Monsoon Rains Flood Alert Weather Report | मानसून की बदलती चाल: वैज्ञानिकों ने खोजा वो ‘अनदेखा’ कारण, जो ला रहा है जलप्रलय, 44% बढ़ गया बाढ़ का खतरा

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मानसून की बदलती चाल: वैज्ञानिकों ने खोजा वो ‘अनदेखा’ कारण, जो ला सकता जलप्रलय!

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Flood Alert: उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान जैसे शुष्क इलाकों में जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं. नई रिसर्च के अनुसार, मानसून इंट्रासीजनल ऑसिलेशन (ISO) की चाल में आए बदलाव ने बाढ़ की फ्रीक्वेंसी को 44% तक बढ़ा दिया है. ट्रॉपिकल ISO का उत्तर की ओर गहरा प्रवेश और मिड-लैटीट्यूड ISO की धीमी गति इस तबाही के मुख्य कारण हैं. भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के चलते यह जोखिम और बढ़ने की आशंका है, जिससे निपटने के लिए बेहतर अर्ली वार्निंग सिस्टम की जरूरत है.

साउथ एशिया का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा, जिसमें पाकिस्तान और भारत का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (राजस्थान, गुजरात) आता है, ऐतिहासिक रूप से शुष्क या अर्द्ध-शुष्क (Semi-arid) माना जाता रहा है. लेकिन पिछले कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने यहां के मौसम को पूरी तरह बदल दिया है. अब इन रेगिस्तानी इलाकों में ऐसी भीषण बारिश और बाढ़ देखी जा रही है, जो पहले कभी नहीं देखी गई. (Photo : AP)

Science Advances जर्नल में छपी हालिया रिसर्च के अनुसार, इस बदलाव के पीछे ‘इंट्रासीजनल ऑसिलेशन’ (ISO) की बदलती चाल एक बड़ा कारण है. यह नया खुलासा बाढ़ की भविष्यवाणी और उससे निपटने की रणनीतियों के लिए बेहद अहम है. पिछले 40 सालों में दक्षिण एशिया के इन शुष्क क्षेत्रों में मानसूनी बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ली है और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. (Photo : AP)

पाकिस्तान में 2022 में आई ऐतिहासिक बाढ़ ने 1,700 से ज्यादा लोगों की जान ली और लाखों को विस्थापित किया. इसमें करीब 40 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ. वहीं, इस साल के मानसूनी सीजन में अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. मार्च आमतौर पर सबसे शुष्क महीनों में से एक होता है, लेकिन 18 मार्च को कराची में 50mm बारिश दर्ज की गई, जबकि पूरे मार्च का औसत सिर्फ 15.7mm है. बात भारत की करें तो गुजरात के राजकोट में मार्च में 38mm तक बारिश देखी गई, जबकि वहां सामान्यतः 1mm से भी कम बारिश होती है. (File Photo : Reuters)

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वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र में बाढ़ आने की घटनाओं में 44% की वृद्धि हुई है. पुराने अध्ययनों में अक्सर पूरे सीजन की औसत बारिश पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन नई रिसर्च उस मैकेनिज्म (Mechanism) को समझाती है जो कुछ ही दिनों के भीतर भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा कर देता है. (File Photo : Reuters)

रिसर्च के मुताबिक, इसके पीछे दो मुख्य ताकतें काम कर रही हैं. पहला ट्रॉपिकल ISO (Tropical ISO), इसका उत्तर की ओर बढ़ना और गहराई तक घुसना. दूसरा मिड-लैटीट्यूड ISO (Mid-latitude ISO), इसकी गति का धीमा होना. (File Photo : Reuters)

ट्रॉपिकल इंट्रासीजनल ऑसिलेशन (ISO) वायुमंडल की वह हलचल है जो 10 से 90 दिनों के चक्र में चलती है. सामान्यतः यह हिंद महासागर से शुरू होकर उत्तर की ओर बढ़ती है. रिसर्च में पाया गया कि पिछले दो दशकों (2001-2022) में यह ISO सिग्नल अब 20°N अक्षांश के पार जाकर उत्तर-पश्चिमी दक्षिण एशिया (NWSA) के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचने लगा है. पहले यह सिग्नल समुद्र के पास ही कमजोर पड़ जाता था. अरब सागर के गर्म होने और जमीन-समुद्र के तापमान में बढ़ते अंतर के कारण इसे अधिक ऊर्जा मिल रही है, जिससे यह ज्यादा तीव्र और विनाशकारी हो गया है. (File Photo : Reuters)

सिर्फ ट्रॉपिकल ISO ही नहीं, बल्कि मध्य-अक्षांश (Mid-latitude) से आने वाली हवाओं की लहरें भी बाढ़ के लिए जिम्मेदार हैं. ये हवाएं जेट स्ट्रीम (Jet Stream) के साथ चलती हैं. रिसर्च के अनुसार, यूरेशियाई जेट स्ट्रीम कमजोर हो रही है. इस कमजोरी की वजह से ऊपर से आने वाली हवाओं की लहरें (ISO wave packets) बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती हैं. जब ये लहरें उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के ऊपर पहुंचती हैं, तो वहां लंबे समय तक रुक जाती हैं. इसके कारण नमी का प्रवाह (Moisture transport) बना रहता है और बारिश रुकने का नाम नहीं लेती. यही कारण है कि अब बाढ़ वाले दिन बढ़ रहे हैं और पानी लंबे समय तक जमा रहता है. (File Photo : Reuters)

ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन (SSP5-8.5 scenario) के बीच, यह खतरा कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, वायुमंडल में नमी सोखने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे बारिश और तीव्र होगी. भविष्य के अनुमान बताते हैं कि इस सदी के अंत तक ट्रॉपिकल ISO के कारण होने वाली बारिश की तीव्रता दोगुनी हो सकती है. जेट स्ट्रीम के और कमजोर होने से भविष्य में बाढ़ की अवधि और भी ज्यादा लंबी हो सकती है. (File Photo : Reuters)

उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान जैसे शुष्क क्षेत्रों में बाढ़ का बढ़ना केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक गहरा हाइड्रोलॉजिकल बदलाव है. रिसर्च बताती है कि ISO अब बाढ़ की भविष्यवाणी के लिए एक प्रमुख संकेतक (Indicator) बन सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग करके अगर ISO सिग्नल्स को पकड़ा जाए, तो बाढ़ की चेतावनी 10 दिन पहले दी जा सकती है. यह इस संवेदनशील क्षेत्र के कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और लाखों लोगों की जिंदगी बचाने के लिए निर्णायक साबित होगा. (File Photo : Reuters)

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