नई दिल्ली (NCERT Curriculum Reset 2026). भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ी है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में NCERT के सिलेबस में बड़े ‘रीसेट’ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गहन इंटीग्रेशन की घोषणा की है. शिक्षा मंत्रालय की यह कोशिश सिर्फ किताबों के पन्ने बदलने के लिए नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद बच्चों के सोचने के तरीके को मॉडर्न बनाना और उनके सीखने के आधार को मजबूत करना है.
NCERT का नया अवतार: एआई और मॉडर्न स्किल्स पर जोर
एनसीईआरटी के नए सिलेबस यानी नई किताबों में एआई और कोडिंग आदि पर खास फोकस किया जाएगा. इससे बच्चों को फ्यूचर वर्कप्लेस और नई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी.
सिलेबस का ‘रीसेट’ और बोझ कम करने की तैयारी
NCERT के नए पाठ्यक्रम में गैर-जरूरी और दोहराव वाले तथ्यों को हटाया जा रहा है. शिक्षा मंत्री के अनुसार, सिलेबस को हल्का किया जाएगा ताकि छात्र केवल परीक्षा के लिए न पढ़ें, बल्कि विषयों की गहरी समझ विकसित कर सकें. इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ मॉडर्न साइंस का बैलेंस बनाया गया है.
क्लासरूम में AI की एंट्री
नए रोडमैप की सबसे बड़ी खासियत ‘AI-First’ अप्रोच है. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक विषय नहीं होगा, बल्कि इसे सीखने के डिवाइस के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. छात्रों को कोडिंग, डेटा एनालिटिक्स और एआई के नैतिक उपयोग (Ethical AI) के बारे में शुरुआती स्तर से ही शिक्षित किया जाएगा.
बहुभाषी शिक्षा और स्थानीय जुड़ाव पर फोकस
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जोर दिया है कि नई किताबें 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी. मातृभाषा में शिक्षा देने से छात्रों की वैचारिक स्पष्टता बढ़ती है. इसके अलावा, स्थानीय इतिहास और संस्कृति को भी मुख्यधारा के पाठ्यक्रम में जगह दी जा रही है.
शिक्षकों की ट्रेनिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
पाठ्यक्रम बदलने के साथ-साथ शिक्षकों की ‘री-स्किलिंग’ पर भी बड़ा इनवेस्टमेंट किया जाएगा. ‘दीक्षा’ (DIKSHA) पोर्टल को पहले से भी ज्यादा सशक्त बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी हाई क्वॉलिटी वाला डिजिटल कंटेंट एक्सेस कर सकें.
मूल्यांकन पद्धति में बदलाव
परीक्षाओं का डर खत्म करने के लिए बोर्ड परीक्षाओं के फॉर्मेट में भी बदलाव प्रस्तावित हैं. अब फोकस वार्षिक परीक्षा के बजाय लगातार मूल्यांकन (Continuous Assessment) पर होगा, जहां छात्र की प्रोग्रेस का आकलन केवल अंकों से नहीं, बल्कि उसकी स्किल्स और प्रोजेक्ट वर्क से होगा.





