Iran War News: ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत को बड़ी खुशखबरी मिली है. ईंंधन संकट की आहट के बीच होर्मुज पार कर एक एलपीजी (LPG) टैंकर मुंबई आ चुका है. जी हां, भारतीय झंडे वाला LPG कैरियर जहाज BW TYR आज यानी बुधवार सुबह होर्मुज को पार कर मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा. यह LPG कैरियर जहाज BW TYR उन दो LPG कैरियर जहाजों में से एक है, जो शुक्रवार को दुबई-रास अल खैमा से रवाना हुए थे. दूसरा कैरियर BW ELM है जो रास्ते में है और वह भी न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है.
दरअसल, BW TYR एक LPG टैंकर है. इसे 2008 में बनाया गया था. यह भारत के झंडे के तहत चलता है और इसकी कुल लंबाई (LOA) 225 मीटर और चौड़ाई 36.6 मीटर है. LPG कैरियर जहाजों यानी BW TYR और BW ELM में लगभग 94,000 टन का माल लदा है. इससे पहले एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचे थे. इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर थे.
अभी आए एलीपीजी टैंकर बीडब्ल्यू टीवाईआर उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे. इसका कारण युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है, जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है. इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं. यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है.
अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में बनाव बढ़ गया है. उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे. इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. पिछले कुछ दिन में दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं.
भारत को एक और खुशखबरी
इस बीच भारत को एक और खुशखबरी मिलने जा रही है. जी हां, करीब सात साल के बाद भारत को ईरान से कच्चा तेल जल्द मिलने की संभावना है. ईरानी तेल से लदा एक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है. जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों के मुताबिक, ‘पिंग शुन’ नामक यह जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ बढ़ रहा है.
जिंस विश्लेषण फर्म केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि यह मई, 2019 के बाद भारत को ईरानी तेल की पहली आपूर्ति हो सकती है. उन्होंने बताया कि हाल में ‘समुद्र में मौजूद’ ईरानी तेल की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बाद ही यह आपूर्ति संभव हुई है.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज में मौजूद कच्चे तेल का खरीदार कौन है. लेकिन इस जहाज का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी हो सकती है. वाडिनार बंदरगाह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी सहित अन्य इकाइयों के लिए भी आपूर्ति का केंद्र है.
पेट्रोलियम मंत्रालय अब तक यह कहता रहा है कि ईरान से तेल खरीद दोबारा शुरू करने का फैसला तकनीकी एवं व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा. भारत ऐतिहासिक तौर पर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है. एक समय भारत के कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत थी.
अमेरिका ने हाल में ईरानी तेल की समुद्र में मौजूद खेप की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी थी जो 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी. यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत उठाया गया. अनुमान है कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुल मात्रा करीब 9.5 करोड़ बैरल है, जिसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है.





