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US Iran Israel War India Role: ईरान जंग पर पाकिस्तान में चाहे जो भी बैक-चैनल बातचीत की अटकलें चल रही हों, लेकिन वैश्विक स्तर पर शांति बहाली और आर्थिक स्थिरता के लिए असली ‘मास्टरमाइंडिंग’ वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हो रही है. भारत अब केवल एक दर्शक नहीं है, बल्कि वह ताकत है जो युद्ध और शांति के नियम तय करने में अहम भूमिका निभा रही है.
ट्रंप ने पीएम मोदी को किया फोन, उधर पाकिस्तान में डील की अटकलें.
मिडिल ईस्ट में मचे बवाल के बीच कूटनीति की बिसात पर चालें बहुत तेजी से बदली जा रही हैं. एक तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच गुपचुप ‘डील’ और बातचीत की अटकलें तेज हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीति का असली केंद्र नई दिल्ली बनता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान जंग 5 दिन रोकने का ऐलान किया और अगले ही दिन सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की. दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप ने ऐलान के बाद से 24 घंटों में किसी और देश के नेता से फोन पर सीधी बातचीत की हो, फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल रही है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध रोकने के इतने बड़े फैसले के बाद किसी यूरोपीय सहयोगी, अरब देश या अन्य वैश्विक नेता को फोन नहीं किया; उन्होंने सिर्फ पीएम मोदी को चुना. कूटनीति में यह एक बहुत बड़ा संदेश है. यह दिखता है कि संकट के समय में अमेरिका, भारत को अपना सबसे बड़ा और भरोसेमंद रणनीतिक साझीदार मानता है. कूटनीतिक मामलों के जानकारों की मानें तो अमेरिका कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले या तुरंत बाद भारत को लूप में रखना चाहता है. यह सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि आगे की रणनीति पर सहमति बनाना है.
होर्मुज और अमेरिका का स्पष्ट संदेश
इजरायल का भरोसा और भारत की ‘शांत कूटनीति’
अमेरिका जानता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसे ऊर्जा की सख्त जरूरत है. ट्रंप और पीएम मोदी की बातचीत का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि भारत और बाकी दुनिया की ऊर्जा जरूरतों यानी कच्चे तेल की सप्लाई में कोई बाधा न आए. इसी बीच इजरायल के राजदूत रुविन अजार का यह बयान आना कि “जंग रुकवाने में भारत की भूमिका हो सकती है”, भारत की सॉफ्ट पावर और कूटनीतिक वजन को साबित करता है.
भारत कैसे खेल रहा है कूटनीतिक खेल?
पाकिस्तान जहां खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘पोस्टमैन’ या ‘मीडिएटर’ के रूप में पेश करके अपनी अहमियत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत एक ग्लोबल लीडर की तरह व्यवहार कर रहा है. भारत का फोकस सिर्फ बातचीत कराने पर नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर है. भारत दुनिया का अकेला ऐसा शक्तिशाली देश है, जिसके अमेरिका और इजरायल के साथ रणनीतिक संबंध हैं, और साथ ही अरब देशों के साथ भी गहरे व्यापारिक रिश्ते हैं. यही वजह है कि जब मध्य पूर्व में शांति की बात आती है, तो इजरायल से लेकर अमेरिका तक, सबको भारत की मध्यस्थता स्वीकार्य लगती है. भारत किसी भी पक्ष की तरफ से सीधे युद्ध में नहीं उतर रहा है, लेकिन वह अपने ‘राष्ट्रीय हितों’ को लेकर बेहद आक्रामक कूटनीति कर रहा है.
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