Modi Government Airport Revolution: सिर्फ जेवर नहीं, मोदी राज में बने 90 नए एयरपोर्ट; 12 साल में कैसे बदली भारत की तस्वीर?

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Modi Government Airport Revolution: पिछले एक दशक में भारत की तस्वीर जिस तेजी से बदल रही है. हर दिन विकास की नई इबारत लिखी जा रही है. भारत की बदलती तस्वीर में हवाई कनेक्टिविटी भी बेहद अहम रोल निभा रहा है. कभी हवाई यात्रा को सिर्फ अमीरों का साधन माना जाता था, लेकिन आज यह आम आदमी की पहुंच में है. यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि एक शानदार प्लानिंग और विजन से आया है. इसी प्लानिंग का एक नया उदाहरण 28 मार्ट को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन है. नरेंद्र मोदी सरकार ने एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का आधार बनाया और इसका असर अब साफ दिखने लगा है. 2014 में जहां देश में सिर्फ 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे. वहीं 2026 तक यह संख्या 160 से ज्यादा हो गई. यानी हर कुछ हफ्तों में एक नया एयरपोर्ट जुड़ता गया. यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है बल्कि बदलते भारत की उड़ान की कहानी है. यह पीएम मोदी के उस सपने के साकार होने जैसा है जब उन्होंने कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा जब हवाई चप्पल पहनने वाले भी फ्लाइट में यात्रा करेंगे.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर सामने आया है. दिल्ली-एनसीआर के दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक नक्शे को बदलने वाला केंद्र बनने जा रहा है. फेज-1 में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ शुरू हो रहा यह एयरपोर्ट आने वाले समय में 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचेगा. यह बताता है कि भारत अब सिर्फ आज के लिए नहीं बल्कि भविष्य के लिए भी तैयार हो रहा है.

74 से 165 एयरपोर्ट तक का सफर, UDAN ने बदली उड़ान

2014 से 2026 के बीच भारत की हवाई तस्वीर में जो बदलाव आया है, वह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं बल्कि एक बड़े विजन का नतीजा है. जहां पहले देश में महज 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे. वहीं अब यह संख्या 160 से पार पहुंच चुकी है. यानी एक दशक में 90 से ज्यादा नए एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम जुड़े हैं. इसमें उड़ान योजना की सबसे अहम भूमिका रही, जिसने छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को पहली बार हवाई नक्शे पर जगह दिलाई. इसके साथ ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के विस्तार कार्य, और राज्यों के सहयोग से यह नेटवर्क तेजी से बढ़ा. अब हालात यह हैं कि जहां कभी ट्रेन या बस ही एकमात्र विकल्प था, वहां आज फ्लाइट्स नियमित रूप से उड़ान भर रही हैं.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर सामने आया है. (फोटो PTI)

मोदी सरकार ने 21 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट मंजूर किए, जिनमें से 12+ अब ऑपरेशनल हैं. कुछ प्रमुख नाम:

  • पाक्योंग एयरपोर्ट, सिक्किम (2018): पूर्वोत्तर का पहला फुल-फ्लेज्ड एयरपोर्ट.
  • कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, केरल (2018).
  • कलबुर्गी एयरपोर्ट, कर्नाटक (2019).
  • ओरावकाल (कुरनूल) एयरपोर्ट, आंध्र प्रदेश (2021).
  • सिंधुदुर्ग एयरपोर्ट, महाराष्ट्र (2021).
  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश (2021): बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए.
  • डोनी पोली (इटानगर) एयरपोर्ट, अरुणाचल प्रदेश (2022).
  • मोपा (मनोहर) इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गोवा (2023).
  • शिवमोगा एयरपोर्ट, कर्नाटक (2023).
  • हिरासर (राजकोट) इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गुजरात (2023).
  • और अब जेवर (नोएडा) इंटरनेशनल एयरपोर्ट (28 मार्च 2026): दिल्ली-NCR का सबसे बड़ा नया हब.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन पर अपने संबोधन में इसी बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘पहले की सरकारें मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए होती है, लेकिन हमने इसे सामान्य भारतीय के लिए सुलभ बनाया.’ उन्होंने यह भी बताया कि UDAN योजना के तहत अब तक 1.6 करोड़ से ज्यादा लोग सस्ती दरों पर हवाई यात्रा कर चुके हैं. मोदी ने गन्ना किसानों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि अब हालात बदल चुके हैं. पहले किसानों को भुगतान के लिए सालों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब उनकी स्थिति बेहतर हुई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जेवर एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र के किसानों, युवाओं और छोटे उद्योगों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी साफ किया कि जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह ‘विकसित भारत’ के विजन का हिस्सा है. उन्होंने कहा, ‘यहां से सिर्फ विमान नहीं उड़ेंगे, बल्कि एक विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान भी दिखाई देगी.’ उन्होंने पुराने दौर पर निशाना साधते हुए कहा कि 2003 में इस एयरपोर्ट को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन 2014 तक यह फाइलों में ही दबा रहा. डबल इंजन सरकार आने के बाद ही इस प्रोजेक्ट को गति मिली और आज यह हकीकत बन पाया. उन्होंने यह भी कहा कि अब यह क्षेत्र फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ रहा है, इससे किसानों और उद्योगों के उत्पाद सीधे देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंच सकेंगे.

जेवर दिल्ली-एनसीआर का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. (फोटो PTI)

जेवर एयरपोर्ट इतना खास क्यों है?

जेवर एयरपोर्ट को सिर्फ एक एयरपोर्ट के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक भविष्य के मेगा एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह दिल्ली-एनसीआर का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करेगा. इसकी मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी यानी सड़क, रेल, मेट्रो और फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ाव इसे और खास बनाता है. आने वाले सालों में इसकी क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने का टारगेट है, जो इसे एशिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स में शामिल कर सकता है.

मोदी सरकार में एयरपोर्ट की संख्या इतनी तेजी से कैसे बढ़ी?

इस तेजी के पीछे एक सुनियोजित रणनीति रही है. UDAN योजना के जरिए छोटे शहरों को प्राथमिकता दी गई, जबकि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति के तहत नए एयरपोर्ट बनाए गए. इसके अलावा पुराने और बंद पड़े एयरपोर्ट्स को फिर से चालू किया गया. वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी नीतियों ने एयरलाइंस को छोटे रूट्स पर उड़ानें चलाने के लिए प्रोत्साहित किया. केंद्र और राज्य सरकारों के आपसी समन्वय से यह विस्तार संभव हो पाया.

उड़ान स्कीम का सबसे बड़ा फायदा क्या रहा?

उड़ान योजना ने हवाई यात्रा को लोकतांत्रिक बना दिया. पहले जहां फ्लाइट टिकट महंगे होते थे, वहीं अब 500 किमी तक की उड़ानों पर किराया सीमित रखा गया है. इससे छोटे शहरों के लोग भी आसानी से हवाई यात्रा कर पा रहे हैं. इस योजना के तहत लाखों लोगों ने पहली बार फ्लाइट में सफर किया, जिससे देश में यात्रा की संस्कृति भी बदली है.

क्या एयरपोर्ट विस्तार से अर्थव्यवस्था को वास्तविक फायदा हुआ?

बिलकुल, एयरपोर्ट सिर्फ यात्रा का माध्यम नहीं होते, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन जाते हैं. जहां भी एयरपोर्ट बना वहां रोजगार के अवसर बढ़े, पर्यटन को बढ़ावा मिला और इंडस्ट्रीज को नई गति मिली. रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आई और स्थानीय व्यापार को भी फायदा हुआ. खासकर जेवर जैसे प्रोजेक्ट्स से पूरे क्षेत्र का आर्थिक नक्शा बदलने की उम्मीद है.

भविष्य में भारत का एयरपोर्ट विजन क्या है?

सरकार का लक्ष्य 2047 तक 350 से 400 एयरपोर्ट बनाने का है. इससे हर क्षेत्र को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिल सके. अगले 5 सालों में 50 नए एयरपोर्ट जोड़ने की योजना है. साथ ही, हेलिपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि दूरदराज के इलाकों को भी जोड़ा जा सके. यह विजन विकसित भारत के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है.

जेवर से बदलेगी उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि उत्तर भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक इंजन बनने जा रहा है. यह एयरपोर्ट आगरा, मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और आसपास के कई जिलों को सीधा फायदा पहुंचाएगा. मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, फ्रेट कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. यहां से कृषि उत्पाद, मैन्युफैक्चरिंग गुड्स और एक्सपोर्ट सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंच सकेंगे.
  • इसके अलावा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिलेगा. मोदी सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि विकास का मजबूत आधार बन चुकी है. जेवर एयरपोर्ट इसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है.



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