भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण मामले में भारतीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. बेल्जियम की एंटवर्प अपीलीय अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद है. कोर्ट ने इसके साथ ही चोकसी के उस आरोप को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2021 में उन्हें एंटीगुआ से अगवा किया गया था.
एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील की ‘चैंबर ऑफ एक्यूजेशन’ ने 3 अप्रैल को बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को अपनी सलाह सौंपी. इसमें चोकसी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसे आरोपों को सही माना गया. हालांकि, सबूत नष्ट करने के आरोप को अदालत ने बाहर कर दिया, क्योंकि यह अपराध बेल्जियम के कानून के तहत दंडनीय नहीं है.
मेहुल चोकसी ने चली नई चाल
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट एंटवर्प के अटॉर्नी जनरल केन वित्पास ने पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत ने पाया है कि भारत और बेल्जियम के बीच प्रत्यर्पण के लिए कानूनी आधार मौजूद है और जिन अपराधों के आरोप चोकसी पर हैं, वे बेल्जियम में भी दंडनीय हैं.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मेहुल चोकसी ने भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खतरे को देखते हुए बेल्जियम में शरण के लिए भी आवेदन किया है. हालांकि, ऐसे मामलों की जानकारी गोपनीय होती है, इसलिए इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
अगवा किए जाने के आरोप पर कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चोकसी का मामला किसी भी तरह से ‘राजनीतिक साजिश’ या ‘विच हंट’ नहीं है. अदालत के मुताबिक, ये आरोप न तो राजनीतिक हैं, न सैन्य और न ही कर (फिस्कल) मामलों से जुड़े हैं, इसलिए प्रत्यर्पण पर कोई कानूनी रोक नहीं है.
चोकसी ने दावा किया था कि मई 2021 में उन्हें एंटीगुआ से जबरन डोमिनिका ले जाया गया था और इसमें भारतीय एजेंसियों की भूमिका थी. इस पर अदालत ने माना कि उन्हें जबरन ले जाए जाने की संभावना हो सकती है, लेकिन भारतीय सरकार की इसमें सीधी भूमिका का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. इसके अलावा, अदालत ने यह भी नहीं माना कि भारत में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी या उनके साथ अमानवीय व्यवहार होगा.
वैसे अदालत का यह फैसला अंतिम नहीं है, बल्कि एक सलाह है. अब अंतिम निर्णय बेल्जियम की न्याय मंत्री को लेना है. फिलहाल मामला उनके विचाराधीन है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है.
कब से जेल में है चोकसी?
65 वर्षीय चोकसी को पिछले साल 11 अप्रैल को एंटवर्प में भारत के अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया था और तब से वह वहीं की जेल में बंद है. भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, उसने 2018 से 2022 के बीच करीब 13,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटालों को अंजाम दिया.
भारत सरकार ने बेल्जियम को आश्वासन दिया है कि प्रत्यर्पण के बाद चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध हैं. उसे साफ पानी, पर्याप्त भोजन, मेडिकल सुविधा, अखबार और टीवी की सुविधा दी जाएगी. साथ ही, जरूरत पड़ने पर निजी डॉक्टर से इलाज की अनुमति भी होगी और उसे एकांत कारावास में नहीं रखा जाएगा.
अब सभी की नजर बेल्जियम सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी है. अगर न्याय मंत्री प्रत्यर्पण को मंजूरी देती हैं, तो चोकसी को भारत लाने का रास्ता साफ हो जाएगा. हालांकि, शरण की अर्जी और कानूनी प्रक्रियाएं इस मामले को कुछ और लंबा खींच सकती हैं.





