नई दिल्ली (Law of Inertia). सोचिए, आप बहुत आराम से बस में बैठे हैं. अचानक ड्राइवर ब्रेक लगाता है और आप बिना चाहे आगे की तरफ झुक जाते हैं. ऐसा लगता है कि जैसे किसी अदृश्य हाथ ने आपको धक्का दे दिया हो. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? साइंस की दुनिया में इसे ‘जड़त्व’ या Inertia कहते हैं. यह शब्द सुनने में भारी लग सकता है. लेकिन इसका मतलब बहुत ही सरल है- बदलाव का विरोध करना. हमारी रोजाना की जिंदगी में साइंस के कई फॉर्मूले काम करते हैं.
न्यूटन का गति का पहला नियम क्या है?
इस स्थिति के पीछे का मुख्य कारण सर आइजैक न्यूटन का दिया गया ‘गति का पहला नियम’ है, जिसे ‘जड़त्व का नियम’ (Law of Inertia) भी कहा जाता है. जड़त्व किसी भी वस्तु का वह स्वाभाविक गुण है, जिसके कारण वह अपनी वर्तमान स्थिति (चाहे वह विराम अवस्था हो या गतिमान अवस्था) में बदलाव का विरोध करती है. आसान शब्दों में कहें तो वस्तु जिस हाल में है, उसी हाल में बने रहना चाहती है.
What is Inertia: जड़त्व क्या है?
इसे आप चीजों की ‘पुरानी आदत’ कह सकते हैं. हर चीज अपनी मौजूदा हालत को बनाए रखने के लिए बहुत जिद्दी होती है. जड़त्व किसी भी चीज का वह अंदरूनी स्वभाव है, जो उसे अपनी स्थिति में किसी भी बदलाव से रोकता है. इसका सीधा सा नियम है:
- रुकी हुई चीज: वह तब तक नहीं हिलेगी जब तक आप उसे धक्का न दें.
- चलती हुई चीज: वह तब तक नहीं रुकेगी जब तक ब्रेक या कोई रुकावट उसे न रोके.
बस के रुकते ही झटका क्यों लगता है?
जब बस चल रही होती है तो आपका शरीर भी बस के साथ उसी स्पीड से दौड़ रहा होता है. जैसे ही ब्रेक लगता है, बस तो रुक जाती है लेकिन आपके शरीर का ऊपरी हिस्सा अब भी ‘पुरानी स्पीड’ में ही रहना चाहता है. वह अपनी ‘गति’ को छोड़ना नहीं चाहता (यही उसकी जिद है). बस रुक गई, मगर शरीर का ऊपरी हिस्सा अपनी गति की ‘पुरानी आदत’ के कारण आगे की तरफ निकल जाता है.
न्यूटन का पहला नियम: जो जैसा है, वैसा ही रहेगा
न्यूटन का गति का पहला नियम कहता है कि जब तक किसी चीज को बाहर से धक्का न दिया जाए या रोका न जाए, वह अपनी स्थिति नहीं बदलेगी. इसे ‘यथास्थिति का नियम’ भी कहते हैं.. यानी जो चीज जैसी है, वह वैसी ही बनी रहना चाहती है.
बस के अचानक रुकने पर क्या होता है?
जब आप एक चलती हुई बस में सवार होते हैं तो आपका पूरा शरीर बस के साथ-साथ गति (Motion) में होता है. जैसे ही ड्राइवर अचानक ब्रेक लगाता है, बस का निचला हिस्सा (जो बस के फर्श के संपर्क में है) तुरंत रुक जाता है. लेकिन आपके शरीर का ऊपरी हिस्सा, जड़त्व (Inertia of Motion) के कारण अपनी गति को बनाए रखने की कोशिश करता है. इसी वजह से आपका ऊपरी शरीर आगे की तरफ झुक जाता है या धक्का महसूस करता है.
विराम का जड़त्व (Inertia of Rest)
फिजिक्स की इसी थ्योरी का दूसरा पहलू तब दिखता है, जब रुकी हुई बस अचानक चलती है. इस स्थिति में, बस के साथ आपके पैर तो मोशन में आ जाते हैं, लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा ‘विराम के जड़त्व’ के कारण स्थिर रहना चाहता है. रिजल्ट के तौर पर आप पीछे की तरफ झुक जाते हैं.
Examples of Inertia in Daily Life: रोजाना की जिंदगी में जड़त्व के अन्य उदाहरण
जड़त्व केवल बसों तक सीमित नहीं है, यह हमारे आस-पास हर जगह है:
- कंबल झाड़ना: जब हम कंबल को छड़ी से पीटते हैं तो कंबल मोशन में आ जाता है. लेकिन धूल के कण जड़त्व के कारण स्थिर रहना चाहते हैं और बाहर निकल जाते हैं.
- पेड़ से फल गिरना: पेड़ की टहनी हिलाने पर टहनी गति में आती है, लेकिन फल अपनी जगह स्थिर रहना चाहते हैं और टूटकर नीचे गिर जाते हैं.
- कैरम बोर्ड: स्ट्राइकर से नीचे वाली गोटी मारने पर सिर्फ वही बाहर निकलती है, बाकी की ढेरी वैसी ही खड़ी रहती है.
सिक्के और ग्लास वाला आसान एक्सपेरिमेंट
आप इसे घर पर भी आजमा सकते हैं. किसी कांच के ग्लास के ऊपर ताश का एक पत्ता (Card) रखें और उस पर एक सिक्का रख दें. अब पत्ते को अपनी उंगली से तेजी से झटका दें. आप देखेंगे कि पत्ता तो उड़ गया, लेकिन सिक्का ग्लास के अंदर गिर गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सिक्का जड़त्व (अपनी जिद) के कारण अपनी जगह पर ही ‘रुका’ रहना चाहता था, भले ही पत्ता वहां से हट गया.
वजन और जड़त्व का क्या नाता है?
लॉ ऑफ इनर्शिया समझने के लिए वजन और जड़त्व के बीच का कनेक्शन समझना भी जरूरी है. जिस चीज में जितना ज्यादा वजन होगा, उसकी ‘जिद’ (जड़त्व) उतनी ही ज्यादा होगी. एक फुटबॉल को किक मारना आसान है, लेकिन उसी साइज के भारी पत्थर को हिलाना मुश्किल, क्योंकि भारी पत्थर अपनी जगह न छोड़ने की ज्यादा जिद करता है.




