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क्या आपने ट्रेन के डिब्बे पर लिखा M1 देखा है? यह भारतीय रेलवे का नया AC 3-Tier Economy कोच है, जो उन यात्रियों के लिए बनाया गया है जो कम किराए में एसी का सफर करना चाहते हैं. इसमें रेगुलर थर्ड एसी के मुकाबले ज्यादा सीटें होती हैं, जिससे किराया 6-8% तक कम हो जाता है. क्या यह कोच आपके सफर के लिए आरामदायक है? और इसमें आपको क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? इस बारे में पूरी जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें और जानें कि कैसे आप अपनी अगली यात्रा में पैसे बचा सकते हैं.
अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के डिब्बों पर एम1 (M1) लिखा हुआ जरूर देखा होगा. अक्सर लोग इसे देखकर थोड़ा उलझ जाते हैं कि आखिर ये कौन-सा नया कोच आ गया है? क्या यह रेगुलर थर्ड एसी जैसा ही है या फिर इसमें कुछ अलग सुविधाएं मिलने वाली हैं? अगर आप हैदराबाद से दिल्ली या बेंगलुरु से मुंबई जैसे लंबे रूट पर सफर कर रहे हैं, तो M1 कोच का सामना होना अब बहुत आम बात है. दरअसल, यह भारतीय रेलवे की एक खास प्लानिंग का हिस्सा है जिसे आम आदमी के बजट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आइए समझते हैं कि आपकी अगली रेल यात्रा में यह M1 टैग आपके लिए क्या मायने रखता है.

भारतीय रेलवे ने साल 2021 में एक नई शुरुआत की थी, जिसके तहत कोच पर M1, M2 या M3 जैसी मार्किंग की जाने लगी. सीधे शब्दों में कहें तो ये AC 3-Tier Economy कोच हैं, जिन्हें 3E क्लास भी कहा जाता है. रेलवे ने इसे इसलिए शुरू किया ताकि यात्री प्लेटफॉर्म पर अपने कोच को आसानी से पहचान सकें और बोर्डिंग के समय कोई कन्फ्यूजन न हो. अगर आपकी टिकट पर 3E क्लास लिखा है, तो समझ जाइए कि आपको इसी M सीरीज वाले कोच में अपनी सीट तलाशनी है. यह नया सिस्टम यात्रियों की सुविधा और भीड़ को मैनेज करने के लिए लाया गया है.

पुराने समय में हम देखते थे कि थर्ड एसी कोच को B1, B2 और स्लीपर को S1 जैसे नाम दिए जाते थे. लेकिन अब बदलते वक्त के साथ रेलवे ने एक ज्यादा किफायती एसी विकल्प पेश किया है. ये ‘M’ सीरीज वाले कोच ज्यादातर आधुनिक LHB डिब्बों में इस्तेमाल होते हैं. ये डिब्बे जर्मन टेक्नोलॉजी पर आधारित हल्के और स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं, जो न केवल ट्रेन की रफ्तार बढ़ाते हैं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी काफी बेहतर माने जाते हैं. हैदराबाद और सिकंदराबाद जैसे बड़े स्टेशनों से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में अब इनका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है.
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अब सवाल यह उठता है कि एक रेगुलर 3AC कोच और इस M1 यानी इकोनॉमी कोच में आखिर अंतर क्या है? हालांकि दोनों ही थर्ड एसी कोच हैं, लेकिन M1 इसका सस्ता वर्जन है. सबसे बड़ा फर्क सीटों की संख्या और किराए में है. जहां एक सामान्य 3AC कोच में करीब 72 बर्थ होती हैं, वहीं M1 कोच में लगभग 83 सीटें फिट की गई हैं. इसका मतलब है कि एक ही डिब्बे में ज्यादा लोग सफर कर सकते हैं. सीटों की संख्या बढ़ने की वजह से पैरों को फैलाने की जगह यानी लेगरूम थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन इसके बदले में आपको किराए में करीब 6% से 8% तक की छूट मिल जाती है.

आराम और सुविधाओं की बात करें तो रेगुलर 3AC कोच में आपको थोड़ा ज्यादा स्पेस और कुछ ट्रेनों में प्राइवेसी कर्टन्स यानी पर्दे जैसी सुविधाएं मिलती हैं. इसके मुकाबले M1 कोच थोड़ा कॉम्पैक्ट होता है, खासकर मिडिल बर्थ पर स्पेस की कमी महसूस हो सकती है. फिर भी, रेलवे ने इसमें जरूरी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा है. हर सीट के पास चार्जिंग पॉइंट, रीडिंग लाइट, पंखे और बेहतरीन एयर कंडीशनिंग दी गई है. टॉयलेट्स और बेडरोल (चुनिंदा ट्रेनों में) जैसी सुविधाएं लगभग एक जैसी ही रहती हैं, बस फर्क सिर्फ इतना है कि इस कोच में यात्रियों की संख्या थोड़ी ज्यादा होती है.

भारतीय रेलवे की गाइडलाइन्स के मुताबिक, M1 कोच को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एसी में सफर करना हर किसी की पहुंच में हो. हैदराबाद, विशाखापत्तनम या विजयवाड़ा जैसे शहरों के बीच यात्रा करने वालों के लिए यह एक वरदान जैसा है क्योंकि यहाँ आप कम पैसे खर्च करके एसी का आनंद ले सकते हैं. छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह काफी फायदेमंद है क्योंकि वे हर यात्रा पर ₹300 से ₹500 तक बचा सकते हैं. साथ ही, ज्यादा सीटें होने की वजह से त्योहारों या भीड़-भाड़ वाले सीजन में कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

मिडिल क्लास यात्रियों के लिए बचत सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है. उदाहरण के लिए, अगर कोई परिवार सिकंदराबाद से नई दिल्ली जा रहा है, तो M1 कोच चुनकर वह कुल किराए में ₹1,000 से ₹2,000 तक की बड़ी बचत कर सकता है. इसे बुक करना बहुत आसान है; बस IRCTC ऐप या वेबसाइट पर बुकिंग के समय कोच टाइप चेक करें. अगर वहां M1 या ‘3E’ दिख रहा है, तो समझ जाएं कि यह इकोनॉमी एसी का विकल्प है. आजकल यह कोच बहुत सारी पॉपुलर ट्रेनों में तेजी से जोड़े जा रहे हैं.

रिफंड और कैंसलेशन के नियम M1 कोच के लिए भी वही हैं जो अन्य एसी क्लास के लिए होते हैं. हालांकि, एक बार टिकट बुक होने के बाद आप कोच का टाइप नहीं बदल सकते. भविष्य में भारतीय रेलवे ‘M’ सीरीज वाले इन कोचों को और भी ज्यादा ट्रेनों में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. कुल मिलाकर कहें तो M1 कोच उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कम बजट में आरामदायक सफर करना चाहते हैं, लेकिन बहुत लंबी यात्रा के लिए यात्रियों को अपनी सुविधा और बजट के बीच सही चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए.


