Today Weather Live | Aaj Ka Mausam Live: भूमध्य सागर से उठा ‘तूफान’ दिखाएगा दम? धूल भरी आंधी और बारिश का जबरदस्त अटैक, 13 राज्यों में IMD का अलर्ट

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Aaj Ka Mausam Live: देश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. बिहार से लेकर पहाड़ तक मौसम बदलने वाला है. आसमान शांत दिखता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सिस्टम सक्रिय हो चुका है. अगले कुछ दिनों में तेज हवाएं चलेंगी. धूल भरी आंधियां उठेंगी. कई जगहों पर बारिश होगी. कहीं ओले गिरेंगे तो कहीं बिजली चमकेगी. यह बदलाव सिर्फ सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं है. इसका असर सीधे आम लोगों और किसानों पर पड़ने वाला है. खेतों में तैयार खड़ी रबी की फसल पर खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह मौसम सिर्फ राहत देगा या परेशानी भी बढ़ाएगा. तकनीकी रूप से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भूमध्य सागर से ही पैदा होता है. यही सिस्टम अब भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है. मौसम विभाग यानी IMD ने ‘चेतावनी’ (Alert) जारी की है, लेकिन हर जगह ‘रेड अलर्ट’ (सबसे खतरनाक स्तर) नहीं है. कई राज्यों के लिए ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट भी जारी किया गया है.

इसका मतलब है कि स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं है. लेकिन खतरा जरूर मौजूद है. खासकर उत्तर भारत और मध्य भारत के लिए अगले 72 घंटे अहम माने जा रहे हैं. अगले तीन दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलेगा. 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है. कई जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है.

इस बीच स्काईमेट और IMD दोनों का अनुमान है कि मार्च के आखिरी दिन और अप्रैल की शुरुआत आंधी और बारिश के साथ होगी. इससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी. हालांकि यह राहत अस्थायी होगी. किसानों के लिए यह मौसम चुनौती बन सकता है क्योंकि गेहूं, चना और सरसों की फसल इस समय खेतों में तैयार खड़ी है.

उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से मौसम का बड़ा बदलाव

उत्तर भारत में 30 से 31 मार्च तक पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह सक्रिय रहेगा और इसका असर कई राज्यों में एक साथ देखने को मिलेगा. मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम अपने साथ नमी, ठंडी हवाएं और अस्थिरता लेकर आ रहा है, जिसके चलते दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक का सिलसिला शुरू होगा. कई जगहों पर ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है. खास बात यह है कि यह प्रभाव केवल दो दिनों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि 1 से 2 अप्रैल तक रुक-रुक कर मौसम में हलचल जारी रह सकती है. इस दौरान तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन मौसम की अनिश्चितता लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है.

दिल्ली-NCR में बदलता मौसम और बढ़ती सतर्कता

दिल्ली-NCR में मौसम एक ओर जहां सुहावना महसूस होगा, वहीं दूसरी ओर जोखिम भी बना रहेगा. बादलों की लगातार आवाजाही के कारण धूप और छांव का खेल चलता रहेगा. मौसम विभाग ने 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है. इसके साथ हल्की से मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. तापमान 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है इससे गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी. हालांकि, तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, धूल उड़ने और ट्रैफिक प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. राहत की बात यह है कि बारिश और हवा के कारण वायु गुणवत्ता यानी AQI में सुधार देखने को मिल सकता है.

उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश का व्यापक असर

  • उत्तर प्रदेश में 29 मार्च से दूसरा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जो पूरे राज्य के मौसम को प्रभावित करेगा. मौसम विभाग के अनुसार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और लगभग 38 जिलों में बारिश की संभावना है. इस बदलाव के चलते तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम कुछ ठंडा और सुहावना हो जाएगा, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ेगा.
  • 30 मार्च को पूरे प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है, जबकि 31 मार्च को पश्चिमी और पूर्वी यूपी में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है. 1 अप्रैल को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में मेघ गर्जन और बौछारें जारी रह सकती हैं. इस लगातार बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है, क्योंकि इस समय रबी की फसल खेतों में तैयार खड़ी है और तेज हवाएं व ओले उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं.

उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का खतरा

  • उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम काफी खराब रहने वाला है. मौसम विभाग ने पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है, इससे तापमान में और गिरावट आ सकती है. इसके चलते सड़क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है.
  • पर्यटकों और स्थानीय लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है. खासकर ट्रैकिंग या ऊंचाई वाले इलाकों में जाने वालों को मौसम अपडेट लगातार देखते रहने की जरूरत है. अचानक मौसम बदलने से परेशानी बढ़ सकती है और बचाव के उपाय पहले से करना जरूरी होगा.

हिमाचल प्रदेश में तूफान और बर्फ का डबल असर

हिमाचल प्रदेश में अप्रैल के पहले सप्ताह तक मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है. शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जैसे जिलों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. यहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं.

इसके अलावा ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है, इससे ठंडक बढ़ेगी और यात्रा करना मुश्किल हो सकता है. प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम के अनुसार योजना बनाने की सलाह दी है. बर्फबारी के कारण कई रास्ते बंद हो सकते हैं, जिससे स्थानीय गतिविधियां प्रभावित होंगी.

बिहार में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट

  • बिहार में अगले पांच दिनों तक मौसम पूरी तरह बदला रहेगा. पटना, दरभंगा, भागलपुर, समस्तीपुर और अन्य कई जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान लगाया है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है.
  • इसके साथ ही कई जिलों में ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है. किसानों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि फसल तैयार अवस्था में है और इस तरह का मौसम भारी नुकसान पहुंचा सकता है. लोगों को खुले में जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.

राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

  • राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई हिस्सों में मौसम अचानक बदल रहा है. जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और उदयपुर संभाग में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी दी है.
  • इसके अलावा कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और बिजली गिरने का भी खतरा है, जिससे जनजीवन और खेती दोनों प्रभावित हो सकते हैं. तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन मौसम की अनिश्चितता लोगों के लिए चुनौती बन सकती है.

मध्य और पश्चिम भारत में बदलता मौसम

  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात में भी मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. 29 मार्च से 1 अप्रैल के बीच इन राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है.
  • इस दौरान बिजली गिरने और तूफानी हवाओं के कारण लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि अचानक मौसम बदलने से फसलों को नुकसान हो सकता है और कटाई में देरी हो सकती है.

दक्षिण भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर

  • दक्षिण भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में हलचल बनी हुई है. तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराईकल में बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है. हालांकि, अन्य हिस्सों में गर्मी बढ़ रही है और हीटवेव का असर धीरे-धीरे शुरू हो रहा है.
  • चेन्नई और आसपास के इलाकों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन तेज गर्मी से राहत सीमित समय के लिए ही मिलेगी. तटीय इलाकों में नमी बढ़ेगी, जिससे उमस भी महसूस हो सकती है.

नॉर्थ ईस्ट में सक्रिय वेदर सिस्टम

  • पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मौसम सक्रिय बना हुआ है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में बारिश और गरज-चमक की संभावना है. इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है.
  • पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ हिस्सों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. इस दौरान तापमान सामान्य रहेगा, लेकिन लगातार बारिश और तूफानी गतिविधियों के कारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है?

पश्चिमी विक्षोभ एक बड़ा वेदर सिस्टम होता है, जो भूमध्य सागर के आसपास बनता है और ठंडी, नम हवाओं के साथ भारत की ओर बढ़ता है. यह उत्तर भारत में पहुंचकर बारिश, बर्फबारी और आंधी जैसी गतिविधियां पैदा करता है. यह कोई एक तूफान नहीं, बल्कि कई परतों वाला जटिल सिस्टम होता है, जो मौसम को अचानक बदल देता है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा?

सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत के राज्यों में दिखेगा, जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा. इसके अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसका प्रभाव रहेगा. पहाड़ी राज्यों में इसका असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है.

क्या इससे किसानों को नुकसान होगा?

हां, इस समय रबी की फसल तैयार है. गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें खेतों में खड़ी हैं. तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि इन फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा.

क्या यह गर्मी से राहत देगा?

यह सिस्टम अस्थायी राहत जरूर देगा. तापमान में गिरावट आएगी और कुछ दिनों तक मौसम सुहावना रहेगा. लेकिन जैसे ही सिस्टम कमजोर होगा, गर्मी फिर से बढ़ने लगेगी.

लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

लोगों को खराब मौसम के दौरान घर के अंदर रहने की कोशिश करनी चाहिए. खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. यात्रा से पहले मौसम अपडेट जरूर देखें. किसानों को फसल की सुरक्षा के उपाय पहले से कर लेने चाहिए.



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