Oracle का वीजा गेम, पुराने कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता, H-1B के जरिए सस्ते लेबर की तैयारी

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नई दिल्ली (Oracle Layoffs 2026). दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी ओरेकल से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कॉर्पोरेट जगत की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मंगलवार की सुबह ठीक 6 बजे, जब ज्यादातर कर्मचारी सोकर भी नहीं उठे थे, ओरेकल के 30,000 कर्मचारियों के इनबॉक्स में एक ईमेल आया. भेजने वाले का कोई नाम नहीं था, बस लिखा था- ओरेकल लीडरशिप. इस ईमेल ने एक झटके में हजारों परिवारों की खुशियां छीन लीं. हैरानी की बात यह है कि जब तक कर्मचारी ईमेल में Grateful शब्द तक पहुंचते, तब तक उनके ईमेल, फाइल्स और Slack का एक्सेस ब्लॉक किया जा चुका था.

यह छंटनी किसी ऐसी कंपनी ने नहीं की जो घाटे में चल रही हो. ओरेकल का इस तिमाही का रिवेन्यू 17.2 अरब डॉलर रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 22% ज्यादा है. वहीं कंपनी की नेट इनकम में 95% का भारी उछाल देखा गया है. फिर भी 30,000 लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओरेकल में छंटनी रोल्स खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि सैलरी कम करने के लिए की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने हजारों डोमेस्टिक वर्कर्स को निकालकर उन्हीं पदों पर कम वेतन वाले विदेशी (H-1B) कर्मचारियों को रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

ओरेकल ने छंटनी क्यों की?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर Peter Girnus नामक शख्स का पोस्ट वायरल हो रहा है. वे खुद को ओरेकल में वर्कफोर्स इकोनॉमिक्स का उपाध्यक्ष यानी वाइस चेयरमैन बता रहे हैं. उन्होंने लिखा कि उनकी कंपनी यानी ओरेकल का कुल मूल्य 420 अरब डॉलर है. इस लेख के सभी पॉइंट्स उनके पोस्ट के आधार पर हैं. न्यूज़18 हिंदी इनकी सत्यता की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है.

सुबह 6 बजे का वो खौफनाक ईमेल

ओरेकल ने छंटनी के लिए जिस तरीके को चुना, उसने सबको हैरान कर दिया. न कोई मीटिंग, न कोई फोन कॉल, बस सुबह-सुबह एक ईमेल और बंद लैपटॉप. इनमें कुछ कर्मचारी 16 और 30 साल से कंपनी के साथ थे. एक कर्मचारी, जिसके पिता ने 20 साल तक ओरेकल को अपनी सेवाएं दी थीं, उसे भी इसी तरह बाहर कर दिया गया. ईमेल में कंपनी ने उनके ‘समर्पण और कड़ी मेहनत’ के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन उसी पल उनकी डिजिटल पहचान मिटा दी गई. वॉल स्ट्रीट ने इन 30,000 इंसानों को नहीं, बल्कि कंपनी का मार्जिन देखा और मंगलवार को ओरेकल के शेयर 4% चढ़ गए.

छंटनी के पीछे का H-1B खेल

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादित पहलू विदेशी कामगारों की भर्ती है. ओरेकल ने जहां 30,000 लोगों को निकाला, वहीं इसी साल हजारों H-1B वीजा याचिकाएं भी दायर की हैं. आंकड़े बताते हैं कि ओरेकल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की औसत सैलरी $106,000 है, जबकि उसी काम के लिए H-1B वर्कर को केवल $87,000 दिए जा रहे हैं. यह सिर्फ पैसों की बचत नहीं है, बल्कि रिटेंशन का भी एक तरीका है. विदेशी वर्कर का कानूनी दर्जा कंपनी की स्पॉन्सरशिप पर निर्भर करता है. इसलिए वे कम वेतन पर भी शिकायत नहीं कर सकते और नौकरी के लिए अपना देश छोड़कर आ जाते हैं.

AI डेटा सेंटर्स के लिए जुटाई जा रही नकदी?

इस छंटनी के जरिए ओरेकल करीब 8 से 10 अरब डॉलर का कैश फ्लो फ्री करना चाहता है. कंपनी इस रकम का इस्तेमाल 156 अरब डॉलर के भारी-भरकम ‘AI डेटा सेंटर्स’ बनाने में कर रही है. 2028 से शुरू होने वाले एक प्रोजेक्ट के लिए OpenAI ओरेकल को रोजाना 82 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगा. ओरेकल के मालिक लैरी एलिसन अपनी $189 बिलियन की संपत्ति के साथ अब AI की रेस में सबसे आगे निकलना चाहते हैं और शायद इसी के लिए कर्मचारियों की बलि दी जा रही है. सोशल मीडिया पर ओरेकल की छंटनी से जुड़े कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं.

सिर्फ ओरेकल नहीं, यही नया ऑपरेटिंग मॉडल है

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और टेक की दिग्गज कंपनियों में शामिल अमेजन ने भी अक्टूबर से अब तक 30,000 लोगों को निकाला है और साथ ही हजारों H-1B याचिकाएं लगाई हैं. टेक इंडस्ट्री में अब एक नया ट्रेंड चल पड़ा है- सैलरी को फायर करो, रोल को बनाए रखो. इसका सीधा मतलब है कि उन लोगों को काम पर रखो, जिनका देश में रहना आपकी मर्जी पर निर्भर हो. जो लोग निकाले गए वे अब ‘आजाद’ तो हैं, लेकिन जो नए लोग कम वेतन पर आ रहे हैं, वे कंपनी के बंधक बनकर रह जाएंगे.



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