बलिया: खाकी को शर्मसार कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से है, यहां रक्षक ही भक्षक बन गए हैं. एक रेप पीड़िता, जो सिस्टम से न्याय की गुहार लगा रही थी, उसे खाकी वर्दी वालों ने ही अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की. आरोप है कि केस की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों ने न सिर्फ पीड़िता से अश्लील बातें कीं, बल्कि चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर उभांव थाने के तत्कालीन क्राइम इंस्पेक्टर ने पीड़िता से गंदी डिमांड कर डाली. इंस्पेक्टर ने फोन पर यहां तक कह दिया, ‘सब कुछ मेरे हाथ में है, बस एक बार अकेले में मिल लो, 2 सेकंड में चार्जशीट ओके कर दूंगा.’ इस शर्मनाक मामले में अब पुलिस महकमे के दो बड़े अधिकारी फरार हैं, जबकि मुख्य आरोपी वन दरोगा को पुलिस पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है.
शादी का झांसा देकर वन दरोगा ने किया शोषण, पुलिस ने बनाया मोहरा
पूरा मामला बलिया जिले के उभांव थाना क्षेत्र का है. पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि वन दरोगा उग्रसेन कुमार जायसवाल ने शादी का झांसा देकर 8 महीने तक उसका शारीरिक शोषण किया. जब महिला ने अपने हक के लिए आवाज उठाई और शादी का दबाव बनाया, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई. पीड़िता ने 3 फरवरी 2026 को इसकी शिकायत की, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की. उच्चाधिकारियों के दखल के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी वन दरोगा अग्रसेन को 16 अप्रैल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लेकिन असली प्रताड़ना तो तब शुरू हुई जब इस मामले की जांच उभांव पुलिस के हाथों में आई.
जांच के नाम पर ‘गंदा खेल’, अश्लील कॉल और दबाव
असली प्रताड़ना तो एफआईआर के बाद शुरू हुई. पीड़िता का आरोप है कि केस की विवेचना कर रहे अधिकारी (IO) नरेश मलिक और इंस्पेक्टर संजय शुक्ला ने न्याय दिलाने के बजाय, उन्होंने पीड़िता का मानसिक और यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया. पीड़िता का कहना है कि जब भी वह केस की प्रगति या चार्जशीट के बारे में पूछती, तो अधिकारी उसे ‘अकेले में एकांत जगह’ पर मिलने के लिए बुलाते थे.
इतना ही नहीं, पीड़िता ने बताया कि इन अधिकारियों ने उसे फोन पर अश्लील बातें कीं और केस को मजबूत बनाने या चार्जशीट दाखिल करने के बदले उसे ‘अकेले में एकांत जगह’ पर मिलने के लिए बुलाते थे. वायरल ऑडियो में क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक पीड़िता को पैसों का लालच देते और अकेले मिलने के लिए गिड़गिड़ाते सुने जा सकते हैं. इंस्पेक्टर ने फोन पर कहा कि, ‘जितने पैसे लगेंगे मैं दूंगा, बस बताओ कब और कहां मिलना है?
कोर्ट जाते समय जानलेवा हमला और धमकी
पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उस पर चौतरफा दबाव बनाया जा रहा है. जब वह धारा 164 के तहत कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराने जा रही थी, तब रास्ते में उस पर हमला किया गया, जिससे उसके पैर में गंभीर चोट आई. हमलावरों ने सरेआम उसे धमकी दी कि वह ‘सुधर जाए’ और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दिए गए बयान को बदल दे. पीड़िता का दावा है कि इंस्पेक्टर संजय शुक्ला कई रसूखदार लोगों से फोन करवाकर उसे डरा रहे हैं ताकि वह अपना बयान वापस ले ले.
9 मिनट 40 सेकंड का ऑडियो और पुलिस पर एक्शन
पीड़िता ने हार मानने के बजाय हिम्मत दिखाई और क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक के साथ हुई अपनी पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली. यह ऑडियो करीब 9 मिनट 40 सेकंड का है. पीड़िता ने यह सबूत आजमगढ़ डीआईजी को सौंप दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी ने जांच सीओ रसड़ा आलोक कुमार गुप्ता को सौंपी.
जांच रिपोर्ट में क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक और थाना प्रभारी संजय शुक्ला पर लगे आरोप सही पाए गए. रिपोर्ट मिलते ही दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस अधिकारी फरार बताए जा रहे हैं और उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.
न्याय की गुहार और सुरक्षा का सवाल
पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाया है कि इंस्पेक्टर संजय शुक्ला अब भी बाहर से रसूखदारों के जरिए उस पर दबाव बनवा रहे हैं. उसे लगातार फोन आ रहे हैं कि वह अपने बयान से संजय शुक्ला का नाम हटा दे. वर्तमान में दोनों आरोपी पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी के डर से फरार बताए जा रहे हैं. वहीं, डरी-सहमी पीड़िता ने अब प्रशासन से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है और मांग की है कि वर्दी को दागदार करने वाले इन अफसरों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए.


