Kerala Elections: केरल चुनाव में उतरे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, बिहार के 3 लाख लोगों के मन में भरा उत्साह

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तिरुवनंतपुरम: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन केरल विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पहुंचे हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने मंगलवार को अटिंगल में रोड किया. उनके रोड शो में भारी संख्या में लोग उमड़े. स्थानीय कलाकारों ने नितिन नबीन का अपने ही अंदाज में स्वागत किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद बीजेपी अध्यक्ष केरल में बीजेपी कार्यकर्ताओं और वोटरों में उत्साह भरने हुए दिखे. उनके रोड शो में समाज के हर तबके के लोगों की भागीदारी देखने को मिली.

रोडशो में क्या बोले बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन?

अटिंगल में रोड शो करने के दौरान नितिन नबीन ने कहा- ‘दक्षिण भारत का यह इलाका निश्चित रूप से अब भाजपा के कमल और नरेंद्र मोदी के साथ है.’ उन्होंने कहा कि केरल में लोग एलडीएफ और यूडीएफ से ऊप चुकी है. बीजेपी केरल के लोगों के बीच एक मजबूत विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियों ने केरल में केवल मैच फिक्सिंग करने का काम किया है. इन्होंने जनता के लिए कभी कुछ नहीं किया.

नितिन नबीन ने कहा कि केरल में बीजेपी के वोटबैंक में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केरल अब केरलम के रूप में आगे बढ़ने को आतुर है. केरल की जनता एलडीएफ और यूडीएफ के फिक्सिंग को उखाड़ फेकेगी. ये दोनों एक दूसरे पर आपस में आरोप प्रत्यारोप करके अपनी भलाई करते रहे हैं. अब केरल के लोगों को इनकी फिक्सिंग समझ में आ गई है. एलडीएफ और यूडीएफ की सरकारों ने केरल को उद्योग धंधे, पर्यटन, वेलफेयर समेत तमाम चीजों से बाहर रखा. हेल्थ इंडेक्स में केरलम आज 15वें स्थान पर है. केरलम अब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आगे बढ़ने के लिए तैयार है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी केरल चुनाव में 30 से 40 फीसदी वोट हासिल करने जा रही है.

केरल में नितिन नबीन की जनसभाएं क्यों है जरूरी?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर भारत के बिहार राज्य से आते हैं. एक अनुमान के मुताबिक बिहार के करीब तीन लाख लोग केरल के अलग-अलग शहरों में रहकर रोजी रोजगार में जुटे हैं. कुछ आकलनों के मुताबिक यह संख्या लगभग 5 लाख के आसपास भी मानी जाती है. केरल में कुल प्रवासी मजदूरों की संख्या करीब 40 लाख है, जिनमें बिहारी लगभग 7 फीसदी हैं.

बिहार से गए लोग केरल के एर्नाकुलम (कोच्चि), पेरुंबवूर और बिनानिपुरम बेल्ट, कोझिकोड (कालीकट) इलाकों के फुटवियर और छोटे उद्योगों में बड़ी संख्या में काम करते हैं. वहीं त्रिशूर, पलक्कड़, कन्नूर
कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर में भी बिहार के प्रवासी मजदूरों की संख्या भी अच्छी खासी है.
इडुक्की, वायनाड में बिहारी मजदूर प्लांटेशन और ईंट भट्ठों में काम करते हैं.

बताया जाता है कि बिहार से केरल गए ज्यादातर मजदूर अभी भी बिहार में ही अपने वोटिंग अधिकार को रखे हुए हैं. पिछले चुनावों तक बिहार के कई मजदूरों ने केरल में भी वोट डाल रहे थे, लेकिन विशेष गहन पुनरावृति (SIR) के बाद ज्यादातर ने अपने नाम कटवा लिए हैं. उन्होंने अपना वोटिंग अधिकार केरल के बजाय बिहार में ही रखना मुनासिब समझा है. इन सबके बावजूद शहरी इलाकों में बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके से जाकर बसे लोग ठीक ठाक संख्या में वोट करते हैं. माना जा रहा है कि नितिन नबीन के केरलम दौरे से उनका झुकाव बीजेपी की तरफ मजबूती के साथ दिख सकता है.

बताया जा रहा है कि नितिन नबीन की मौजूदगी में बीजेपी केरल विधानसभा चुनाव 2026 का घोषणापत्र जारी कर सकती है. घोषणापत्र में कई लोकलुभावन वादे भी किए जा सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि इसमें रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष फोकस किया जा सकता है.



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