नई दिल्ली (NEET UG 2026 Government College Cut Off). लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए नीट यूजी परीक्षा केवल एंट्रेंस एग्जाम नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने का एंट्री गेट है. हर साल ज्यादातर परीक्षार्थियों के मन में एक आम सवाल रहता है- सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पक्की करने के लिए नीट यूजी में कम से कम कितने अंक लाने होंगे. सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस निजी संस्थानों की तुलना में कम होती है. यहां की शिक्षा और क्लीनिकल एक्सपोजर का स्तर भी काफी ऊंचा माना जाता है.
NEET UG 2026: सरकारी कॉलेज में MBBS सीट के लिए कितना स्कोर है सुरक्षित?
नीट यूजी परीक्षा 03 मई 2026 को होगी. हर साल की तरह इस बार भी लाखों उम्मीदवार नीट यूजी परीक्षा में शामिल होंगे. नीट यूजी परीक्षा की तैयारी करने वालों को पता होना चाहिए कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट सुरक्षित करने के लिए कितने मार्क्स की जरूरत होगी.
15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ) का गणित क्या है?
भारत के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 15% सीटें ऑल इंडिया कोटा के तहत भरी जाती हैं. इस कोटे में कॉम्पिटीशन सबसे कठिन होता है क्योंकि यहां पूरे देश के मेधावी उम्मीदवार आवेदन करते हैं. आंकड़ों के अनुसार, जनरल कैटेगरी के लिए AIQ के माध्यम से सरकारी सीट पाने के लिए 620 से 650 के बीच अंक लाना सुरक्षित स्थिति मानी जा सकती है. अगर आप दिल्ली के टॉप कॉलेजों (जैसे एम्स या MAMC) को लक्ष्य कर रहे हैं तो यह स्कोर 700+ तक जा सकता है.
85% स्टेट कोटा: राज्यों के अनुसार बदलता कट-ऑफ
हर राज्य के सरकारी कॉलेजों में 85% सीटें उसी राज्य के मूल निवासियों के लिए आरक्षित होती हैं. अलग-अलग राज्यों में कट-ऑफ अलग-अलग होता है. उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में कट-ऑफ काफी हाई रहता है, जहां सरकारी सीट के लिए 600-615 अंक जरूरी हो सकते हैं. वहीं, कुछ पहाड़ी या दक्षिण भारतीय राज्यों में 570-590 अंकों पर भी सरकारी कॉलेज मिलने की संभावना रहती है.
नीट यूजी में श्रेणीवार अपेक्षित अंक
सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए आरक्षण की भूमिका काफी रहती है. अनुमान के अनुसार:
- सामान्य/EWS: 610-630+ अंक
- ओबीसी: 600-620+ अंक
- एससी: 500-520+ अंक
- एसटी: 480-500+ अंक
नोट: ये अंक प्रश्न पत्र के स्तर के आधार पर बदल सकते हैं.
नीट यूजी कट ऑफ कैसे तय होता है?
नीट यूजी कटऑफ कई फैक्टर्स पर निर्धारित होता है:
- कुल अभ्यर्थी: परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है.
- पेपर का स्तर: अगर फिजिक्स या केमिस्ट्री का पेपर कठिन आता है तो औसत कट-ऑफ नीचे गिर सकता है.
- सीटों की संख्या: नए मेडिकल कॉलेज खुलने से सीटों में बढ़ोतरी होती है, जिससे कम अंकों पर भी दाखिले की उम्मीद बढ़ती है.
सरकारी मेडिकल कॉलेज के फायदे
सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना न केवल आर्थिक रूप से सुलभ है, बल्कि यहां मरीजों का दबाव अधिक होने के कारण स्टूडेंट्स को सीखने के अवसर भी अधिक मिलते हैं. इसके अलावा, सरकारी कॉलेजों की डिग्री की प्रतिष्ठा और इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड भी छात्रों के लिए बड़ा आकर्षण होता है.




