चेन्नई/पुडुचेरी: तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में इस बार एक दिलचस्प सियासी तस्वीर सामने आई है. ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनावी मैदान में उतरकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. खास बात यह है कि तीनों पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और सभी की राहें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.
पत्नी अन्नाद्रमुक से मैदान में
मार्टिन की पत्नी लीमा रोज हाल ही में अन्नाद्रमुक में शामिल हुई हैं. पार्टी ने 59 वर्षीय समाजसेविका को तिरुचिरापल्ली जिले की लालगुडी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. लीमा रोज पहले ‘इंडिया जननायक काची’ से जुड़ी थीं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पाला बदलकर अन्नाद्रमुक का दामन थाम लिया. पार्टी ने उन्हें महिला शाखा की संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी है.
बेटे ने बनाई अपनी पार्टी, पुडुचेरी में दांव
वहीं, उनके बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन ने राजनीति में अलग रास्ता अपनाते हुए अपनी खुद की पार्टी ‘लक्ष्य जननायक काची’ (एलजेके) बनाई है. वह पुडुचेरी के कामराज नगर सीट से एआईएनआरसी के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं. 38 वर्षीय जोस चार्ल्स पहले भाजपा से जुड़े थे, लेकिन दिसंबर 2025 में उन्होंने पार्टी छोड़कर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की.
दामाद टीवीके से चेन्नई में चुनौती
परिवार के तीसरे सदस्य और लीमा रोज के दामाद आधव अर्जुन चेन्नई की विल्लीवक्कम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने पहले वीसीके में काम किया, लेकिन फरवरी 2025 में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल हो गए. अब वह इसी पार्टी के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
पहली बार चुनावी मैदान में पूरा परिवार
दिलचस्प बात यह है कि मार्टिन परिवार के ये तीनों सदस्य पहली बार चुनावी मैदान में हैं. उनकी किस्मत का फैसला 9 अप्रैल और 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में होगा. अलग-अलग दलों से चुनाव लड़ने के बावजूद परिवार के भीतर सियासी विविधता साफ दिखाई दे रही है.
‘लोकतंत्र में अलग राय होना स्वाभाविक’
जोस चार्ल्स मार्टिन का कहना है कि लोकतंत्र में यह जरूरी नहीं कि परिवार के सभी सदस्य एक ही राजनीतिक विचारधारा या पार्टी का समर्थन करें. उनके मुताबिक, हर व्यक्ति को अपनी पसंद और विचारधारा के अनुसार राजनीतिक रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए.
सियासत में दिलचस्प मुकाबले की तस्वीर
तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग दलों से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. अब सबकी नजर चुनावी नतीजों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि इस सियासी प्रयोग में किसकी किस्मत चमकती है.
मजदूरी के दौर से निकलकर लॉटरी किंग बने सैंटियागो मार्टिन
59 वर्षीय मार्टिन का कारोबार लॉटरी से लेकर रियल एस्टेट तक फैला है. उन्होंने अपने व्यवसाय को भारत के कई राज्यों के साथ भूटान और नेपाल तक फैलाया. हालांकि, उनके कारोबार पर कई बार सवाल भी उठे हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी कंपनी फ्यूचर गेमिंग समेत कई संस्थाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं, जिन्हें मार्टिन और उनकी कंपनी ने खारिज किया है.
मार्टिन का सफर संघर्षों से भरा रहा है. कभी म्यांमार में मजदूरी करने वाले मार्टिन ने कोयंबटूर से अपना व्यवसाय शुरू किया और लॉटरी कारोबार में बड़ा नाम बनाया. अब उनका परिवार सियासत में कदम रखकर नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं.





