भारत की समुद्री ताकत को नई धार देते हुए भारतीय नौसेना में अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत INS तारागिरी शामिल हो गया है. विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इसकी कमीशनिंग हुई. ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलों से लैस यह युद्धपोत फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक भारत की रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करने वाला है.
भारत की समुद्री रणनीति में क्यों अहम है INS तारागिरी?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में ‘मरीन पावर’ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, तीन तरफ से समुद्र से घिरा होना और 95% व्यापार का समुद्री रास्तों से होना इस बात को साबित करता है कि मजबूत नौसेना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है. ऐसे में INS तारागिरी का शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘तारागिरी’ हमारे राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है. जब यह जहाज समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की ताकत भारत के लोगों में है, उनकी मेहनत में है, उनकी क्षमता में है और उनके अटूट संकल्प में है.
क्या है INS तारागिरी की ताकत?
INS तारागिरी P-17A क्लास का चौथा स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे देश के अपने वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तैयार किया है.
करीब 7000 टन वजनी यह युद्धपोत कई अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है:
- ब्रह्मोस मिसाइल
- बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम
- वरुणास्त्र टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर.इसके अलावा इसमें आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं, जो दूर से आने वाले खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं. जहाज में हेलिकॉप्टर ऑपरेशन के लिए हैंगर भी मौजूद है.
यह जहाज तेज गति से लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है और किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देने में सक्षम है.
फारस की खाड़ी से मलक्का स्ट्रेट तक बढ़ेगी पकड़
भारतीय नौसेना पहले से ही फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक अपनी मौजूदगी बनाए रखती है. यह दोनों इलाके वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.
फारस की खाड़ी से भारत को बड़ी मात्रा में तेल और गैस मिलती है. वहीं मलक्का स्ट्रेट एशिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग है. ऐसे में NS तारागिरी जैसे आधुनिक युद्धपोत इन इलाकों में भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे.
सिर्फ युद्ध नहीं, राहत कार्यों में भी अहम
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना केवल युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) में भी अग्रणी भूमिका निभाती है.
INS तारागिरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह संकट के समय नागरिकों की निकासी, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य और अंतरराष्ट्रीय मिशनों में सहायता जैसे कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके.
आत्मनिर्भर भारत की ताकत का प्रतीक
इस युद्धपोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है. झगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भूमिका इस प्रोजेक्ट में बेहद अहम रही है, जो दशकों से भारत के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है.
भारत अब सिर्फ अपने तटों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, चोक पॉइंट्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर भी ध्यान दे रहा है.
ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस INS तारागिरी सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और रणनीतिक सोच का प्रतीक है. फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक इसकी मौजूदगी भारत को नई शक्ति देगी और यह दुनिया को साफ संदेश देगा कि समंदर में भारत की पकड़ अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है.





