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मूसा डाकरी संग्रहालय में रखी गई वस्तुएं न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि यह विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की दूरदर्शिता और संग्रहण के प्रति रुचि को भी दर्शाती हैं. संग्रहालय में 1वीं-2वीं सदी की गौतम बुद्ध की दुर्लभ खंडित प्रतिमा, 11वीं-12वीं सदी की आदमकद बुद्ध प्रतिमा और सूर्य की मूर्ति देखने को मिलती है. इसके साथ ही 9वीं-10वीं सदी की हाथी और लक्ष्मी की मूर्तियाँ भी यहाँ मौजूद हैं. ये सभी कलाकृतियाँ न केवल भारतीय संस्कृति की झलक दिखाती हैं बल्कि इतिहास के गहरे अध्याय भी खोलती हैं.
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ मे स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) केवल तालीम ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए भी जानी जाती है. इस विश्वविद्यालय में कई संग्रहालय हैं, जिनमें मूसा डाकरी संग्रहालय विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र है. यह संग्रहालय दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजे हुए है, जिन्हें देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.
पहली शताब्दी के गौतम बुद्ध की है दुर्लभ प्रतिमा
मूसा डाकरी संग्रहालय में रखी गई वस्तुएं न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि यह विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की दूरदर्शिता और संग्रहण के प्रति रुचि को भी दर्शाती हैं. संग्रहालय में 1वीं-2वीं सदी की गौतम बुद्ध की दुर्लभ खंडित प्रतिमा, 11वीं-12वीं सदी की आदमकद बुद्ध प्रतिमा और सूर्य की मूर्ति देखने को मिलती है. इसके साथ ही 9वीं-10वीं सदी की हाथी और लक्ष्मी की मूर्तियाँ भी यहाँ मौजूद हैं. ये सभी कलाकृतियाँ न केवल भारतीय संस्कृति की झलक दिखाती हैं बल्कि इतिहास के गहरे अध्याय भी खोलती हैं.
शोध का आकर्षण बनेगा संग्राहालय
संग्रहालय में लकड़ी से बना एक खूबसूरत पानी का जहाज भी मौजूद है, जिसे विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर ब्रिगेडियर सैयद अहमद अली द्वारा भेंट किया गया था. यह जहाज संग्रहालय की शान बढ़ाता है और ऐतिहासिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है. इसके अलावा, संग्रहालय में वन्य जीवों के रहन-सहन और पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाने वाले मॉडल भी प्रदर्शित हैं, जो बच्चों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का कारण बनते हैं.
जानकरी देते हुए AMU के म्यूजियोलॉजी विभाग के चेयरमैन अब्दुल रहीम बताते हैं कि यह संग्रहालय सर सैयद अहमद खान के व्यक्तिगत संग्रह से जुड़ा हुआ है. साथ ही, एएमयू के पुरातत्व विभाग द्वारा एटा जिले के जखेड़ा और अतरंजी खेड़ा में कराई गई खुदाई से प्राप्त मिट्टी के बर्तन, खिलौने और अन्य अवशेष भी इस संग्रहालय में संरक्षित किए गए हैं. यह संग्रहालय न केवल शिक्षा का माध्यम है बल्कि छात्रों को इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त जरिया भी है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


