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Indian Ships Cross Strait of Hormuz: ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि कर रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे बड़ा चोकपॉइंट बन गया है. चूंकि इस रास्ते से दुनिया के 25 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस की सप्लाई होती हैं और इसके बंद होने से पूरी दुनिया में तेल और गैस की कमी हो गई है. इसी बीच समंदर में भारत की रणनीति दिखी. जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाज और जेट जाने से कांप रहे हैं, वहां से एक के बाद एक आठ भारतीय जहाज सीना तान कर निकले हैं. जंग शुरू (28 फरवरी) के बाद से कम से कम 8 भारतीय जहाजों ने इस खतरनाक रास्ते को सफलतापूर्वक पार किया है. ईरान ने भारत को मित्र राष्ट्र बताते हुए इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया है.
शिवालिक: भारतीय तिरंगा वाला शिवालिक उन शुरुआती जहाजों में से एक था जिसने 28 फरवरी के बाद हॉर्मुज को पार किया. जब दुनिया भर की शिपिंग कंपनियां अपने रूट बदल रही थीं, तब शिवालिक ने भारतीय कूटनीति के भरोसे इस संकरे रास्ते को पार किया. इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए एक बड़ी जीत थी.

नंदा देवी: नंदा देवी ने बेहद तनावपूर्ण माहौल में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारतीय बंदरगाहों की ओर रुख किया. गैस और तेल की विशाल खेप लेकर चल रहे इस जहाज पर पूरी दुनिया की नज़रें थीं. ईरान की ओर से सुरक्षित मार्ग के आश्वासन के बाद, नंदा देवी ने बिना किसी रुकावट के अपनी यात्रा पूरी की. इसकी सफलता ने भारतीय बाज़ारों में ईंधन की कमी को पूरी तरह खत्म किया और आम आदमी को बड़ी राहत दी.

ग्रीन सांवी: इस सूची का सबसे ताजा और आठवां नाम ग्रीन सांवी है. शुक्रवार रात को ही इस विशाल गैस कैरियर ने सट्रेट ऑफ हॉर्मुज को सफलतापूर्वक पार किया. 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी के साथ ग्रीन सांवी अब भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने ही वाला है. इसकी सुरक्षित विदाई पर ईरानी दूतावास ने भी एक्स पर पोस्ट कर भारतीय मित्रों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया, जो भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है.
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बीडब्ल्यू एल्म: बीडब्ल्यू एल्म उन गैस कैरियर्स की सूची में शामिल है, जिन्होंने इस संकट काल में भारत का साथ निभाया. भारी मात्रा में तरल गैस लेकर निकले इस जहाज ने खतरनाक चोकपॉइंट को सफलतापूर्वक पार किया. भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच सटीक तालमेल का ही परिणाम था कि बीडब्ल्यू एल्म जैसे बड़े जहाजों को ईरान ने बिना किसी जांच या बाधा के गुजरने की अनुमति दी.

बीडब्ल्यू टायर: भारतीय हितों से जुड़े बीडब्ल्यू टायर ने तब हॉर्मुज को पार किया जब अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमले चरम पर थे. इस जहाज की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी स्टैंडबाय मोड पर थे. बीडब्ल्यू टायर की सफल यात्रा ने वैश्विक स्तर पर यह संदेश दिया कि भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कूटनीतिक और सामरिक प्रयास करने में सक्षम है.

जग वसंत ने 28 मार्च को गुजरात के वाडिनार टर्मिनल पर पहुंचा. करीब 47,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आए इस जहाज ने हॉर्मुज में जारी समुद्री नाकाबंदी को धता बताते हुए अपना मिशन पूरा किया. जग वसंत के चालक दल ने युद्ध क्षेत्र में भी अद्भुत संयम दिखाया. इसकी पहुँच के बाद शिप-टू-शिप (STS) ऑपरेशन के जरिए गैस की सप्लाई को देश के अन्य हिस्सों में भेजा गया.

पाइन गैस: एलपीजी की भारी मात्रा लेकर पाइन गैस ने मार्च के अंतिम सप्ताह में भारतीय समुद्री तट पर दस्तक दी. हॉर्मुज के उस पार से भारत के लिए रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे इस जहाज ने बखूबी अंजाम दिया. पाइन गैस की सुरक्षित आवाजाही ने यह सुनिश्चित किया कि युद्ध के कारण भारत के आम घरों की रसोई का बजट न बिगड़े और गैस की किल्लत पैदा न हो.

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी (Great Eastern Shipping) का यह विशाल टैंकर जग लाड़की युद्ध की आग के बीच समंदर का सीना चीरते हुए निकला. 20% वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार वाले इस रास्ते पर जब ड्रोन और मिसाइलों का खतरा मंडरा रहा था, तब इस जहाज ने भारतीय साहस का परिचय दिया. जग लाड़की की सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जिससे घरेलू रिफाइनरियों को कच्चा तेल मिलता रहा.





