़ी मदद कर सकता है. इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर चीज के लिए आदर्श बनाती है.
स्वदेशी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को आज नौसेना में शामिल करेंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
कितना शक्तिशाली है यह आईएनएस तारागिरी
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह युद्धपोत एक बेहद शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है. तारागिरी युद्धपोत 6,670 टन का है और इसमें स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है. मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. गौरतलब है कि सोमवार 30 मार्च को ही भारतीय नौसेना में युद्धपोत दूनागिरी शामिल किया गया है.
Tomorrow, 03 April, I shall be in Visakhapatnam to attend the Commissioning Ceremony of the advanced stealth Frigate ‘Taragiri’.
This commissioning highlights the strategic and maritime importance of India’s eastern seaboard as well as the Indian Navy’s sustained focus on… pic.twitter.com/rOSxZ9Ftuz




