Oracle Layoffs: सुबह उठे तो बदल चुकी थी दुनिया, ओरेकल छंटनी के शिकार ऋषिकेश नरशा की आपबीती

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नई दिल्ली (Oracle Layoffs 2026). दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनी ओरेकल में चल रही छंटनी की लहर भारत के अनुभवी लीडर्स को भी अपनी चपेट में ले रही है. बेंगलुरु स्थित ओरेकल इंडिया के ग्रुप मैनेजर (सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट) ऋषिकेश नरशा की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. 16 साल तक कंपनी को अपनी सेवाएं देने के बाद ऋषिकेश उन हजारों कर्मचारियों में शामिल हो गए हैं, जिनकी नौकरी एक झटके में चली गई.

ऋषिकेश नरशा के पोस्ट ने कॉरपोरेट जगत में वफादारी और अचानक होने वाले बदलावों पर बहस छेड़ दी है. ऋषिकेश ने अपनी पोस्ट में उस मानसिक स्थिति का जिक्र किया है, जिससे हजारों IT प्रोफेशनल गुजर रहे हैं. ओरेकल इंडिया के बेंगलुरु और अन्य केंद्रों पर हुई छंटनी ने साफ कर दिया है कि यह केवल लागत कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है. ऋषिकेश का सफर केवल नौकरी का जाना नहीं है, बल्कि ऐसे लीडर की कहानी है, जिसने कंपनी को बनते भी देखा.

16 साल के सफर का अचानक अंत

ओरेकल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु में ग्रुप मैनेजर के पद पर तैनात ऋषिकेश नरशा के लिए पिछला दिन किसी बुरे सपने जैसा था. 16 साल के शानदार करियर के बाद उन्हें पता चला कि वे अब कंपनी का हिस्सा नहीं हैं. ऋषिकेश ने लिंक्डइन पर लिखा कि यह बहुत ही अजीब बदलाव है. जब आप सुबह उठते हैं और महसूस करते हैं कि आपका रूटीन रातों-रात बदल गया है. उन्होंने लिखा, मेरा दिमाग अब भी उन प्रोजेक्ट्स की टू-डू लिस्ट (To-do list) बना रहा है जो अब मेरे नहीं रहे.

मानवीय संघर्ष और भविष्य की चिंता

छंटनी महज एक्सेल शीट का कोई बेजान आंकड़ा नहीं है. यह किसी के बरसों के संघर्ष, उसकी पहचान और उसके परिवार के सपनों पर लगा गहरा घाव है. ऋषिकेश ने उन भारी सवालों का भी जिक्र किया जो छंटनी का शिकार कर्मचारी खुद से पूछता है- परिवार की जिम्मेदारी, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और भविष्य. उन्होंने स्वीकार किया कि वह भी उसी मानसिक जद्दोजहद से गुजर रहे हैं, जिससे अन्य प्रभावित कर्मचारी. यह पोस्ट उन लाखों लोगों की आवाज बन गई है, जो टेक इंडस्ट्री में चल रहे अनिश्चित दौर का सामना कर रहे हैं.

नौकरी गई पर तजुर्बा साथ है

इतने लंबे समय के बाद अचानक नौकरी जाने के बावजूद ऋषिकेश ने कड़वाहट के बजाय कृतज्ञता को चुना. उन्होंने कहा कि वह इस अध्याय के अंत पर फोकस करने के बजाय उन 16 सालों का जश्न मनाना चाहते हैं, जिन्होंने उन्हें लीडर के रूप में गढ़ा. उन्होंने अपने उन साथियों और पार्टनर्स का शुक्रिया अदा किया, जिनमें से कई उनके जीवनभर के मित्र बन गए हैं. उनका यह नजरिया सोशल मीडिया पर लोगों को प्रेरित कर रहा है कि कैसे मुश्किल समय में भी गरिमा बनाए रखी जाती है.

ओरेकल में छंटनी क्यों हुई?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओरेकल ने अपनी स्ट्रैटेजी में ‘क्लाउड’ और ‘एआई’ (AI) को प्राथमिकता दी है, जिसके कारण पुराने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मॉडल्स और उनमें लगे अनुभवी वर्कफोर्स में कटौती की जा रही है. बेंगलुरु ओरेकल का बड़ा केंद्र है. वहां इस तरह की छंटनी से हजारों अनुभवी इंजीनियरों पर असर पड़ा है. ऋषिकेश जैसे सीनियर प्रोफेशनल्स, जो स्केल्ड एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट में माहिर हैं, उनके लिए भी अब मार्केट में नई संभावनाएं तलाशना बड़ी चुनौती है.

नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं ऋषिकेश

अपनी पोस्ट के आखिर में ऋषिकेश नरशा ने स्पष्ट किया कि वे नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं. इंजीनियरिंग लीडरशिप में अपने व्यापक अनुभव के साथ वे नए अवसरों की तलाश में हैं. उन्होंने टेक कम्युनिटी से मदद और लीड्स शेयर करने की अपील की है. उनकी कहानी से समझ में आता है कि 2026 के टेक वर्ल्ड में अनुभव की कद्र तो है, लेकिन कॉरपोरेट बदलाव किसी का इंतजार नहीं करते. अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या इंडस्ट्री इन अनुभवी दिग्गजों को फिर से वही सम्मान और स्थान दे पाएगी.



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