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Barmer Hindi News: यह प्रेरणादायक कहानी एक बेटी की है, जिसने अपने पिता के सहयोग और मार्गदर्शन से सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ. जनक ने कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास और मजबूत आत्मविश्वास के बल पर प्रतियोगी परीक्षा में 44वीं रैंक हासिल कर गणित व्याख्याता बनने का सपना पूरा किया. इस सफर में उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और हौसला बढ़ाया.
बाड़मेर. कहते हैं कि एक पिता का विश्वास और माँ का समर्पण बेटी को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है. सरहद से सटे बाड़मेर जैसे इलाके में जहाँ कभी बेटियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बेहद कम थी वहाँ से निकलकर एक बेटी का अफसर बनना किसी मिसाल से कम नहीं है.
खारा राठौड़ान जैसे छोटे से गाँव जहाँ कभी बेटियों के स्कूलों में नामांकन तक शून्य रहा वहीं की जनक कँवर ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. पिता की प्रेरणा और माँ के त्याग को अपनी ताकत बनाकर जनक ने न सिर्फ शिक्षा की राह चुनी बल्कि उसे मुकाम तक भी पहुँचाया है. बीते दिनों राजस्थान स्कूली शिक्षा व्याख्याता परीक्षा में जनक कँवर ने गणित विषय में सफलता हासिल करते हुए मैदान मार दिया है.
लगातार तीसरी पीढ़ी बनी शिक्षक, गणित स्कूल व्याख्याता में हासिल की 44वी रैंक
जनक कँवर खुद तीसरी पीढ़ी की शिक्षक बनी है. उनके पिता रेवन्त सिंह बाड़मेर के रामसर गाँव मे शिक्षक के तौर पर सेवाएं दे रहे है. वही दादा भी शिक्षक रह चुके है. जनक कँवर के भाई दशरथ सिंह और सुरेंद्र सिंह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है वही उनकी बहन प्रकाश कँवर और माँ एवन कँवर गृहणी है. गणित में राज्य भर में 44वी रैंक लाने वाली जनक कँवर की शुरुआती शिक्षा गाँव मे हुई है.
गांव की पहली गैजेटेड ऑफिसर बनी जनक
उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं बाड़मेर के मयूर स्कूल से की. उसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए वनस्थली टोंक चली गई. सेल्फ स्टडी से जनक कँवर ने पहले ही प्रयास में सामान्य वर्ग में इस परीक्षा को पास कर इतिहास रच दिया है. जनक कँवर बताती है कि गाँव की अंशू कँवर तृतीय श्रेणी शिक्षिका है और उसे गाँव की पहली गजेटेड अफसर बनके दिखाना था और वह उसने कर दिखाया है. वह बताती है कि वह अपने गाँव की पहली अफसर बिटिया है और वह चाहती है कि यह सिलसिला चलता रहे.
माता-पिता व परिवार के सहयोग से पाया मुकाम
जनक कँवर बताती है कि माँ ने कभी घर का काम करने नही दिया और पिता ने उसकी मेहनत पर पूरा भरोसा रखा. यही वजह रही कि वह अपने पहले प्रयास में सफल रही..जनक कँवर चाहती है कि गाँवो में बेटियों की उच्च शिक्षा का प्रभाव तेजी से बढ़े और बेटियां उच्च शिक्षा पाकर समाज मे नजीर पेश करे. जनक कँवर बताती है कि उसकी यह सफलता पहली है आखिरी नही..
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