1. उत्तर बंगाल: बीजेपी का अभेद्य किला
सर्वे के अनुसार, उत्तर बंगाल के मालदा, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी में बीजेपी की स्थिति 2021 से भी मजबूत हुई है. चाय बागान श्रमिकों की नाराजगी और राजबंशी समुदाय का समर्थन बीजेपी को बढ़त दिला रहा है. ओपिनियन पोल में यहां बीजेपी को 38 से 41 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी यहां काफी पिछड़ती नजर आ रही है.
कोलकाता, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, और हावड़ा ऐसे क्षेत्र हैं जहां टीएमसी का ‘एकछत्र राज’ जारी रहने की उम्मीद है. अकेले दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों में से टीएमसी 30 तक सीटें जीत सकती है. कोलकाता की सभी 11 सीटों पर भी टीएमसी की बढ़त दिखाई गई है. यहां ‘अस्मिता’ और ‘विकास’ के नाम पर शहरी वोटर अब भी ममता बनर्जी के साथ खड़ा दिख रहा है.
3. जंगलमहल: कांटे की टक्कर
बांकुरा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के आदिवासी बहुल इलाकों में बीजेपी और टीएमसी के बीच ‘नेक-टू-नेक’ फाइट है. 2021 में यहां टीएमसी ने वापसी की थी, लेकिन इस बार ‘भ्रष्टाचार’ और ‘राष्ट्रपति के अपमान’ जैसे मुद्दों ने बीजेपी को फिर से यहाँ संजीवनी दे दी है. सर्वे यहां बीजेपी को मामूली बढ़त दिखा रहे हैं.
4. सेंट्रल बंगाल: लेफ्ट-कांग्रेस की आखिरी उम्मीद
मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में इस बार लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कुछ सीटों पर टीएमसी का खेल बिगाड़ सकता है. हालांकि, आईएसएफ और अन्य छोटी पार्टियों के आने से अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा हो सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने का अनुमान है.
जोन-वार सीटों का अनुमानित गणित (294 सीटें)
| जोन (क्षेत्र) | कुल सीटें | टीएमसी (अनुमानित) | बीजेपी (अनुमानित) | लेफ्ट+कांग्रेस |
| उत्तर बंगाल (North Bengal) | 54 | 12-15 | 38-41 | 0-1 |
| जंगलमहल (Jangalmahal) | 42 | 18-22 | 20-24 | 0 |
| डेल्टा बंगाल (South 24 Pgs, etc.) | 61 | 52-55 | 6-8 | 0-1 |
| सेंट्रल बंगाल (Nadia, Murshidabad) | 48 | 25-28 | 15-18 | 4-6 |
| ग्रेटर कोलकाता और हुगली | 89 | 58-62 | 25-28 | 1-2 |
| कुल योग | 294 | 165-182 | 104-119 | 5-10 |
ओपिनियन पोल के औसत निष्कर्ष बताते हैं कि टीएमसी 148 के जादुई आंकड़े को पार कर सकती है, लेकिन उसकी सीटों में 2021 के मुकाबले भारी गिरावट आ सकती है. बीजेपी पहली बार 100 के पार जाती दिख रही है, जो उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी. पिछली बार बीजेपी को बंगाल में 77 सीटें आई थीं. इस बार भ्रष्टाचार के मुद्दे जहां टीएमसी को 200 के पार जाने से रोक रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना ने उन्हें बहुमत के करीब टिकाए रखा है.





