राजपाल यादव की 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अभिनेता के रुख पर नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की, ‘जज को कमजोर मत समझिये अगर वह आपके साथ नरमी बरत रहा है.’
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव के रुख पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अदालत को अलग-अलग तरह के जवाब मिल रहे हैं. एक ओर राजपाल यादव खुद भुगतान करने की बात कर रहे हैं, वहीं उनके वकील यह तर्क दे रहे हैं कि चूंकि वह जेल जा चुके हैं, इसलिए उन्हें अब भुगतान नहीं करना चाहिए.
जज ने दे दी वॉर्निंग
इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘आप कह रहे हैं कि आप पैसे देने को तैयार हैं, लेकिन आपके वकील कुछ और कह रहे हैं. अगर आप भुगतान करने को तैयार हैं, तो फिर मामला क्यों चल रहा है? भुगतान कीजिए.’
जस्टिस स्वर्ण कांता ने आगे कहा, ‘मुझे स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है. पहले कुछ और कहा गया, अब कुछ और कहा जा रहा है.’ इसी दौरान उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘कभी यह मत समझिए कि जज कमजोर है, अगर वह आपके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा है.’
‘और कोई समय नहीं दिया जाएगा’
मामले में अंतिम समझौते की कोशिश भी नाकाम रही. राजपाल यादव ने कोर्ट से 6 करोड़ रुपये के अंतिम निपटारे के लिए 30 दिन का समय मांगा, लेकिन अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया.
जस्टिस शर्मा ने साफ शब्दों में कहा, ‘नहीं का मतलब नहीं. मैं फैसला सुरक्षित रख रही हूं, और कोई समय नहीं दिया जाएगा.’
‘पांच बार और जेल भेज दीजिए’
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए राजपाल यादव ने कहा कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है. उन्होंने दावा किया कि इस मामले के चलते उन्हें अपने पांच फ्लैट बेचने पड़े और वे पहले ही बड़ी रकम चुका चुके हैं. उन्होंने भावुक अंदाज में कोर्ट से कहा, ‘मैं भावुक नहीं हूं… मुझे पांच बार और जेल भेज दीजिए.’
पहले भी जा चुके हैं जेल
गौरतलब है कि राजपाल यादव इस मामले में 5 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर चुके हैं. उन्होंने 12 दिन जेल में बिताए और 16 फरवरी को 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी.
इससे पहले मई 2024 में उन्हें छह महीने की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में इस आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया था कि वे बकाया राशि चुका देंगे. हालांकि, पर्याप्त समय मिलने के बावजूद वे भुगतान नहीं कर सके.





