JCB ऑपरेटर की मौत और पत्नि-बेटी का 6 साल का इंतजार! सुप्रीम कोर्ट ने बदला HC का फैसला, अब 9 लाख नहीं मिलेंगे ₹6000000

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने JCB ऑपरेटर की मौत के मामले में बड़ा फैसला देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया है. कोर्ट ने मुआवजा 9 लाख से बढ़ाकर 60 लाख रुपए कर दिया. यह फैसला छह साल से न्याय का इंतजार कर रही पत्नी और बेटी के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. यह घटना मध्यप्रदेश के कटनी जिले का है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कैसे हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए JCB ऑपरेटर की मौत के मामले में मुआवजा 60 लाख रुपए किया. (फाइल फोटो)

Supreme Court News: मध्यप्रदेश के कटनी में कुछ साल पहले एक हादसा हुआ. एक परिवार बिखर गया, एक कमाने वाला चला गया. वहीं पीछे रह गई पत्नी और छोटी बेटी. छह साल तक इंतजार, अदालतों के चक्कर उम्मीद और निराशा के बीच झूलती जिंदगी. पहले राहत मिली फिर झटका लगा. मुआवजा 52 लाख से घटाकर सिर्फ 9 लाख कर दिया गया. सवाल उठे, क्या एक जिंदगी की कीमत इतनी कम है? क्या मेहनतकश की कमाई को यूं नजरअंदाज किया जा सकता है? आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और यहां से कहानी ने नया मोड़ लिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ हाईकोर्ट के फैसले को पलटा, बल्कि बड़ा संदेश भी दिया. कोर्ट ने कहा कि मृतक की आय से जुड़े ठोस सबूतों को नजरअंदाज करना गलत है. इस मामले में JCB ऑपरेटर की आय को सही तरीके से नहीं आंका गया था. नतीजा यह हुआ कि मुआवजा बेहद कम कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुधारते हुए परिवार को 60 लाख रुपए देने का आदेश दिया. यह फैसला सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि ऐसे कई मामलों के लिए मिसाल बन सकता है.

HC का फैसला गलत ठहराया, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा

  • मामला 2018 के एक सड़क हादसे से जुड़ा है. इसमें JCB और बुलडोजर चलाने वाले एक ऑपरेटर की मौत हो गई थी. उनकी पत्नी और आठ साल की बेटी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में याचिका दायर की थी. उन्होंने बताया था कि मृतक हर महीने करीब 24 हजार रुपए कमाता था और 75 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी. MACT ने 52 लाख रुपए मुआवजा दिया था.
  • लेकिन बीमा कंपनी IFFCO Tokio ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मुआवजा घटाकर सिर्फ 9 लाख रुपए कर दिया. यह परिवार के लिए बड़ा झटका था. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत ठहराया. कोर्ट ने कहा कि आय के सबूतों को नजरअंदाज करना और बिना आधार के मुआवजा घटाना न्यायसंगत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए मुआवजा 9 लाख से बढ़ाकर 60 लाख रुपए कर दिया. कोर्ट ने कहा कि मृतक की आय और परिवार की जरूरतों को सही तरीके से नहीं आंका गया था, जिसे अब ठीक किया गया है.

हाईकोर्ट की गलती क्या थी?

हाईकोर्ट ने मृतक की आय से जुड़े विश्वसनीय सबूतों को नजरअंदाज कर दिया था. इसके कारण मुआवजा बेहद कम कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे मनमाना और गलत माना.

इस फैसले का क्या महत्व है?

यह फैसला उन सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मुआवजा तय करते समय पीड़ित की वास्तविक आय को नजरअंदाज किया जाता है. इससे भविष्य में ऐसे मामलों में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी.

परिवार को मिला न्याय, लंबी लड़ाई का अंत

छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बताता है कि न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन सही मिलना जरूरी है. यह फैसला न सिर्फ इस परिवार के लिए सुकून लेकर आया, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत करता है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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